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Child Development
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अधिगम मनोविज्ञान के अंतर्गत एडवर्ड थार्नडाइक द्वारा प्रतिपादित 'मुख्य नियमों' (Primary Laws of Learning) — तत्परता का नियम (Law of Readiness), अभ्यास का नियम (Law of Exercise), और प्रभाव का नियम (Law of Effect) — का सूक्ष्म विश्लेषणात्मक अध्ययन करने पर, यदि कोई शिक्षक कक्षा में छात्र द्वारा सही उत्तर देने पर तुरंत उसकी प्रशंसा करता है और उसे पुरस्कृत करता है, जिससे छात्र भविष्य में उस अनुक्रिया को बार-बार दोहराने के लिए प्रेरित होता है, तो थार्नडाइक का कौन-सा नियम इस परिस्थिति में सर्वाधिक रूप से सक्रिय है और इसका मुख्य मनोवैज्ञानिक आधार क्या है?

Detailed Explanation

थार्नडाइक के 'प्रभाव के नियम' (Law of Effect) के अनुसार, जिन कार्यों को करने से प्राणी को सुखद या संतोषजनक परिणाम मिलते हैं, उन कार्यों या अनुक्रियाओं को वह बार-बार दोहराता है; इसके विपरीत जिन कार्यों से असंतोष या दंड मिलता है, उन्हें वह छोड़ देता है। यह सिद्धांत आगे चलकर बी.एफ. स्किनर के क्रियाप्रसूत अनुबंधन (Operant Conditioning) और पुनर्बलन (Reinforcement) के सिद्धांत का आधार बना। इस विषय में अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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→ कार्ल जुंग (Carl Jung) द्वारा प्रतिपादित विश्लेषणात्मक मनोविज्ञान (Analytical Psychology) के अंतर्गत व्यक्तित्व के मनोवैज्ञानिक प्रकारों (Psychological Types) का वर्गीकरण अंतर्मुखता (Introversion) और बहिर्मुखता (Extraversion) के आधार पर किया गया है। इसके अतिरिक्त, जुंग ने चार मूलभूत मनोवैज्ञानिक कार्यों — चिंतन (Thinking), अनुभूति (Feeling), संवेदन (Sensing), और अंतःप्रेरणा (Intuition) — को भी इसमें सम्मिलित किया है। यदि कोई व्यक्ति किसी दार्शनिक या वैज्ञानिक समस्या के समाधान के लिए पूरी तरह से अपने आंतरिक विचारों, तर्कों, अमूर्त सिद्धांतों और आत्म-विश्लेषण पर निर्भर रहता है तथा बाहरी दुनिया की सामाजिक स्वीकृति की न्यूनतम परवाह करता है, तो जुंग के वर्गीकरण के अनुसार उसका व्यक्तित्व किस विशिष्ट प्रकार के अंतर्गत आएगा? → लेव वाइगोत्स्की के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत में 'समीपस्थ विकास के क्षेत्र' (ZPD) की अवधारणा का गहन विश्लेषण करते हुए, यदि कोई शिक्षक अपने छात्र को किसी जटिल गणितीय समस्या को हल करते समय शुरुआत में चरण-दर-चरण मार्गदर्शन (Scaffolding) प्रदान करता है और धीरे-धीरे उस सहायता को तब वापस ले लेता है जब छात्र उस समस्या को स्वतंत्र रूप से हल करने में सक्षम हो जाता है, तो वाइगोत्स्की के इस सिद्धांत के अनुसार यह पूरी शैक्षणिक प्रक्रिया बालक के संज्ञानात्मक विकास और आंतरिक भाषण (Inner Speech) के संदर्भ में किस मनोवैज्ञानिक वास्तविकता को सर्वाधिक सटीक रूप से दर्शाती है? → राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) और निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009) के प्रावधानों का समन्वित विश्लेषणात्मक अध्ययन करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन NCF 2005 के मार्गदर्शक सिद्धांतों तथा RTE Act 2009 की धाराओं के बीच के उस दार्शनिक और विधिक अंतर्संबंध को सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से स्पष्ट करता है जो बाल-केन्द्रित शिक्षा और समावेशी कक्षा के निर्माण पर बल देता है? → समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में 'सार्वभौमिक रूप से डिज़ाइन किया गया शिक्षण' (Universal Design for Learning - UDL) के तीन प्रमुख सिद्धांतों — प्रतिनिधित्व के बहुવિધ साधन (Multiple Means of Representation), अभिव्यक्ति के बहुવિધ साधन (Multiple Means of Expression), और संलग्नता के बहुવિધ साधन (Multiple Means of Engagement) — का सूक्ष्म विश्लेषणात्मक अध्ययन करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प UDL के 'अभिव्यक्ति के बहुવિધ साधन' (Multiple Means of Expression) सिद्धांत की वास्तविक कक्षा-कक्षीय क्रियान्वयन और उसकी मूल शैक्षणिक विशेषता को सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से स्पष्ट करता है? → निम्नलिखित में से कौन सा कथन विकास के 'समीप - दूराभिमुख' सिद्धांत का प्रतिनिधित्व करता है? → लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत की आलोचना करते हुए कैरोल गिलिगन ने यह तर्क दिया कि कोहलबर्ग के मूल अध्ययन में केवल पुरुषों को शामिल किए जाने के कारण उनका सिद्धांत 'न्याय के दृष्टिकोण' (Justice Perspective) पर अत्यधिक बल देता है, जबकि महिलाओं का नैतिक विकास 'देखभाल और संबंधों के दृष्टिकोण' (Care and Perspective) पर आधारित होता है। इस वैचारिक भिन्नता और कोहलबर्ग के सिद्धांत के अंतिम स्तर (सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास) तथा गिलिगन के देखभाल के नैतिकता के चरणों के बीच के अंतर्संबंध का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
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