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Child Development
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थार्नडाइक के 'अधिगम के मुख्य नियमों' (तत्परता का नियम, अभ्यास का नियम, और प्रभाव का नियम) तथा पावलव के 'शास्त्रीय अनुबंधन' एवं स्किनर के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन' के सिद्धांतों का तुलनात्मक और तात्विक अध्ययन करने पर, यदि कोई शिक्षक कक्षा में सकारात्मक पुनर्बलन (Positive Reinforcement) और संतोषजनक परिणामों का उपयोग करके विद्यार्थियों में विशिष्ट वांछित व्यवहार को दृढ़ करने का प्रयास करता है, तो यह शैक्षणिक पद्धति थार्नडाइक के किस मूल नियम और स्किनर की किस अवधारणा के साथ सबसे अधिक गहराई से जुड़ी हुई है?

Detailed Explanation

थार्नडाइक के 'प्रभाव के नियम' (Law of Effect) के अनुसार, जिन कार्यों से संतोषजनक या सुखद परिणाम मिलते हैं, वे व्यवहार अधिक मजबूत होते हैं और दोहराए जाते हैं। यही अवधारणा बी.एफ. स्किनर के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन' (Operant Conditioning) में 'सकारात्मक पुनर्बलन' (Positive Reinforcement) का आधार बनती है, जहाँ किसी अनुक्रिया के तुरंत बाद अनुकूल उद्दीपक या पुरस्कार मिलने से उस अनुक्रिया की आवृत्ति बढ़ जाती है। विकिपीडिया संदर्भ
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