BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
11 views

सविनय अवज्ञा आंदोलन के द्वितीय चरण और गांधी-इरविन समझौते (1931) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. गांधी-इरविन समझौते के तहत ब्रिटिश सरकार ने यह स्वीकार किया कि हिंसा के आरोपियों को छोड़कर सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी राजनीतिक कैदियों को तुरंत रिहा कर दिया जाएगा और जब्त की गई संपत्ति वापस कर दी जाएगी।
  2. 2. इस समझौते के प्रावधानों के अंतर्गत कांग्रेस की ओर से महात्मा गांधी ने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने पर सहमति व्यक्त की, किंतु समझौते में पुलिस की ज्यादतियों और दमनकारी नीतियों की स्वतंत्र न्यायिक जांच की कांग्रेस की मांग को ब्रिटिश सरकार द्वारा पूरी तरह अस्वीकार कर दिया गया था।
  3. 3. कराची में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वर्ष 1931 के विशेष अधिवेशन, जिसकी अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी, में गांधी-इरविन समझौते का औपचारिक अनुमोदन कर दिया गया था, यद्यपि भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की फांसी को टाले जाने में विफलता के कारण युवा वर्ग द्वारा गांधीजी का तीव्र विरोध किया गया था।
  4. 4. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया, जहाँ उन्होंने 'सांप्रदायिक पंचाट' (Communal Award) के मुद्दे पर दलितों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की मांग का पुरजोर समर्थन किया था, क्योंकि उनका मानना था कि इससे दलितों का राजनीतिक उत्थान शीघ्र होगा।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 सही हैं। 5 मार्च 1931 को महात्मा गांधी और वायसराय लॉर्ड इरविन के मध्य हस्ताक्षरित गांधी-इरविन समझौता (जिसे दिल्ली समझौता भी कहा जाता है) के तहत हिंसा के आरोपियों को छोड़कर सभी राजनीतिक बंदियों की रिहाई और समुद्र तटीय क्षेत्रों में नमक बनाने की छूट दी गई थी। हालांकि, ब्रिटिश सरकार ने पुलिस की बर्बरता की न्यायिक जांच की मांग को खारिज कर दिया था। कराची अधिवेशन (1931) में इस समझौते की पुष्टि हुई। इसके विपरीत, कथन 4 असत्य है क्योंकि गांधीजी ने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में दलितों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल (Separate Electorates) की मांग का कड़ा विरोध किया था, क्योंकि उनका विचार था कि इससे हिंदू समाज में स्थायी फूट पड़ जाएगी।
Share:

