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History of India
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अकबर ने दहशाला प्रणाली कब शुरू की थी?

Detailed Explanation

टोडरमल द्वारा 1580 में यह प्रणाली शुरू हुई।
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में, पल्लव राजवंश और चालुक्य राजवंश के प्रशासनिक, सांस्कृतिक एवं सैन्य संघर्षों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पल्लव नरेश नरसिंहवर्मन प्रथम ने चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय को 'मणिमंगलम् के युद्ध' में निर्णायक रूप से पराजित किया था और वातापी पर अधिकार करने के उपरांत 'वातापीकोंड' की उपाधि धारण की थी। 2. बादामी के चालुक्य वंश के प्रसिद्ध शासक पुलकेशिन द्वितीय के 'ऐहोल अभिलेख' की रचना उसके दरबारी कवि रवि कीर्ति ने की थी, जिसमें कालिदास और भारवि की कीर्ति का उल्लेख मिलता है तथा नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन पर उसकी विजय का वर्णन है। 3. पल्लव शासक महेंद्रवर्मन प्रथम ने अपने शासन के प्रारंभिक काल में जैन धर्म का अनुयायी होने के कारण बौद्ध धर्म का घोर उत्पीड़न किया था, किंतु शैव संत अप्पर के प्रभाव में आकर उसने शैव धर्म अपना लिया और त्रिचिरापल्ली तथा महाबलीपुरम में भव्य रॉक-कट मंदिरों का निर्माण करवाया। 4. महाबलीपुरम के प्रसिद्ध 'रथ मंदिरों' (सप्त पगोडा) का निर्माण पल्लव राजा नरसिंहवर्मन द्वितीय (राजसिंह) के शासनकाल में करवाया गया था, जो महाबलीपुरम के समुद्रतट मंदिर (Shore Temple) के समकालीन हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? 19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में 'प्रार्थना समाज' और 'सत्यशोधक समाज' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1867 में बंबई में आत्माराम पांडुरंग द्वारा स्थापित 'प्रार्थना समाज' का मुख्य उद्देश्य जातिगत बंधनों को समाप्त करना, बाल विवाह का विरोध करना, विधवा पुनर्विवाह का समर्थन करना और स्त्री शिक्षा को बढ़ावा देना था, जिसके प्रमुख बौद्धिक नेता महादेव गोविंद रानाडे थे। 2. ज्योतिराव फुले द्वारा वर्ष 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' ने ब्राह्मणवादी वर्चस्व और पारंपरिक धार्मिक कर्मकांडों का कड़ा विरोध करते हुए शूद्रों और अति-शूद्रों के अधिकारों तथा सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष किया, तथा उनकी प्रसिद्ध पुस्तक 'गुलामगिरी' में इस विचारधारा का विस्तृत विवरण मिलता है। 3. प्रार्थना समाज के संस्थापकों ने बंगाल के ब्रह्म समाज के विपरीत वेदों की अचूकता और दिव्यता में पूर्ण विश्वास व्यक्त किया तथा हिंदू धर्म के पारंपरिक पौराणिक देवी-देवताओं की पूजा को अनिवार्य बताया। 4. सत्यशोधक समाज ने रूढ़िवादी धार्मिक ग्रंथों और पुरोहितवाद को नकारते हुए विवाह संस्कारों और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में ब्राह्मण पुरोहितों की मध्यस्थता को पूरी तरह समाप्त करने के लिए वैकल्पिक विवाह पद्धतियों की शुरुआत की थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? 1857 के महान विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झांसी जैसे राज्यों का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय किया गया, जिससे भारतीय शासकों और रियासतों के भीतर गहरा राजनीतिक अविश्वास और रोष उत्पन्न हुआ। 2. ब्रिटिश आर्थिक नीतियों के परिणामस्वरूप भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों का तेजी से पतन हुआ, जिससे पारंपरिक कारीगर और शिल्पकार बेरोजगार होकर कृषि पर निर्भर होने लगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर अत्यधिक दबाव बढ़ गया। 3. वर्ष 1850 में पारित 'धार्मिक असुविधा अधिनियम' (Religious Disabilities Act) के तहत पुश्तैनी संपत्ति में उत्तराधिकार के अधिकार को धर्म परिवर्तन से जोड़ दिया गया, जिससे ईसाई धर्म अपनाने वाले भारतीयों को अपने पैतृक धन से वंचित होना पड़ा और रूढ़िवादी भारतीय जनता में भारी धार्मिक असंतोष फैल गया। 4. ब्रिटिश सेना में सेवारत भारतीय सैनिकों (सिपाहियों) के साथ नस्लीय भेदभाव किया जाता था, उन्हें यूरोपीय सैनिकों की तुलना में बहुत कम वेतन मिलता था और 'सामान्य सेना सेवा अधिनियम' (General Service Enlistment Act) के तहत समुद्र पार कर विदेशों में सेवा देने की अनिवार्यता ने सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका तथा उनके संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नाना साहब (पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र) ने कानपुर में 5 जून 1857 को विद्रोह का नेतृत्व संभाला और स्वयं को पेशवा घोषित करते हुए ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सत्ता को समाप्त कर दिया, जिसमें अजीमुल्ला खां उनके मुख्य सलाहकार और राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में कार्यरत थे। 2. तात्या टोपे ने कानपुर और ग्वालियर के मोर्चों पर ब्रिटिश सेनाओं के विरुद्ध अत्यंत कुशल छापामार (गोरिल्ला) युद्ध का संचालन किया तथा ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल को पराजित कर कानपुर पर स्थायी रूप से अधिकार बनाए रखा था। 3. कानपुर में ब्रिटिश आत्मसमर्पण के उपरांत घटी 'बीबीघर नरसंहार' (Bibighar Massacre) की घटना के पश्चात ब्रिटिश सेनापति जनरल सर ह्यूरोज ने कानपुर की पुनः प्राप्ति के लिए भीषण सैन्य अभियान का नेतृत्व किया था और नाना साहब को गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? मराठा साम्राज्य में "सरनजामी प्रथा" (Saranjami System) का संबंध किससे था?
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