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History of India
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मध्यकालीन भारत के भक्ति और सूफी आंदोलनों के वैचारिक विकास, संतों के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनके ऐतिहासिक प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. रामानंद ने उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई, और उनके शिष्यों में कबीर, रैदास (संत रविदास), पीपा और धन्ना जैसे विभिन्न जातियों व पृष्ठभूमियों के संत शामिल थे, जिन्होंने जातिगत भेदभाव को कड़ी चुनौती दी।
  2. 2. सूफी सिलसिले के अंतर्गत 'सुहरावर्दी सिलसिला' ने कठोर आत्म-अनुशासन, सादगी और फकीरी जीवन पर अत्यधिक बल दिया, तथा उनके संतों ने चिश्ती संतों के ठीक विपरीत कभी भी शाही अनुदान, जागीरें या राजकीय पदों को स्वीकार नहीं किया।
  3. 3. मीराबाई ने राजसी सुखों का परित्याग कर भगवान कृष्ण की उपासना 'माधुर्य भाव' (प्रेमाभक्ति) से की, और उनके पद मुख्य रूप से राजस्थानी, ब्रज और गुजराती भाषा में रचे गए हैं, जिन्हें राजस्थान और गुजरात के लोक-मानस में अत्यधिक प्रतिष्ठा प्राप्त हुई।
  4. 4. सूफी संतों में 'चिश्ती सिलसिला' के प्रसिद्ध संत शेख निजामुद्दीन औलिया ने सल्तनत काल के दौरान अनेक सुल्तानों के आमंत्रण को सहर्ष स्वीकार किया और शाही दरबार में उच्च पद ग्रहण कर राजनीतिक मामलों में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप किया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: रामानंद ने उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन के प्रसार में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके बारह प्रमुख शिष्य (जिन्हें रामानंद की द्वादश शिष्यों की परंपरा कहा जाता है) समाज के विभिन्न वर्गों और जातियों से आते थे, जिनमें कबीर (जुलाहा), रैदास (चमार), सेना (नाई), और धन्ना (जाट) शामिल थे, जिन्होंने रूढ़िवादिता और जाति भेद का विरोध किया। कथन 2 गलत है: सुहरावर्दी सिलसिले के संतों ने चिश्ती सिलसिले के विपरीत राज्य के साथ घनिष्ठ संबंध रखे और राजकीय अनुदान, जागीरें तथा उच्च पदों को स्वीकार किया था; जबकि सादगी और फकीरी जीवन पर सबसे अधिक जोर चिश्ती संतों ने दिया था। कथन 3 सही है: मीराबाई ने मेड़ता के शाही परिवार से होने के बावजूद राजसी सुखों का त्याग किया और कृष्ण भक्ति को अपनाया, उनके पद मारवाड़ी, राजस्थानी और ब्रज भाषा में लोक-संस्कृति का अभिन्न अंग बन गए। कथन 4 गलत है: शेख निजामुद्दीन औलिया ने राजनीतिक सत्ता और शाही दरबार से हमेशा दूरी बनाए रखी थी, और उन्होंने प्रसिद्ध रूप से कहा था कि 'मेरे मकान में दो दरवाजे हैं, यदि सुल्तान एक दरवाजे से अंदर आएगा, तो मैं दूसरे दरवाजे से बाहर चला जाऊंगा'। विकिपीडिया संदर्भ
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