Indian Polity
Asked 2 months ago · Viewed 22 times
भारतीय संविधान की अनुसूचियों, राजभाषाओं और राजनीतिक दलों की मान्यता से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ शामिल थीं, जिन्हें विभिन्न संवैधानिक संशोधनों के माध्यम से बढ़ाकर वर्तमान में 22 कर दिया गया है, और इस अनुसूची में 'अंग्रेजी' भाषा को आधिकारिक राजभाषा के रूप में सम्मिलित किया गया है, जबकि 'राजस्थानी' को अभी तक इसमें स्थान नहीं मिला है।
- 2. भारतीय संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 351 में यह प्रावधान किया गया है कि संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके।
- 3. निर्वाचन आयोग के नियमानुसार किसी पंजीकृत दल को 'राष्ट्रीय दल' (National Party) के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि वह कम से कम चार राज्यों में लोकसभा चुनाव या विधानसभा चुनावों में वैध मतों का कम से कम 6 प्रतिशत मत प्राप्त करे और इसके अतिरिक्त कम से कम चार राज्यों से लोकसभा में कुल 4 सीटें भी जीते।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में 'अंग्रेजी' भाषा को शामिल नहीं किया गया है, हालांकि अंग्रेजी देश की सह-राजभाषा है और नागालैंड, मेघालय आदि राज्यों की आधिकारिक भाषा है। इसके अलावा 'राजस्थानी' और 'भोजपुरी' जैसी प्रमुख भाषाओं को भी अभी तक आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है। कथन 2 सत्य है; अनुच्छेद 351 हिंदी भाषा के विकास और प्रसार के लिए संघ के कर्तव्यों का वर्णन करता है। कथन 3 सत्य है; राष्ट्रीय दल की मान्यता के लिए निर्वाचन आयोग के मानदंडों के अनुसार पार्टी को चार या अधिक राज्यों में लोकसभा या विधानसभा चुनावों में 6% वैध मत और लोकसभा में न्यूनतम 4 सीटें जीतना अनिवार्य होता है। विषय की अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
अगला प्रश्न →
भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और…
← पिछला प्रश्न
भारतीय संविधान सभा के गठन और उसकी निर्माण प्रक्रिया के…
Related Questions
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की शक्तियों, क्षेत्राधिकारों और अवमानना से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 129 के तहत उच्चतम न्यायालय को एक 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) का दर्जा दिया गया है, जिसके अंतर्गत उसे न केवल अपने निर्णयों और अभिलेखों को सुरक्षित रखने का अधिकार है, बल्कि उसे स्वयं की अवमानना (Contempt of Court) के लिए दंडित करने की शक्ति भी प्राप्त है, जिसमें आपराधिक अवमानना के मामलों में सच्चाई (Truth) को एक पूर्ण और सर्वव्यापी बचाव के रूप में मान्यता दी गई है।
2. संविधान के अनुच्छेद 137 के अधीन उच्चतम न्यायालय को संसद द्वारा बनाई गई किसी भी विधि या अनुच्छेद 145 के अधीन बनाए गए नियमों के अधीन रहते हुए, अपने द्वारा दिए गए किसी निर्णय या आदेश का पुनरावलोकन (Review) करने की शक्ति प्राप्त है।
3. जनहित याचिका (PIL) की अवधारणा के विकास के साथ उच्चतम न्यायालय ने ' epistolary jurisdiction' (पत्राचार क्षेत्राधिकार) को स्वीकार किया है, जिसके तहत न्यायालय किसी भी सार्वजनिक हित के मामले में पीड़ित व्यक्ति द्वारा औपचारिक याचिका दायर न किए जाने पर केवल एक पत्र या पोस्टकार्ड को भी रिट याचिका के रूप में संज्ञान में ले सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान की अनुसूचियों, राजभाषाओं और राजनीतिक दलों की मान्यता से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ शामिल थीं, जिन्हें संवैधानिक संशोधनों के माध्यम से जोड़कर वर्तमान में 22 कर दिया गया है, और इस अनुसूची में 'अंग्रेजी' भाषा को शामिल किया गया है जबकि 'राजस्थानी' और 'भोजपुरी' को अभी तक इसमें संवैधानिक दर्जा प्राप्त नहीं हुआ है।
2. भारतीय संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 348 में उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में तथा अधिनियमों, विधेयकों आदि के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा का विशेष प्रावधान किया गया है, जिसके अनुसार संसद द्वारा विधि बनाकर अंग्रेजी के प्रयोग को प्रतिबंधित किया जा सकता है।
3. निर्वाचन आयोग द्वारा किसी पंजीकृत राजनीतिक दल को 'राष्ट्रीय दल' (National Party) के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि वह कम से कम चार राज्यों में लोकसभा चुनावों या आम विधानसभा चुनावों में कुल वैध मतों का कम से कम 6 प्रतिशत मत प्राप्त करे और इसके अतिरिक्त कम से कम चार राज्यों से लोकसभा में कुल 4 सीटें भी जीते।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य की कार्यपालिका, विशेष रूप से राज्यपाल की विधाई शक्तियों (अनुच्छेद 200 और 201) और मुख्यमंत्री की संवैधानिक स्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 200 के अनुसार, जब राज्य के विधानमंडल द्वारा कोई विधेयक पारित कर राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, तो राज्यपाल के पास यह शक्ति होती है कि वह विधेयक को अनुमति दे सकता है, अनुमति रोक सकता है, अथवा राष्ट्रपति के विचार के लिए उस विधेयक को आरक्षित रख सकता है, और यदि कोई विधेयक उच्च न्यायालय की शक्तियों को इस प्रकार कम करता है कि उसकी संवैधानिक स्थिति खतरे में पड़े, तो ऐसे विधेयक को राष्ट्रपति के लिए आरक्षित रखना राज्यपाल के लिए संवैधानिक रूप से अनिवार्य है।