Related Questions

मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, केंद्रीय अधिकारियों और प्रांतीय शासन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मौर्य प्रशासन में केंद्रीय सचिवालय का सर्वोच्च अधिकारी 'मंत्रिहन' कहलाता था, और राजा को प्रशासनिक परामर्श देने के लिए एक छोटी मंत्रिपरिषद होती थी जिसके सदस्यों की योग्यता की जाँच 'उपैधा' (धर्म, धन, काम और भय के परीक्षण) के माध्यम से की जाती थी। 2. अशोक के शासनकाल में प्रांतीय प्रशासन की इकाइयों को 'चक्र' कहा जाता था, जो कुमार या आर्यपुत्र (राजकीय राजकुमारों) के अधीन होते थे, जबकि सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई 'ग्राम' थी जिसका मुखिया 'ग्रामिक' कहलाता था, जो सरकारी अधिकारियों के नियंत्रण से पूरी तरह स्वतंत्र था। 3. अर्थशास्त्र के अनुसार, मौर्य काल में राज्य की ओर से व्यापार और वाणिज्य पर कड़ा नियंत्रण रखा जाता था, जिसके तहत माप-तौल के अधिकारी को 'पोतवाध्यक्ष' और शुल्क (कर) संग्रह करने वाले अधिकारी को 'शुल्क अध्यक्ष' कहा जाता था। 4. अशोक के शिलालेखों में न्याय व्यवस्था का विस्तृत उल्लेख मिलता है, जिसके तहत महामात्रों को स्थानीय न्यायिक अधिकारियों के रूप में नियुक्त किया गया था, और कौटिल्य ने न्यायलयों के दो प्रमुख प्रकार बताए हैं—'धर्मस्थीय' (दीवानी न्यायालय) और 'कंटकशोधन' (फौजदारी न्यायालय)। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मराठा साम्राज्य के प्रशासनिक ढांचे, राजस्व प्रणाली और शिवाजी के शासनकाल (स्वराज) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. शिवाजी के अष्टप्रधान में 'अमात्य' या 'मजूमदार' राज्य की आय-व्यय और संपूर्ण वित्त विभाग की देखरेख करने वाला प्रमुख अधिकारी होता था, जबकि 'सुमंत' या 'दबीर' विदेश मंत्री के रूप में विदेशी मामलों और राजा के दरबार की औपचारिक बैठकों का संचालन करता था। 2. शिवाजी ने अपने भू-राजस्व निर्धारण में मलिक अंबर की राजस्व व्यवस्था का अनुसरण करते हुए शुरुआत में कुल उपज का 33 प्रतिशत भाग कर के रूप में तय किया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया तथा 'कठी' (मापने की छड़ी) के माध्यम से भूमि की पैमाइश करवाई गई। 3. 'चौथ' और 'सरदेशमुखी' मराठा साम्राज्य के बाह्य प्रांतों से वसूले जाने वाले कर थे, जिनमें चौथ पड़ोसी मुगल या अन्य क्षेत्रों की सुरक्षा का आश्वासन देकर वसूला जाने वाला कुल राजस्व का एक-चौथाई भाग था, जबकि सरदेशमुखी मराठा वंश के वंशानुगत देशमुखी अधिकारों के दावे के रूप में कुल राजस्व का 10 प्रतिशत वसूला जाता था। 4. शिवाजी की सैन्य व्यवस्था में 'पगा' घुड़सवार सेना नियमित और राज्य द्वारा सीधे सुसज्जित एवं वेतन पाने वाली सबसे अनुशासित सेना थी, जबकि 'सिलहदार' वे घुड़सवार सैनिक होते थे जो अपने घोड़े और अस्त्र-शस्त्र स्वयं लेकर युद्ध में भाग लेते थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और बंगाल में ब्रिटिश सत्ता के सुदृढ़ीकरण के प्रारंभिक चरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मुगल सम्राट जहांगीर ने वर्ष 1615 में ब्रिटिश सम्राट जेम्स प्रथम के राजदूत के रूप में भारत आए सर थॉमस रो को सूरत में एक स्थायी कारखाना स्थापित करने की शाही अनुमति प्रदान की थी, और इसके साथ ही अंग्रेजों को संपूर्ण मुगल साम्राज्य में बिना किसी कर के आंतरिक व्यापार करने का विशेष अधिकार भी मिल गया था। 2. वर्ष 1698 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने सूतासुती, कलकत्ता और गोविंदपुर नामक तीन गाँवों की जमींदारियों को खरीदकर फोर्ट विलियम के किलेबंदी की नींव रखी, जिसका प्रथम प्रेसिडेंट चार्ल्स आयर को बनाया गया था। 3. बंगाल के नवाब मुर्शिद कुली खान ने अपनी राजधानी को ढाका से स्थानांतरित कर मुर्शिदाबाद बनाया और अंग्रेजों द्वारा व्यापारिक विशेषाधिकारों (दस्तक) के दुरुपयोग पर कड़ा नियंत्रण लगाने का प्रयास किया, जिससे कंपनी और नवाब के बीच निरंतर तनाव बना रहा। 4. वर्ष 1717 में मुगल सम्राट फारुकसियर द्वारा ब्रिटिश कंपनी को जारी किए गए ऐतिहासिक 'फरमान' के तहत कंपनी को बंगाल, हैदराबाद और अवध में बिना कर चुकाए व्यापार करने की असीमित छूट मिल गई, जिसे इतिहासकारों द्वारा 'मैग्नाकार्टा' कहा गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारण और बैरकपुर छावनी की घटना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जनवरी 1857 में बंगाल सेना में पुरानी ब्राउन बेस मस्कट बंदूक के स्थान पर नई 'एनफील्ड राइफल' (Enfield Rifle) को शामिल किया गया था, जिसके कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी होने की अफवाह ने भारतीय सैनिकों में भारी आक्रोश पैदा किया। 2. बैरकपुर छावनी (34वीं नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के आदेश का विरोध करते हुए अपने अंग्रेजी अधिकारियों पर आक्रमण कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई। 3. चर्बी वाले कारतूसों की घटना के बाद मेरठ छावनी के सैनिकों ने 10 मई 1857 को विद्रोह का बिगुल बजाया, जहाँ उन्होंने एनफील्ड राइफल्स के प्रयोग से पूर्णतः इंकार करते हुए यूरोपीय अधिकारियों को बंधक बना लिया और दिल्ली की ओर कूच किया। 4. मंगल पांडे द्वारा विद्रोह की शुरुआत करने के तुरंत बाद ब्रिटिश सरकार ने भारतीय सैनिकों के आक्रोश को शांत करने के लिए सेना से एनफील्ड राइफल्स को पूरी तरह वापस ले लिया था और पुरानी ब्राउन बेस बंदूकों को बहाल कर दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद (प्रयागराज) में विद्रोह के दमन और उससे जुड़े सैन्य अभियानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फैजाबाद में मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने विद्रोह का नेतृत्व किया था, जिन्हें बाद में ब्रिटिश सेनाओं से कड़े संघर्ष के बाद पराजित होना पड़ा और अंततः पुवायाँ के एक स्थानीय राजा के विश्वासघात के कारण उनकी हत्या कर दी गई थी। 2. बरेली में खान बहादुर खान ने रोहिलखंड क्षेत्र में विद्रोह की बागडोर संभाली थी, किंतु ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने अत्यंत आक्रामक सैन्य कार्रवाई कर इस विद्रोह को पूरी तरह कुचल दिया तथा खान बहादुर खान को मृत्युदंड दिया गया। 3. इलाहाबाद में लियाकत अली ने विद्रोह का सफलतापूर्वक संचालन किया था, लेकिन ब्रिटिश सैन्य अधिकारी जनरल नील ने अत्यधिक निर्ममता का परिचय देते हुए वहाँ के नागरिकों और विद्रोहियों का बड़े पैमाने पर दमन किया और विद्रोह को समाप्त कर दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.