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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की विभिन्न शक्तियों, विशेषकर उसकी अंतर्निहित शक्तियों (Inherent Powers), समीक्षा क्षेत्राधिकार और राष्ट्रपति की सलाहकारिता अधिकारिता (अनुच्छेद 143) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत उच्चतम न्यायालय को अपनी अधिकारिता का प्रयोग करते हुए ऐसा 'पूर्ण न्याय' (Complete Justice) करने का विशेष विवेक अधिकार प्राप्त है, जिसके आदेश या डिक्री का प्रवर्तन पूरे भारत में होगा, और संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के प्रावधान इस शक्ति के प्रयोग में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं कर सकते हैं।
  2. 2. अनुच्छेद 143 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा मांगे गए परामर्श पर विचार करने के लिए उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ (Constitutional Bench) का गठन करना अनिवार्य होता है, जिसमें कम से कम पांच न्यायाधीश होने चाहिए, तथा न्यायालय द्वारा दी गई सलाहकार राय राष्ट्रपति के लिए पूर्णतः बाध्यकारी होती है।
  3. 3. उच्चतम न्यायालय के 'पुनरावलोकन क्षेत्राधिकार' (Review Jurisdiction) के तहत संविधान के अनुच्छेद 137 के अधीन वह अपने द्वारा सुनाए गए किसी निर्णय या आदेश का पुनरावलोकन कर सकता है, किंतु इस प्रकार का पुनरावलोकन आवेदन केवल तभी स्वीकार किया जा सकता है जब संसद द्वारा इस निमित्त कोई नया अधिनियम पारित किया गया हो।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत उच्चतम न्यायालय को यह शक्ति दी गई है कि वह अपने समक्ष लंबित किसी वाद या विषय में 'पूर्ण न्याय' करने के लिए आवश्यक डिक्री पारित कर सके या आदेश दे सके। हालांकि यह न्यायालय की अनन्य और व्यापक शक्ति है, किंतु यह संसद के विधायी कानूनों के उल्लंघन में अनियंत्रित नहीं है, फिर भी 'पूर्ण न्याय' सुनिश्चित करने के लिए इसके आदेश संपूर्ण भारत में प्रभावी होते हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति द्वारा मांगे गए परामर्श पर उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई राय केवल एक 'सलाहकार राय' होती है, जो राष्ट्रपति के लिए किसी भी स्थिति में बाध्यकारी नहीं होती है। साथ ही, सार्वजनिक महत्व के मामलों पर ऐसी राय देने के लिए कम से कम पांच न्यायाधीशों की पीठ का होना अनिवार्य नहीं है, हालांकि सामान्यतः संवैधानिक मामलों में ऐसा किया जाता है। कथन 3 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 137 के तहत उच्चतम न्यायालय को अपने ही निर्णयों या आदेशों का पुनरावलोकन करने की शक्ति प्राप्त है, और इसके लिए संसद द्वारा किसी नए अधिनियम को पारित करने की कोई आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि यह न्यायालय की अपनी अंतर्निहित प्रक्रियागत समीक्षा शक्ति है। भारतीय राजव्यवस्था के ऐसे ही महत्वपूर्ण और विस्तृत विषयों को गहराई से पढ़ने के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर विजिट कर सकते हैं।
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