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Indian Polity
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भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धति के माध्यम से आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (एकल संक्रमणीय मत द्वारा) के आधार पर किया गया था, जिसमें ब्रिटिश भारत के प्रांतों के साथ-साथ देशी रियासतों के प्रतिनिधियों का भी निर्वाचन किया गया था।
- 2. संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या 389 निर्धारित की गई थी, जिनमें से 296 सीटें ब्रिटिश भारत और 93 सीटें देशी रियासतों को आवंटित की जानी थीं, तथा ब्रिटिश भारत की सीटों में से 4 सीटें मुख्य आयुक्तों के चार प्रांतों (दिल्ली, अजमेर-मेरवाड़ा, कुर्ग और ब्रिटिश बलूचिस्तान) को दी गई थीं।
- 3. संविधान सभा के चुनाव में यद्यपि अधिकांश सीटें कांग्रेस और मुस्लिम लीग द्वारा जीती गईं, तथापि महात्मा गांधी और मोहम्मद अली जिन्ना दोनों ही इस संविधान सभा के प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित या मनोनीत सदस्य कभी नहीं रहे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि संविधान सभा के लिए ब्रिटिश प्रांतों के सदस्यों का निर्वाचन तो प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति से हुआ था, किंतु 'देशी रियाسतों के प्रतिनिधियों का निर्वाचन नहीं हुआ था', बल्कि उनका चयन संबंधित रियासतों के शासकों द्वारा 'मनोनयन' के माध्यम से किया जाना था। कथन 2 सत्य है; संविधान सभा की कुल निर्धारित सदस्य संख्या 389 थी, जिसमें 296 ब्रिटिश भारत और 93 देशी रियासतों के लिए थीं तथा ब्रिटिश भारत की 296 सीटों में से 292 गवर्नर के प्रांतों और 4 चीफ कमिश्नर प्रांतों से थीं। कथन 3 सत्य है क्योंकि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और मुस्लिम लीग के प्रमुख नेता मोहम्मद अली जिन्ना दोनों ही संविधान सभा के सदस्य नहीं थे। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था को पढ़ें।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल (विधानसभा और विधान परिषद) की विधायी शक्तियों, धन विधेयकों की प्रक्रिया तथा विधान परिषद के गठन एवं उत्सादन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अंतर्गत संसद किसी राज्य में विधान परिषद के सृजन या उत्सादन के लिए विधि बना सकती है, यदि संबंधित राज्य की विधानसभा इस आशय का संकल्प कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पारित कर दे, और ऐसा संकल्प संसद के लिए कानून बनाने हेतु पूर्ण रूप से बाध्यकारी होता है।
2. विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु किसी भी स्थिति में विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या 40 से कम नहीं होनी चाहिए (अपवाद स्वरूप जम्मू-कश्मीर विधान परिषद के समय इसके विशेष प्रावधान थे)।
3. धन विधेयक (Money Bill) केवल राज्य की विधानसभा में ही पुनः स्थापित किया जा सकता है, विधान परिषद में नहीं; तथा विधानसभा द्वारा पारित धन विधेयक जब विधान परिषद को भेजा जाता है, तो विधान परिषद को उसे अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिशों के अधिकतम 14 दिनों की अवधि के भीतर विधानसभा को वापस लौटाना अनिवार्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति की निर्वाचन पद्धति, प्रधानमंत्री के उत्तरदायित्व और केंद्रीय मंत्रिपरिषद की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (निर्वाचित एवं मनोनीत दोनों सदस्यों) के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक गण के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है, और राज्य विधानमंडलों के सदस्य इस निर्वाचन में किसी भी प्रकार से भाग नहीं लेते हैं।
2. अनुच्छेद 75 के उपबंधों के अनुसार, प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है, तथा मंत्रिपरिषद में प्रधानमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या लोकसभा के सदस्यों की कुल संख्या के पंद्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, और यह नियम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के मामले में भी समान रूप से लागू होता है।
3. अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह देश के प्रशासनिक मामलों और विधान के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे, किंतु यदि राष्ट्रपति किसी विशिष्ट विषय पर प्रशासनिक जानकारी मांगता है, तो प्रधानमंत्री अपनी स्वविवेक शक्ति का प्रयोग करते हुए ऐसी सूचना देने से मना कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) और उनके विशिष्ट अनुच्छेदों के क्रियान्वयन एवं न्यायिक समीक्षा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 43 के अंतर्गत राज्य, उपयुक्त विधान या आर्थिक संगठन द्वारा या किसी अन्य रीति से, कृषि के, उद्योग के या अन्य प्रकार के सभी श्रमिकों को काम, निर्वाह मजदूरी, शिष्ट जीवन स्तर और अवकाश तथा सामाजिक और सांस्कृतिक अवसरों की सुलभ कराने का प्रयास करेगा, तथा विशेष रूप से राज्य ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तिगत या सहकारी आधार पर कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा।
2. संविधान के अनुच्छेद 45 के अंतर्गत मूलतः 14 वर्ष की आयु पूरी करने तक सभी बालकों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रावधान था, किंतु 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2001 द्वारा इस अनुच्छेद की विषय-वस्तु को परिवर्तित कर इसे 'प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा' (Early childhood care and education) से संबंधित बना दिया गया, जिसे अब 6 वर्ष से कम आयु के बालकों के लिए उपबंधित किया गया है।
3. सर्वोच्च न्यायालय ने 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)' और उसके पश्चात के कई निर्णयों में यह स्पष्ट किया है कि यद्यपि नीति निर्देशक तत्व मूल अधिकारों से सीधे तौर पर श्रेष्ठ नहीं हैं, किंतु यदि संसद अनुच्छेद 39(b) और 39(c) में निर्दिष्ट सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अनुच्छेद 31C के तहत कोई कानून बनाती है, तो उसे इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 के अधिकारों का उल्लंघन करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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अनुच्छेद 338A क्या है?
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राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों और मुख्यमंत्री के संवैधानिक दायित्वों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 161 के अंतर्गत राज्यपाल को किसी भी ऐसे विषय से संबंधित विधि के विरुद्ध अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति के दंडादेश को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति प्राप्त है, जिस विषय तक राज्य की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, किंतु राज्यपाल किसी भी परिस्थिति में मृत्युदंड (Death Sentence) को पूर्णतः क्षमा (Pardon) नहीं कर सकता है, क्योंकि यह अधिकार केवल भारत के राष्ट्रपति के पास है।
2. संविधान के अनुच्छेद 167 के अनुसार राज्य के मुख्यमंत्री का यह कर्तव्य है कि वह राज्य کے प्रशासन के संचालन और विधान के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे, तथा राज्यपाल द्वारा मांगे जाने पर ऐसी सूचना तुरंत उपलब्ध कराए।
3. राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और वह राज्यपाल के प्रसादपर्यंत (During the Pleasure of the Governor) पद धारण करता है, और महाधिवक्ता को राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों की बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार तो है, किंतु उसे किसी भी स्थिति में मतदान (Voting) करने का अधिकार प्राप्त नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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