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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. प्रस्तावना में उल्लिखित 'न्याय' (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) के आदर्श को वर्ष 1917 की रूसी क्रांति से प्रेरित होकर शामिल किया गया था, जबकि 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व' के आदर्श फ्रांस की क्रांति से लिए गए हैं।
  2. 2. 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्दों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें वर्ष 1976 के 42वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से प्रस्तावना में जोड़ा गया था।
  3. 3. बेरूबारी यूनियन बाद (1960) में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें संसद द्वारा अनुच्छेद 368 के अधीन संशोधन किया जा सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि भारतीय संविधान की प्रस्तावना में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के आदर्श को 1917 की रूसी क्रांति से तथा स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्शों को 1789 की फ्रांसीसी क्रांति से लिया गया है। कथन 2 सही है क्योंकि 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा प्रस्तावना में 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए थे। कथन 3 गलत है क्योंकि बेरूबारी यूनियन बाद (1960) में उच्चतम न्यायालय ने यह कहा था कि प्रस्तावना संविधान का अंग **नहीं** है। बाद में केशवानंद भारती बाद (1973) में न्यायालय ने अपने पूर्ववर्ती निर्णय को बदलते हुए यह माना कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
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'मैनका गांधी बनाम भारत संघ (1978)' मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह अभी निर्धारित किया था कि अनुच्छेद 21 के तहत 'प्रक्रिया जो विधि द्वारा स्थापित की गई है' (Procedure established by law) का दायरा अत्यंत सीमित है और इसमें प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (Principles of natural justice) को शामिल नहीं किया जा सकता। 3. अनुच्छेद 20(2) के अंतर्गत 'दोहरे जोखिम' (Double Jeopardy) का संरक्षण केवल किसी न्यायालय या न्यायिक अधिकरण (Tribunal) के समक्ष अभियोजित किए जाने और दंडित होने पर ही लागू होता है, और यह विभागीय या प्रशासनिक प्राधिकारियों (Departmental or administrative authorities) द्वारा दी जाने वाली कार्यवाहियों और शास्तियों पर भी पूरी तरह लागू होता है। 4. उच्चतम न्यायालय ने 'इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ (1992)' मामले में यह स्पष्ट किया था कि संविधान के अनुच्छेद 16(4) के तहत प्रदान किया जाने वाला आरक्षण केवल प्रारंभिक नियुक्तियों (Initial appointments) तक ही सीमित है, और इसे पदोन्नति (Promotions) के मामलों में किसी भी परिस्थिति में लागू नहीं किया जा सकता। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? 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