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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग-III के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (अनुच्छेद 12-35) और उनसे संबंधित न्यायिक निर्णयों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' (Law) शब्द की व्यापक परिभाषा दी गई है, जिसके तहत संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए अधिनियमों के अतिरिक्त अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम और रूढ़ि या प्रथा (Custom or usage) को भी शामिल किया गया है, बशर्ते वे मूल अधिकारों से असंगत हों।
  2. 2. 'मैनका गांधी बनाम भारत संघ (1978)' मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह अभी निर्धारित किया था कि अनुच्छेद 21 के तहत 'प्रक्रिया जो विधि द्वारा स्थापित की गई है' (Procedure established by law) का दायरा अत्यंत सीमित है और इसमें प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (Principles of natural justice) को शामिल नहीं किया जा सकता।
  3. 3. अनुच्छेद 20(2) के अंतर्गत 'दोहरे जोखिम' (Double Jeopardy) का संरक्षण केवल किसी न्यायालय या न्यायिक अधिकरण (Tribunal) के समक्ष अभियोजित किए जाने और दंडित होने पर ही लागू होता है, और यह विभागीय या प्रशासनिक प्राधिकारियों (Departmental or administrative authorities) द्वारा दी जाने वाली कार्यवाहियों और शास्तियों पर भी पूरी तरह लागू होता है।
  4. 4. उच्चतम न्यायालय ने 'इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ (1992)' मामले में यह स्पष्ट किया था कि संविधान के अनुच्छेद 16(4) के तहत प्रदान किया जाने वाला आरक्षण केवल प्रारंभिक नियुक्तियों (Initial appointments) तक ही सीमित है, और इसे पदोन्नति (Promotions) के मामलों में किसी भी परिस्थिति में लागू नहीं किया जा सकता।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 13(3)(a) के अनुसार 'विधि' के अंतर्गत भारत में विधि का बल रखने वाला कोई अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम, उपनियम, अधिसूचना और रूढ़ि या प्रथा शामिल है। कथन 2 गलत है: 'मैनका गांधी बनाम भारत संघ (1978)' मामले में उच्चतम न्यायालय ने 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' के पारंपरिक और संकीर्ण अर्थ को पलट दिया और अमेरिकी संविधान की तरह 'विधि की उचित प्रक्रिया' (Due process of law) के समान अवधारणा को शामिल करते हुए यह व्यवस्था दी कि अनुच्छेद 21 के तहत प्रक्रिया निष्पक्ष, न्यायसंगत और तर्कसंगत होनी चाहिए, जिसमें प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत अनिवार्य रूप से निहित हैं। कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 20(2) के तहत 'दोहरे जोखिम' (किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार अभियोजित और दंडित नहीं किया जाएगा) का संरक्षण केवल न्यायिक न्यायालय या अधिकरण के समक्ष अभियोजन और दंड के मामले में उपलब्ध है। यह विभागीय, प्रशासनिक या संविधिक निकायों (जैसे विश्वविद्यालय के अधिकारियों या सेना न्यायालय से भिन्न विभागीय जाँच) द्वारा की जाने वाली शास्तियों पर लागू नहीं होता। कथन 4 गलत है: 'इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ (1992)' मामले में न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि आरक्षण केवल प्रारंभिक नियुक्तियों तक सीमित है, पदोन्नति में नहीं। किंतु संसद ने इसके प्रभाव को निष्प्रभावी करने के लिए 77वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1995 पारित किया और अनुच्छेद 16(4A) जोड़कर पदोन्नति में भी आरक्षण का मार्ग प्रशस्त कर दिया। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था का अध्ययन करें।
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