2. अनुच्छेद 163 के तहत राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होती है जिसका मुखिया मुख्यमंत्री होता है, तथा राज्यपाल के स्वविवेक (Discretionary powers) से लिए गए निर्णयों की वैधता को किसी भी न्यायालय में इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि उसे ऐसा निर्णय स्वविवेक से नहीं लेना चाहिए था।
3. राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और वह राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है, किंतु मुख्यमंत्री द्वारा अपने पद से त्यागपत्र दिए जाने पर राज्य का मंत्रिपरिषद स्वतः विघटित हो जाता है, जिसके कारण महाधिवक्ता को भी अपना पद छोड़ना अनिवार्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और राज्यसभा की विशिष्ट शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 249 के अंतर्गत राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन से उपस्थित संकल्प पारित कर संसद को राज्य सूची (State List) के किसी विषय पर राष्ट्रीय हित में कानून बनाने के लिए अधिकृत कर सकती है, और ऐसा प्रस्ताव अधिकतम एक वर्ष की अवधि के लिए वैध रहता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 312 के तहत राज्यसभा को यह अनन्य (Exclusive) शक्ति प्राप्त है कि वह उपस्थित और मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के बहुमत से संकल्प पारित कर नई अखिल भारतीय सेवा (All India Services) के सृजन का अधिकार केंद्र सरकार को दे सकती है।
3. लोकसभा द्वारा पारित किसी साधारण विधेयक (Ordinary Bill) को जब राज्यसभा में भेजा जाता है, और यदि राज्यसभा उसे अस्वीकार कर देती है या ऐसे संशोधनों को प्रस्तुत करती है जिनसे लोकसभा असहमत है, तो ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 108 के तहत बुलाई जाने वाली संयुक्त बैठक (Joint Sitting) में निर्णय कुल उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत से लिया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित 'राज्य के नीति निर्देशक तत्वों' (DPSP - अनुच्छेद 36-51) की प्रकृति, संशोधनों और न्यायिक व्याख्या के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के अंतर्गत निहित नीति निर्देशक सिद्धांतों को प्रभावी बनाने के लिए संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाई गई किसी विधि को इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को छीनती या न्यून करती है, और यह संरक्षण मूल संविधान में ही निहित था जिसे बाद में 42वें संविधान संशोधन द्वारा विस्तारित किया गया था।
2. निर्देशक तत्वों को न्यायपालिका द्वारा अपरिवर्तनीय (Non-justiciable) घोषित किया गया है, किंतु सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे मिनर्वा मिल्स वाद, 1980) में यह स्पष्ट किया है कि मूल अधिकार और नीति निर्देशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके बीच का संतुलन संविधान के 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है।
3. अनुच्छेद 48 के तहत राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करने के प्रयास करेगा, और विशेष रूप से गायों और बछड़ों तथा अन्य दुधारू और वाहक पशुओं की नस्लों के परीक्षण और सुधार के लिए तथा उनके वध का प्रतिषेध करने के लिए कदम उठाएगा, और यह एक समाजवादी विचारधारा पर आधारित नीति निर्देशक तत्व है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और नए राज्यों के निर्माण या सीमा परिवर्तन की विधायी प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सके जो वह ठीक समझे, जबकि अनुच्छेद 3 के तहत संसद को मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन करने की शक्ति प्रदान की गई है।
2. अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के निर्माण या किसी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन करने वाला कोई भी विधेयक संसद के किसी भी सदन में केवल तभी प्रस्तुत किया जा सकता है जब राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश प्राप्त हो, और राष्ट्रपति द्वारा ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसकी राय जानने के लिए भेजा जाना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है, भले ही राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई राय को मानना संसद के लिए बाध्यकारी न हो।
3. अनुच्छेद 4 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना, या राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित किए गए कानून संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' माने जाएंगे, जिसके लिए संसद के विशेष बहुमत तथा आधे राज्यों के विधानमंडलों के अनुसमर्थन की अनिवार्य आवश्यकता होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.