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History of India
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लोदी वंश का सबसे सर्वश्रेष्ठ और शक्तिशाली सुल्तान कौन था?

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प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से सिकंदर लोदी सबसे कुशल था।
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मध्यकालीन भारत के भक्ति और सूफी आंदोलनों के वैचारिक विकास, संतों के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनके ऐतिहासिक प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. रामानंद ने उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई, और उनके शिष्यों में कबीर, रैदास (संत रविदास), पीपा और धन्ना जैसे विभिन्न जातियों व पृष्ठभूमियों के संत शामिल थे, जिन्होंने जातिगत भेदभाव को कड़ी चुनौती दी। 2. सूफी सिलसिले के अंतर्गत 'सुहरावर्दी सिलसिला' ने कठोर आत्म-अनुशासन, सादगी और फकीरी जीवन पर अत्यधिक बल दिया, तथा उनके संतों ने चिश्ती संतों के ठीक विपरीत कभी भी शाही अनुदान, जागीरें या राजकीय पदों को स्वीकार नहीं किया। 3. मीराबाई ने राजसी सुखों का परित्याग कर भगवान कृष्ण की उपासना 'माधुर्य भाव' (प्रेमाभक्ति) से की, और उनके पद मुख्य रूप से राजस्थानी, ब्रज और गुजराती भाषा में रचे गए हैं, जिन्हें राजस्थान और गुजरात के लोक-मानस में अत्यधिक प्रतिष्ठा प्राप्त हुई। 4. सूफी संतों में 'चिश्ती सिलसिला' के प्रसिद्ध संत शेख निजामुद्दीन औलिया ने सल्तनत काल के दौरान अनेक सुल्तानों के आमंत्रण को सहर्ष स्वीकार किया और शाही दरबार में उच्च पद ग्रहण कर राजनीतिक मामलों में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? सत्रहवीं शताब्दी के मध्य में यूरोपीय शक्तियों (विशेषकर पुर्तगालियों, डच और ब्रिटिश) के मध्य भारत में व्यापारिक संघर्ष और बस्तियों की स्थापना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1612 में 'स्वाली के युद्ध' (Battle of Swally) में कैप्टन थॉमस बेस्ट के नेतृत्व में ब्रिटिश नौसेना ने पुर्तगाली बेड़े को पराजित किया, जिसके परिणामस्वरूप मुगल सम्राट जहांगीर ने अंग्रेजों को सूरत में स्थायी कारखाना स्थापित करने की अनुमति प्रदान की। 2. डच ईस्ट इंडिया कंपनी (VOC) ने भारत में अपनी पहली व्यापारिक कोठी वर्ष 1605 में मसूलीपट्टनम में स्थापित की थी, और उन्होंने मसालों के व्यापार पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए पुर्तगालियों को परास्त कर कोचीन और मलय प्रायद्वीप के कई क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया था। 3. वर्ष 1661 में पुर्तगाल की राजकुमारी कैथराइन ऑफ ब्रैगांजा का विवाह ब्रिटेन के राजा चार्ल्स द्वितीय के साथ हुआ, जिसके दहेज के रूप में अंग्रेजों को 'बॉम्बे' (मुंबई) द्वीप उपहार स्वरूप प्राप्त हुआ, जिसे बाद में चार्ल्स द्वितीय ने मात्र 10 पाउंड वार्षिक किराए पर ईस्ट India कंपनी को सौंप दिया था। 4. फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना वर्ष 1664 में जीन-बैप्टिस्ट कोल्बर्ट के प्रयासों से लुई चौदहवें के शासनकाल में हुई थी, और उन्होंने भारत में अपनी पहली फैक्ट्री वर्ष 1668 में फ्रेंको कैरो के नेतृत्व में मसूलीपट्टनम में स्थापित की थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? किस पेशवा के काल में मराठा शक्ति अपनी चरम सीमा पर थी और कटक से अटक तक भगवा लहराया था? ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों — स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी — के आर्थिक, प्रशासनिक और वैधानिक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. स्थाई बंदोबस्त (Permanent Settlement) के अंतर्गत लॉर्ड कार्नवालिस ने बंगाल, बिहार और उड़ीसा में भू-राजस्व की मांग को जमींदारों के लिए हमेशा के लिए निश्चित कर दिया था, किंतु जमींदारों द्वारा समय पर लगान अदायगी सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 'सूर्यास्त कानून' (Sunset Law) लागू किया था, जिसके तहत समय सीमा समाप्त होने से पहले भुगतान न होने पर उनकी जमींदारी नीलाम कर दी जाती थी। 2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बॉम्बे प्रेसीडेंसी में लागू की गई रयतवारी व्यवस्था में भूमि का स्वामित्व सीधे किसानों (रयत) को सौंपा गया था, तथा सरकार और किसानों के बीच सीधा अनुबंध होता था, जिसमें लगान की दरें पूर्णतः स्थाई थीं और अकाल या सूखे जैसी गंभीर प्राकृतिक आपदाओं में भी सरकार द्वारा लगान में कभी कोई छूट नहीं दी जाती थी। 3. हॉल्ट मैकेंज़ी और विलियम बेंटिंक द्वारा उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में विकसित महालवारी व्यवस्था के अंतर्गत भू-राजस्व का निर्धारण व्यक्तिगत किसान के स्तर पर न करके संपूर्ण ग्राम या ग्राम समुदाय (महाल) के स्तर पर किया जाता था, और इसके भुगतान के लिए पूरा गाँव सामूहिक रूप से उत्तरदायी था। 4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों के दीर्घकालिक प्रभाव के परिणामस्वरूप भारतीय कृषि का तेजी से वाणिज्यीकरण हुआ और पारंपरिक निर्वाह कृषि की जगह नकदी फसलों (जैसे अफीम, कपास, नील और जूट) के उत्पादन को अभूतपूर्व बढ़ावा मिला, जिससे किसानों की स्थिति समृद्ध हो गई और वे महाजनों के ऋणजाल से पूरी तरह मुक्त हो गए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनकी संस्थागत व्यवस्थाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बौद्ध धर्म के 'प्रतीत्यसमुत्पाद' (Dependent Origination) का सिद्धांत यह प्रतिपादित करता है कि प्रत्येक घटना और वस्तु किसी न किसी कारण से उत्पन्न होती है और यह शाश्वत ब्रह्म या आत्मा के अस्तित्व को स्वीकार किए बिना संसार के संचालन की व्याख्या करता है, जबकि जैन धर्म का 'स्यादवाद' (सप्तभंगी नय) ज्ञान की सापेक्षता का सिद्धांत है जो यह बताता है कि प्रत्येक सत्य दृष्टिकोण विशेष के अनुसार आंशिक होता है। 2. बौद्ध संघ में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु सीमा пятнадцать (15) वर्ष निर्धारित की गई थी, और संघ में किसी भी प्रकार के ऋणग्रस्त, चोर, दास, या राजकर्मचारी को प्रवेश की पूर्ण अनुमति थी ताकि सामाजिक समानता स्थापित की जा सके। 3. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के अनुसार स्त्रियाँ मोक्ष प्राप्त करने में सक्षम हैं और उनके 19वें तीर्थंकर 'मल्लिनाथ' एक स्त्री थीं, जबकि दिगंबर संप्रदाय इस मान्यता का पूर्ण खंडन करता है और यह मानता है कि मोक्ष प्राप्ति के लिए नग्नता अनिवार्य है और स्त्री शरीर से मुक्ति संभव नहीं है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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