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Indian Polity
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भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास और ब्रिटिश राज के दौरान पारित अधिनियमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट के माध्यम से ब्रिटिश संसद ने पहली बार ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासनिक और राजनीतिक कार्यों को मान्यता दी, तथा इसके तहत बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पदनाम दिया गया और उसकी सहायता के लिए एक चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया, जिसके पहले गवर्नर-जनरल वारेन हेस्टिंग्स बने।
  2. 2. 1833 का चार्टर अधिनियम ब्रिटिश भारत के केंद्रीयकरण की दिशा में एक निर्णायक कदम था, जिसके द्वारा बंगाल के गवर्नर-जनरल को 'भारत का गवर्नर-जनरल' बना दिया गया और देश के सभी नागरिक एवं सैन्य प्रशासन की पूर्ण शक्तियाँ उसमें निहित कर दी गईं, तथा लॉर्ड विलियम बैंटिक इस पद पर आसीन होने वाले प्रथम व्यक्ति थे।
  3. 3. 1909 के भारतीय परिषद अधिनियम (जिसे मार्ले-मिंटो सुधार के नाम से भी जाना जाता है) के द्वारा केंद्रीय और प्रांतीय विधान परिषदों के आकार में व्यापक वृद्धि की गई, तथा इसके अंतर्गत पहली बार मुसलमानों के लिए 'पृथक निर्वाचन मंडल' (Communal Representation) की व्यवस्था करके लॉर्ड मिंटो को भारत में सांप्रदायिक निर्वाचन के जनक के रूप में स्थापित किया गया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट के द्वारा बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' (Governor-General of Bengal) बनाया गया था, न कि पूरे भारत का। वारेन हेस्टिंग्स इस पद पर आने वाले पहले व्यक्ति थे और उनकी सहायता के लिए चार सदस्यीय परिषद का गठन किया गया था, किंतु संपूर्ण भारत के गवर्नर-जनरल का पद 1833 के चार्टर एक्ट के माध्यम से सृजित किया गया था। कथन 2 सत्य है; 1833 के चार्टर अधिनियम ने ब्रिटिश भारत का पूर्ण केंद्रीकरण कर दिया और बंगाल के गवर्नर-जनरल को 'भारत का गवर्नर-जनरल' (Lord William Bentinck) बना दिया गया, जिसे देश की सभी नागरिक और सैन्य शक्तियाँ प्राप्त थीं। कथन 3 सत्य है; 1909 के मार्ले-मिंटो सुधार (Indian Councils Act, 1909) ने केंद्रीय व प्रांतीय विधान परिषदों का आकार बढ़ाया और मुसलमानों के लिए सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के तहत पृथक निर्वाचन प्रणाली शुरू की, जिसके लिए लॉर्ड मिंटो को 'सांप्रदायिक निर्वाचन के जनक' के रूप में जाना जाता है। भारतीय संविधान के निर्माण और उसकी पृष्ठभूमि को विस्तार से समझने के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के इस अनुभाग को पढ़ें।
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