संज्ञानात्मक विकास
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जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास और खोजपूर्ण अधिगम सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development and Discovery Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'स्पिरल करिकुलम या चक्राकार पाठ्यक्रम' (Spiral Curriculum)**—जिसे उस शैक्षणिक और पाठ्यक्रम डिजाइन उपागम के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत किसी भी कठिन या जटिल विषय-वस्तु को बालक के प्रारंभिक विकास स्तर पर बहुत सरल, सहज और मूर्त रूप (प्रतीकात्मक या क्रियात्मक रूप में) में प्रस्तुत किया जाता है और जैसे-जैसे बालक की आयु, परिपक्वता और संज्ञानात्मक स्तर बढ़ता जाता है, उसी विषय-वस्तु को बार-बार अधिक गहराई, व्यापकता, अमूर्तता और उच्च तार्किक जटिलता के साथ पुनरावृत्त (Revisited) किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संचयी ज्ञान निर्माण, अमूर्त चिंतन और अवधारणात्मक स्थिरता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के संज्ञानात्मक विकास और खोजपूर्ण अधिगम सिद्धांत के अनुसार, 'स्पिरल करिकुलम' (चक्राकार पाठ्यक्रम) का केंद्रीय विचार यह है कि 'किसी भी विषय को किसी भी विकासात्मक अवस्था में किसी भी बच्चे को बौद्धिक रूप से सत्य तरीके से प्रभावी ढंग से सिखाया जा सकता है।' ब्रूनर का प्रसिद्ध कथन है कि कोई भी संकल्पना प्राथमिक स्तर पर सरल और सहज रूप में पढ़ाई जा सकती है और उच्च कक्षाओं में उसी संकल्पना को अधिक परिष्कृत, तार्किक और अमूर्त रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। यह उपागम विद्यार्थियों के पूर्व-ज्ञान को नए ज्ञान के साथ जोड़ते हुए संचयी (Cumulative) और दीर्घकालिक अधिगम को बढ़ावा देता है।
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लेव वाइगोत्स्की के 'सामाजिक-सांस्कृतिक विकास के सिद्धांत' (Socio-Cultural Theory) के अंतर्गत 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD), 'स्केफोल्डिंग' (Scaffolding) और 'संज्ञानात्मक विकास में भाषा की भूमिका' (Role of Language in Cognitive Development) के तात्विक और शैक्षणिक निहितार्थों का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, वाइगोत्स्की के अनुसार बालक के संज्ञानात्मक विकास और सामाजिक अंतःक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है?
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अधिगम की अवस्थाओं (Stages of Learning) के प्रतिपादक कौन हैं?
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रॉबर्ट गैग्ने (Robert Gagne) के 'अ अधिगम के सोपानिकी सिद्धांत' (Conditions of Learning / Hierarchy of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'समस्या समाधान अधिगम या प्रॉब्लम सॉल्विंग लर्निंग' (Problem Solving Learning)**—जिसे गैग्ने की सोपानिकी के सर्वोच्च (आठवें) स्तर के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति अपने पहले से सीखे गए विभिन्न नियमों, सिद्धांतों और संप्रत्ययों (Concepts) का उपयोग करते हुए किसी नई, जटिल और अपरिचित परिस्थिति से निपटने के लिए एक नया मानसिक सूत्र या समाधान खोज निकालता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक कौशल, तार्किक संश्लेषण और सृजनात्मक चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार अभिविन्यास या सोशल कॉन्ट्रैक्ट एंड इंडिविजुअल राइट्स ओरिएंटेशन' (Stage 5 - Social Contract and Individual Rights)**—जिसे उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता (Post-conventional Morality) के अंतर्गत उस उन्नत नैतिक अवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति यह मानता है कि नियम और कानून समाज के आपसी समझौते या अनुबंध (Mutual Agreement) का परिणाम हैं, इसलिए यदि कोई कानून या सामाजिक व्यवस्था व्यक्तिगत अधिकारों, स्वतंत्रता और मानवीय कल्याण की रक्षा करने में असफल रहती है, तो उसमें लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से संशोधन किया जा सकता है या उसे बदला जा सकता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक मूल्यों, आलोचनात्मक चिंतन (Critical Thinking) और नैतिक न्याय के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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