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History of India
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सुल्तान फिरोज तुगलक ने सिंचाई कर लगाने के लिए उलेमाओं से अनुमति ली थी, इस कर को क्या कहा जाता था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
यह सिंचाई कर हक-ए-शर्ब कहलाता था।
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बौद्ध धर्म के दार्शनिक और संस्थागत विकास के संदर्भ में, 'सौत्रान्तिक' तथा 'वैभाषिक' संप्रदायों की मान्यताओं और उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'वैभाषिक' संप्रదాయ के आचार्य बाह्य वस्तुओं के अस्तित्व को प्रत्यक्ष मानते हैं (प्रत्यक्षवादी), जबकि 'सौत्रान्तिक' संप्रदाय बाह्य वस्तुओं के अस्तित्व को केवल अनुमानगम्य (अनुमानवादी) मानता है।
2. महायान बौद्ध धर्म के अंतर्गत 'शून्यवाद' (माध्यमिक दर्शन) के प्रवर्तक आचार्य नागार्जुन थे, जिन्होंने प्रतीत्यसमुत्पाद को ही शून्यता का पर्याय माना है, जिसका अर्थ है कि सभी धर्म स्वसंभाव से रहित हैं।
3. बौद्ध धर्म के इतिहास में 'सर्वास्तिवाद' संप्रదాయ से ही वैभाषिक और सौत्रान्तिक दोनों उप-संप्रदाय विकसित हुए थे, जो सभी कालों (भूत, भविष्य और वर्तमान) में धर्मों के वास्तविक अस्तित्व में विश्वास करते थे।
4. तृतीय बौद्ध संगीति के उपरांत अशोक के काल में बौद्ध संघ में जो गंभीर मतभेद उत्पन्न हुए थे, उनके परिणामस्वरूप थेइवादियों (स्थविरवादियों) ने महायान मत की स्थापना की थी, जिसने आगे चलकर हीनयान को पूरी तरह समाप्त कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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