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भारतीय संविधान के भाग-III (मूल अधिकार) के अंतर्गत प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों और 'अल्पसंख्यक वर्गों के हितों के संरक्षण' से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 25 के अंतर्गत प्रदत्त अंतःकरण की और धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता के अधीन राज्य को यह शक्ति प्राप्त है कि वह आर्थिक, वित्तीय, राजनैतिक या किसी अन्य लौकिक क्रियाकलाप का विनियमन या निर्बंधन कर सकता है और सामाजिक कल्याण या सुधार के लिए हिन्दुओं की धार्मिक संस्थाओं को सभी वर्गों के हिंदुओं के लिए खोलने का उपबंध कर सकता है, जिसमें सिख धर्म के कृपण धारण करने और लेकर चलने का अधिकार भी स्पष्ट रूप से शामिल है।
  2. 2. अनुच्छेद 29 के खंड (1) के अनुसार भारत के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाए रखने का अधिकार है, तथा इस अनुच्छेद के अंतर्गत यह संरक्षण केवल 'धार्मिक अल्पसंख्यकों' तक ही सीमित है, भाषाई अल्पसंख्यकों को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
  3. 3. अनुच्छेद 30 के अधीन सभी अल्पसंख्यकों (चाहे वे धर्म पर आधारित हों या भाषा पर) को अपनी पसंद की शिक्षण संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अधिकार है, और राज्य जब ऐसी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं को सहायता देने में भेदभाव नहीं करेगा, तब यदि राज्य किसी संस्था का अधिग्रहण करना चाहे जो अल्पसंख्यकों द्वारा प्रबंधित है, तो वह ऐसे नियम या कानून नहीं बना सकता जिससे उस संस्था के प्रबंधन का अधिकार अनिश्चित रूप से समाप्त हो जाए।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 25 के अंतर्गत धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार पर सार्वजनिक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य के आधार पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। साथ ही, इसके स्पष्टीकरण (I) के अनुसार, सिखों द्वारा कृपण (Kirpan) धारण करने और लेकर चलने को धर्म का अंग माना गया है, और स्पष्टीकरण (II) के तहत 'हिंदुओं' की धार्मिक संस्थाओं को सभी वर्गों के लिए खोलने का प्रावधान राज्य कर सकता है। कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 29 का खंड (1) भारत के राज्यक्षेत्र के किसी भी नागरिक वर्ग को अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति को संरक्षित करने का अधिकार देता है, और यह संरक्षण **धार्मिक और भाषाई दोनों प्रकार के अल्पसंख्यकों** (तथा बहुसंख्यक नागरिकों के वर्गों) पर लागू होता है, न कि केवल धार्मिक अल्पसंख्यकों तक सीमित है। कथन 3 सही है: अनुच्छेद 30 सभी धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद की शिक्षण संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन का अधिकार देता है। यदि राज्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं की संपत्ति का अनिवार्य अधिग्रहण करता है, तो उसे ऐसा कानून बनाना होगा जिससे उनके अधिकारों का हनन न हो। भारतीय संविधान के इन महत्वपूर्ण प्रावधानों के विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट कर सकते हैं।
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