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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'वस्तु स्थायित्व' (Object Permanence)**—जिसे उस मूलभूत संज्ञानात्मक उपलब्धि के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से शिशु यह समझने और मानसिक रूप से ग्रहण करने में सक्षम हो जाता है कि वस्तुएँ, व्यक्ति या घटनाएँ तब भी अस्तित्व में बनी रहती हैं जब वे उसकी प्रत्यक्ष दृष्टि, श्रवण या स्पर्श इंद्रियों के दायरे से ओझल हो जाती हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में शुरुआती बाल्यावस्था (Early Childhood) के दौरान विद्यार्थियों के अमूर्त प्रतिनिधित्व, स्मृति विकास और विकासात्मक अन्वेषण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'वस्तु स्थायित्व' (Object Permanence) संवेदी-गामक अवस्था (जन्म से 2 वर्ष) की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि है। जब बच्चा यह समझ जाता है कि चीजें नजरों से ओझल होने पर भी नष्ट नहीं होतीं, तो इसका अर्थ है कि उसने बाहरी वस्तुओं का आंतरिक मानसिक प्रतिनिधित्व (Mental Representation) करना सीख लिया है। यह क्षमता बच्चे के भीतर स्कीमा के संगठन, प्रतीकात्मक सोच और स्मृति के विकास का मार्ग प्रशस्त करती है, जो आगे चलकर प्रारंभिक बाल्यावस्था के अधिगम और भाषा विकास में आधारशिला का कार्य करती है। अतः विकल्प (c) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य मनोवैज्ञानिक कथन है।
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