BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
6 views

ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों — स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी — के आर्थिक, प्रशासनिक और वैधानिक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. स्थाई बंदोबस्त (Permanent Settlement) के अंतर्गत लॉर्ड कार्नवालिस ने बंगाल, बिहार और उड़ीसा में भू-राजस्व की मांग को जमींदारों के लिए हमेशा के लिए निश्चित कर दिया था, किंतु जमींदारों द्वारा समय पर लगान अदायगी सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 'सूर्यास्त कानून' (Sunset Law) लागू किया था, जिसके तहत समय सीमा समाप्त होने से पहले भुगतान न होने पर उनकी जमींदारी नीलाम कर दी जाती थी।
  2. 2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बॉम्बे प्रेसीडेंसी में लागू की गई रयतवारी व्यवस्था में भूमि का स्वामित्व सीधे किसानों (रयत) को सौंपा गया था, तथा सरकार और किसानों के बीच सीधा अनुबंध होता था, जिसमें लगान की दरें पूर्णतः स्थाई थीं और अकाल या सूखे जैसी गंभीर प्राकृतिक आपदाओं में भी सरकार द्वारा लगान में कभी कोई छूट नहीं दी जाती थी।
  3. 3. हॉल्ट मैकेंज़ी और विलियम बेंटिंक द्वारा उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में विकसित महालवारी व्यवस्था के अंतर्गत भू-राजस्व का निर्धारण व्यक्तिगत किसान के स्तर पर न करके संपूर्ण ग्राम या ग्राम समुदाय (महाल) के स्तर पर किया जाता था, और इसके भुगतान के लिए पूरा गाँव सामूहिक रूप से उत्तरदायी था।
  4. 4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों के दीर्घकालिक प्रभाव के परिणामस्वरूप भारतीय कृषि का तेजी से वाणिज्यीकरण हुआ और पारंपरिक निर्वाह कृषि की जगह नकदी फसलों (जैसे अफीम, कपास, नील और जूट) के उत्पादन को अभूतपूर्व बढ़ावा मिला, जिससे किसानों की स्थिति समृद्ध हो गई और वे महाजनों के ऋणजाल से पूरी तरह मुक्त हो गए।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि लॉर्ड कार्नवालिस द्वारा 1793 में बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू किए गए स्थाई बंदोबस्त (Permanent Settlement) में जमींदारों को भूमि का स्वामी बनाया गया और 'सूर्यास्त कानून' के तहत एक निश्चित तिथि को सूर्यास्त तक लगान जमा न करने पर उनकी जमींदारी नीलाम कर दी जाती थी। कथन 2 आंशिक रूप से गलत है क्योंकि रयतवारी व्यवस्था में लगान की दरें स्थाई नहीं थीं, बल्कि सरकार हर 20 से 30 वर्ष बाद इसमें संशोधन करती थी (यद्यपि प्राकृतिक आपदाओं में कुछ राहत के प्रावधान सैद्धांतिक रूप से थे)। कथन 3 सही है क्योंकि महालवारी व्यवस्था में संपूर्ण ग्राम (महाल) को राजस्व इकाई माना गया था और गाँव के सभी किसान सामूहिक रूप से इसके लिए उत्तरदायी थे। कथन 4 गलत है क्योंकि ब्रिटिश नीतियों के कारण कृषि का वाणिज्यीकरण अवश्य हुआ, किंतु इससे भारतीय किसान समृद्ध होने के बजाय अत्यधिक गरीबी, औपनिवेशिक शोषण और महाजनों के ऋणजाल में पूरी तरह जकड़ गए थे। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
Share:

