त्वरित लिंक्स
MPTET
3 views
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'संरक्षण या कंजर्वेशन' (Conservation)**—जिसे उस मानसिक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बालक यह समझने लगता है कि किसी वस्तु के रूप, आकार या दिखावट में परिवर्तन होने पर भी उसकी मात्रा, द्रव्यमान, आयतन या संख्या अपरिवर्तित रहती है (उदाहरण के लिए, एक लंबे और पतले गिलास से पानी को चौड़े बर्तन में डालने पर पानी की मात्रा समान रहना)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक चिंतन, विकेंद्रीकरण (Decentration) और मूर्त संक्रियात्मक क्षमताओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत के अनुसार, 'संरक्षण' (Conservation) की अवधारणा मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (लगभग 7 से 11 वर्ष) की एक प्रमुख विशेषता है। इस अवस्था में बालक विकेंद्रीकरण (Decentration) और प्रतिवर्तीता (Reversibility) के गुणों को सीखता है, जिससे वह यह समझ पाता है कि किसी वस्तु के रंग-रूप या आकार में बदलाव होने पर भी उसका द्रव्यमान, भार या आयतन स्थिर रहता है। विकल्प (b) इस मनोवैज्ञानिक सिद्धांत का सबसे प्रामाणिक और वैज्ञानिक विवरण प्रस्तुत करता है।
Related Questions
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास और खोजपूर्ण अधिगम सिद्धांत' (Discovery Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'प्रतीकात्मक अवस्था' (Symbolic Stage) की अवधारणा—जिसके तहत बच्चा वस्तुओं या अनुभवों को मानसिक रूप से प्रस्तुत करने के लिए अमूर्त प्रतीकों, भाषा, गणितीय चिह्नों और कोड का उपयोग करना सीख जाता है, जो ब्रूनर की त्रि-स्तरीय विकासात्मक प्रणाली (क्रियात्मक, प्रतिबिम्बात्मक और प्रतीकात्मक) का अंतिम और सबसे उच्च तथा अमूर्त चरण है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अमूर्त चिंतन, तार्किक अभिव्यक्ति और सैद्धांतिक संकल्पनाओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, सिग्मंड फ्रायड (Sigmund Freud) के 'मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत' (Psychoanalytic Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'रक्षा तंत्र या अहम् रक्षा युक्तियाँ' (Defense Mechanisms)**—जिसे उस अचेतन मानसिक प्रक्रिया या मनोवैज्ञानिक युक्ति के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से 'अहम्' (Ego) 'इदम' (Id) की मूल प्रवृत्तियों और 'परअहम्' (Superego) के कठोर नैतिक दबावों या अत्यधिक चिंता (Anxiety), तनाव और संघर्ष से उत्पन्न होने वाली मानसिक पीड़ा से स्वयं की रक्षा करने के लिए वास्तविकता को अचेतन रूप से विकृत कर देता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक समायोजन और तनाव प्रबंधन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, डेविड कोल्ब (David Kolb) के 'अनुभवात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'मूर्त अनुभव से अमूर्त conceptualization तक की प्रक्रिया' (Concrete Experience to Abstract Conceptualization)**—जिसे उस गतिशील संज्ञानात्मक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ शिक्षार्थी पहले किसी प्रत्यक्ष और व्यावहारिक परिस्थिति में प्रत्यक्ष रूप से अनुभव प्राप्त करता है (Concrete Experience), फिर उस अनुभव का गहन चिंतन और अवलोकन करता है (Reflective Observation), तत्पश्चात उस अनुभव से नए तार्किक सिद्धांतों, नियमों और अवधारणाओं का निर्माण करता है (Abstract Conceptualization), और अंत में उनका विभिन्न परिस्थितियों में परीक्षण करता है (Active Experimentation)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अनुभवात्मक समायोजन, वैचारिक संश्लेषण और व्यावहारिक बोध के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रॉबर्ट गैने (Robert Gagné) के 'अधिगम के अनुक्रमिक सिद्धांत' (Conditions of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'समस्या समाधान अधिगम' (Problem Solving Learning)**—जिसे उस सर्वोच्च संज्ञानात्मक और बौद्धिक स्तर के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षार्थी केवल पूर्व-अर्жиट नियमों या सिद्धांतों का स्मरण करके उन्हें लागू नहीं करता, बल्कि दो या दो से अधिक भिन्न नियमों या सिद्धांतों (Rules) को आपस में संयोजित करके एक नई अंतर्दृष्टि या एकीकृत नियम का सृजन करता है ताकि किसी अज्ञात, जटिल और अपरिचित बाधा या समस्या का सफलतापूर्वक निवारण किया जा सके—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक कौशल, विश्लेषणात्मक चिंतन और स्वतंत्र बौद्धिक क्षमताओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित तीन निरूपण पद्धतियों—(1) क्रियात्मक निरूपण (Enactive Representation), (2) दृश्य/प्रतिबिम्बात्मक निरूपण (Iconic Representation), और (3) सांकेतिक निरूपण (Symbolic Representation)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सर्पिल पाठ्यक्रम (Spiral Curriculum) के निर्माण, अमूर्त चिंतन के विकास, और खोजनात्मक अधिगम (Discovery Learning) के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.