BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
9 views

हुमायूँ का मकबरा कहाँ है?

Detailed Explanation

हुमायूँ का मकबरा दिल्ली में है।
Share:

Related Questions

वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में विद्रोह का दमन करने वाले ब्रिटिश अधिकारियों और उनके संबंधित कार्यक्षेत्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. मेजर जनरल हैवलॉक और जेम्स आउट्राम - लखनऊ में ब्रिटिश रेजिडेंसी की रक्षा और विद्रोहियों के दमन से जुड़े थे। 2. सर कॉलिन कैंपबेल - इन्होंने मुख्य रूप से कानपुर और लखनऊ में विद्रोह का अंत किया तथा अंततः रोहिलाखंड क्षेत्र को पुनः अपने नियंत्रण में लिया। 3. जनरल ह्यूरोज़ - इन्होंने केंद्रीय भारत और बुंदेलखंड क्षेत्र में अभियान चलाते हुए झाँसी और ग्वालियर में विद्रोह को पूरी तरह कुचला। 4. कर्नल नील - इन्होंने बनारस और इलाहाबाद में विद्रोहियों के विरुद्ध अत्यधिक क्रूरतापूर्ण कार्रवाई की और शांति स्थापित की। उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं? सविनय अवज्ञा आंदोलन के द्वितीय चरण और गांधी-इरविन समझौते (1931) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गांधी-इरविन समझौते के तहत ब्रिटिश सरकार ने यह स्वीकार किया कि हिंसा के आरोपियों को छोड़कर सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी राजनीतिक कैदियों को तुरंत रिहा कर दिया जाएगा और जब्त की गई संपत्ति वापस कर दी जाएगी। 2. इस समझौते के प्रावधानों के अंतर्गत कांग्रेस की ओर से महात्मा गांधी ने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने पर सहमति व्यक्त की, किंतु समझौते में पुलिस की ज्यादतियों और दमनकारी नीतियों की स्वतंत्र न्यायिक जांच की कांग्रेस की मांग को ब्रिटिश सरकार द्वारा पूरी तरह अस्वीकार कर दिया गया था। 3. कराची में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वर्ष 1931 के विशेष अधिवेशन, जिसकी अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी, में गांधी-इरविन समझौते का औपचारिक अनुमोदन कर दिया गया था, यद्यपि भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की फांसी को टाले जाने में विफलता के कारण युवा वर्ग द्वारा गांधीजी का तीव्र विरोध किया गया था। 4. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया, जहाँ उन्होंने 'सांप्रदायिक पंचाट' (Communal Award) के मुद्दे पर दलितों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की मांग का पुरजोर समर्थन किया था, क्योंकि उनका मानना था कि इससे दलितों का राजनीतिक उत्थान शीघ्र होगा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और उसके विरोध में उपजे स्वदेशी आंदोलन के वैचारिक, आर्थिक एवं राजनीतिक आयामों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल विभाजन के निर्णय की आधिकारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को लॉर्ड कर्जन द्वारा की गई थी, जिसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में ऐतिहासिक बैठक आयोजित कर 'स्वदेशी आंदोलन' की औपचारिक शुरुआत की गई और 'बायकॉट' (बहिष्कार) प्रस्ताव पास किया गया। 2. स्वदेशी आंदोलन के दौरान बंगाल के राष्ट्रीय आंदोलन में आत्मशक्ति (आत्मकेंद्रित आत्मनिर्भरता) के विचार को बढ़ावा दिया गया, जिसके तहत तंजौर के राष्ट्रीय कॉलेज, बंगाल नेशनल कॉलेज और विभिन्न राष्ट्रीय विद्यालयों की स्थापना की गई तथा शिक्षा के राष्ट्रीयकरण पर जोर दिया गया। 3. स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन के वैचारिक दायरे में केवल विदेशी वस्त्रों और वस्तुओं का बहिष्कार ही शामिल नहीं था, बल्कि इसके साथ ही सरकारी स्कूलों, अदालतों, उपाधियों और सरकारी नौकरियों का पूर्ण बहिष्कार करने का भी प्रस्ताव था, जिस पर नरम दल और गरम दल के नेताओं के बीच कभी कोई मतभेद उत्पन्न नहीं हुआ। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? चंपारण सत्याग्रह (1917) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चंपारण में यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों को अपनी भूमि के एक निश्चित हिस्से पर नील की खेती करने के लिए बाध्य करने वाली कुख्यात 'तिनकाठिया' पद्धति प्रचलित थी। 2. महात्मा गांधी के अनुरोध पर राजकुमार शुक्ल ने उन्हें चंपारण आने के लिए आमंत्रित किया था, जहाँ गांधीजी के साथ राजेंद्र प्रसाद, ब्रजकिशोर प्रसाद और महादेव देसाई जैसे नेता भी जुड़े थे। 3. सरकार द्वारा गठित 'चंपारण कृषि जाँच समिति' के दबाव में आकर अंततः तिनकाठिया प्रथा को समाप्त कर दिया गया और बागान मालिकों द्वारा किसानों से अवैध रूप से वसूले गए धन का 50 प्रतिशत हिस्सा वापस लौटाया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारण और बैरकपुर छावनी की घटना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जनवरी 1857 में बंगाल सेना में पुरानी ब्राउन बेस मस्कट के स्थान पर नई 'एनफील्ड राइफल' (Enfield rifle) को शामिल किया गया था, जिसके कारतूसों में गाय और सूअर की चर्बी होने की अफवाह ने भारतीय सिपाहियों में भारी असंतोष पैदा कर दिया था। 2. बैरकपुर छावनी की 34वीं नेटिव इन्फैंट्री (34th Native Infantry) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के खिलाफ कड़ा विरोध जताते हुए अपने अंग्रेज अधिकारियों सार्जेंट ह्यू बास्टर्ड और लेफ्टिनेंट बाथू पर हमला कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई थी। 3. मंगल पांडे की शहादत के तुरंत बाद बैरकपुर छावनी के सभी सैनिकों ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध एक साथ खुला विद्रोह कर दिया था और उसी दिन दिल्ली की ओर मार्च करना शुरू कर दिया था। 4. चर्बी वाले कारतूसों की घटना ने भारतीय सिपाहियों के मन में यह गहरी शंका उत्पन्न कर दी थी कि ब्रिटिश सरकार उनकी धार्मिक आस्था और जाति को नष्ट कर जबरन ईसाई बनाना चाहती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.