Related Questions

बहमनी सुल्तानों ने अपने प्रशासन में किस भाषा को राजभाषा (Official Language) बनाया था? लोदी काल को वास्तुकला में किस नाम से जाना जाता है? हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) और गदर पार्टी के वैचारिक और संगठनात्मक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सितंबर 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) का पुनर्गठन करके 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) की स्थापना की गई थी, जिसमें भगवती चरण बोहरा द्वारा लिखित घोषणापत्र 'द फिलॉसफी ऑफ द बॉम्ब' को आधिकारिक मार्गदर्शक दस्तावेज बनाया गया था। 2. ग़दर पार्टी के संस्थापकों में लाला हरदयाल और सोहन सिंह भकना की मुख्य भूमिका थी, और इस पार्टी का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह करना था, जिसके लिए इसने सैन फ्रांसिस्को से 'ग़दर' साप्ताहिक समाचार पत्र का प्रकाशन किया था जो मुख्य रूप से गुरुमुखी और उर्दू में छपता था। 3. भगत सिंह और उनके साथियों द्वारा दिसंबर 1928 में लाहौर में ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सॉंडर्स की हत्या का उद्देश्य साइमन कमीशन विरोधी प्रदर्शन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज से घायल हुए लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेना था। 4. ग़दर पार्टी के प्रमुख नेता बाबा सोहन सिंह भकना को प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश विरोधी षड्यंत्र में संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और उन्हें लाहौर षड्यंत्र मामले के तहत आजीवन काला पानी (अंडमान) की सजा दी गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और इसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस विद्रोह का नेतृत्व करने वाले पारंपरिक भारतीय शासक (जैसे नाना साहब, बेगम हजरत महल और कुंवर सिंह) और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर अपने-अपने सीमित भौगोलिक क्षेत्रों और वैयक्तिक हितों से ऊपर उठकर एक सुसंगत अखिल भारतीय राजनीतिक दृष्टि का निर्माण करने में पूर्णतः असमर्थ रहे। 2. विद्रोहियों के पास न तो आधुनिक संचार साधनों और सैन्य प्रौद्योगिकी का अभाव था, बल्कि उनके पास एक केंद्रीय उच्च कमान (Central High Command) और एकीकृत सैन्य रणनीति का भी पूर्ण अभाव था, जिससे विभिन्न छावनियों के सैनिक बिना किसी सामंजस्य के स्वतंत्र रूप से लड़ते रहे। 3. देश के अधिकांश बड़े जमींदार, साहूकार और आधुनिक शिक्षित मध्यम वर्ग ने इस विद्रोह का पुरजोर समर्थन किया क्योंकि वे ब्रिटिश शासन के आर्थिक शोषण से त्रस्त थे और एक नई राष्ट्रीय व्यवस्था चाहते थे। 4. सिख रेजिमटों, गोरखा सैनिकों और सिंधिया तथा हैदराबाद जैसी कई देशी रियासतों के शासकों ने ब्रिटिश सेना का सक्रिय रूप से साथ दिया, जिसके कारण अंग्रेजों को इस व्यापक बगावत को कुचलने में भारी सैन्य बल और राजनीतिक संबल प्राप्त हुआ। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक संरचना, प्रांतीय विभाजन तथा 'तीर्थ' नामक उच्च अधिकारियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मौर्य काल में संपूर्ण साम्राज्य प्रशासनिक सुविधा के लिए कई प्रांतों (चक्रों) में विभाजित था, जिनके प्रमुख राजकुमार या आर्यपुत्र होते थे, तथा प्रांतीय प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए 'अक्षपादक' नामक अधिकारी मुख्य लेखाकार और नियंत्रक के रूप में कार्य करता था। 2. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार केंद्रीय प्रशासन में अट्ठारह सबसे महत्वपूर्ण उच्च अधिकारियों या मंत्रियों को 'तीर्थ' कहा जाता था, जिनमें 'समहर्त्ता' राजस्व संग्रह और आय-व्यय का लेखा-जोखा रखने वाला सर्वोच्च अधिकारी था, जबकि 'संनिधातृ' राजकीय कोषागार (कोश) और भण्डारगृह (गारत) का अध्यक्ष होता था। 3. सम्राट अशोक के शिलालेखों में कलिंग युद्ध के उपरांत प्रशासनिक नीतियों में आए बदलाव का स्पष्ट उल्लेख मिलता है, जिसके तहत महामात्रों (विशेष अधिकारियों) को नगरों और प्रांतों में शांति व्यवस्था बनाए रखने तथा प्रजा के नैतिक उत्थान के लिए नियुक्त किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.