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Indian Polity
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSCs) की स्वतंत्रता, उनके सदस्यों की सेवा शर्तों तथा उनके प्रतिवेदन (Reports) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 318 के अंतर्गत संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों की संख्या और उनकी सेवा की शर्तों के नियम निर्धारित करने की शक्ति राष्ट्रपति में निहित है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के मामले में यह शक्ति केवल संबंधित राज्य के राज्यपाल को प्राप्त है।
- 2. संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को उसके पद से केवल राष्ट्रपति के आदेश द्वारा ही हटाया जा सकता है, भले ही वह राज्य लोक सेवा आयोग का सदस्य क्यों न हो, और इस प्रक्रिया में सिद्ध कदाचार के मामले में उच्चतम न्यायालय की प्रतिवेदन (Report) राष्ट्रपति के लिए अनिवार्य रूप से बाध्यकारी होती है।
- 3. संघ लोक सेवा आयोग अपना वार्षिक प्रतिवेदन राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है, जिसे राष्ट्रपति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग अपना वार्षिक प्रतिवेदन संबंधित राज्य के राज्यपाल को प्रस्तुत करता है, और राज्यपाल उसे राज्य के विधानमंडल के समक्ष रखवाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
संघ लोक सेवा आयोग और राज्य लोक सेवा आयोगों से संबंधित तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। संविधान के अनुच्छेद 318 के अनुसार, राष्ट्रपति (संघ के मामले में) और राज्यपाल (राज्य के मामले में) को आयोग के सदस्यों की संख्या और उनकी सेवा की शर्तें विनियमित करने की शक्ति प्राप्त है। अनुच्छेद 317 के तहत, राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्य या अध्यक्ष को भी हटाने की शक्ति केवल भारत के राष्ट्रपति के पास होती है, राज्यपाल के पास नहीं; और इस संबंध में उच्चतम न्यायालय की जाँच और उसकी सलाह राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी होती है। इसके अतिरिक्त, अनुच्छेद 323 के अनुसार UPSC अपना प्रतिवेदन राष्ट्रपति को और SPSC अपना प्रतिवेदन राज्यपाल को सौंपता है। अधिक विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति की शक्तियों, प्रधानमंत्री के संवैधानिक कर्तव्यों तथा मंत्रिपरिषद की रचना और दायित्वों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 67(क) के अनुसार उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपने पद से त्यागपत्र दे सकता है, किंतु उसका पद से हटाया जाना तब तक प्रभावी नहीं होता जब तक कि राज्यसभा द्वारा इस आशय का संकल्प अपने तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित न कर दिया जाए और लोकसभा उससे सहमत न हो जाए।
2. संविधान के अनुच्छेद 75(1-क) के अनुसार मंत्रिपरिषद में प्रधानमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या लोकसभा के सदस्यों की कुल संख्या के पन्द्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, और यह प्रावधान मूल संविधान में नहीं था बल्कि इसे 91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा अंतःस्थापित किया गया था।
3. संविधान के अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन से संबंधित और विधान के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे, और यदि राष्ट्रपति ऐसा निर्देश दे, तो किसी ऐसे विषय को जिस पर किसी मंत्री ने विनिश्चय कर दिया है किंतु मंत्रिपरिषद ने विचार नहीं किया है, मंत्रिपरिषद के समक्ष विचार के लिए प्रस्तुत करे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के क्रम में पारित 'चार्टर अधिनियम, 1833' (Charter Act of 1833) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम द्वारा बंगाल के गवर्नर-जनरल को 'भारत का गवर्नर-जनरल' बना दिया गया, और इस पद पर आसीन होने वाले प्रथम व्यक्ति लॉर्ड विलियम बेंटिक थे, जिन्हें देश की नागरिक और सैन्य दोनों शक्तियाँ प्रदान की गईं।
2. इस एक्ट ने मद्रास और बंबई के गवर्नरों को उनकी विधाई शक्तियों से पूरी तरह वंचित कर दिया, और भारत के गवर्नर-जनरल को पूरे ब्रिटिश भारत के लिए विधाई अधिकार प्रदान किए गए।
3. इस अधिनियम के तहत कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को आंशिक रूप से समाप्त करते हुए इसे केवल चीन के साथ व्यापार और चाय के व्यापार तक सीमित कर दिया गया, तथा ईस्ट इंडिया कंपनी को पूरी तरह से एक प्रशासनिक और राजनीतिक निकाय बना दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा के सदस्यों का चयन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के माध्यम से एकल संक्रमणीय मत द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से किया गया था।
2. संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या 389 निर्धारित की गई थी, जिसमें से रियासतों के 93 प्रतिनिधियों का चयन रियासतों के शासकों द्वारा मनोनीत किया जाना था, जबकि ब्रिटिश भारत की 296 सीटों में से चीफ कमिश्नर क्षेत्रों के लिए कोई प्रतिनिधित्व नहीं था।
3. संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी, जिसमें मुस्लिम लीग ने भाग नहीं लिया था, और सभा के अस्थायी अध्यक्ष के रूप में डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को चुना गया था जो कि सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत और संविधान सभा द्वारा स्वीकृत 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objective Resolution) ही परिवर्धित होकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना बना, जिसे 26 जनवरी 1950 को संविधान के लागू होने के साथ ही अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया गया था।
2. 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट निर्णय दिया था कि प्रस्तावना भारतीय संविधान का एक अभिन्न अंग (Integral Part) है और संसद इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन कर सकती है।
3. 'केशवानंद भारती वाद' (1973) के ऐतिहासिक निर्णय में उच्चतम न्यायालय ने अपने पूर्व के मत को बदलते हुए यह अभिनिर्धारित किया कि प्रस्तावना संविधान का अंग है, तथा इसमें निहित 'मूल ढांचा' (Basic Structure) को छोड़कर संसद द्वारा अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संशोधन किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संवैधानिक अधिकारों, योग्यताओं और कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और उसे देश के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, तथा उसे संसद के दोनों सदनों की बैठकों या उनकी संयुक्त बैठक में भाग लेने और बोलने का अधिकार है, किंतु उसे किसी भी स्थिति में मतदान करने का अधिकार प्राप्त नहीं है।
2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) को पदच्युत करने की प्रक्रिया और आधार वही होते हैं जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के होते हैं, और वह अपनी सेवानिवृत्ति के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी प्रकार के पद पर पुनः नियुक्ति का पात्र होता है यदि राष्ट्रपति इसकी अनुमति प्रदान कर दें।
3. महान्यायवादी का पारिश्रमिक संविधान द्वारा स्वयं निर्धारित किया जाता है और वह संचित निधि पर भारित व्यय (Charged Expenditure) होता है, जबकि सीएजी (CAG) के वेतन और भत्ते उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान होते हैं किंतु वे संसद द्वारा विधि बनाकर निर्धारित किए जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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