त्वरित लिंक्स
Indian Polity
7 views
भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और विशेष उपकरणों (जैसे कि विभिन्न प्रस्तावों और कटौतियों) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 107 के अनुसार, धन विधेयक (Money Bill) के अतिरिक्त किसी भी अन्य साधारण विधेयक को संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित किया जा सकता है, तथा यदि कोई साधारण विधेयक संसद के दोनों सदनों के बीच गतिरोध के कारण संयुक्त बैठक (Joint Sitting) में पारित किया जाता है, तो राष्ट्रपति द्वारा बुलाई गई इस संयुक्त बैठक की अध्यक्षता अनिवार्य रूप से लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है, और यदि वह अनुपस्थित हो तो लोकसभा का उपाध्यक्ष इसकी अध्यक्षता करता है।
- 2. बजट प्रक्रिया के दौरान अनुदानों की मांगों पर चर्चा के समय विपक्षी सदस्यों द्वारा 'नीतिगत कटौती प्रस्ताव' (Policy Cut Motion) प्रस्तुत किया जाता है, जिसका उद्देश्य मांग की राशि को घटाकर 1 रुपये करना होता है, और यह प्रस्ताव सरकार की नीतियों के प्रति पूर्ण असहमति को व्यक्त करता है, जबकि 'मितव्ययिता कटौती प्रस्ताव' (Economy Cut Motion) के तहत मांग की राशि में एक निश्चित विशिष्ट राशि की कटौती करने का प्रस्ताव किया जाता है।
- 3. 'ध्यानाकर्षण प्रस्ताव' (Calling Attention Motion) और 'अल्पकालिक चर्चा' (Short Duration Discussion) दोनों ही भारतीय संसदीय प्रक्रिया के अ-संवैधानिक और परंपरा-आधारित उपकरण हैं, जिनमें ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से किसी सदस्य द्वारा लोक-महत्व के अति-आवश्यक मामले पर मंत्री का ध्यान आकर्षित किया जाता है और इस पर कोई औपचारिक मतदान नहीं होता है, किंतु अल्पकालिक चर्चा के विपरीत ध्यानाकर्षण प्रस्ताव की पूर्व अनुमति राज्यसभा के सभापति या लोकसभा के अध्यक्ष से प्राप्त करना आवश्यक नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 107 और अनुच्छेद 108 के अनुसार साधारण विधेयक पर गतिरोध होने पर राष्ट्रपति संयुक्त बैठक आहूत करता है जिसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष (या उनकी अनुपस्थिति में लोकसभा उपाध्यक्ष) करता है। कथन 2 सही है क्योंकि नीतिगत कटौती प्रस्ताव के तहत मांग की राशि को घटाकर 1 रुपये कर दिया जाता है जो सरकार की नीतियों के प्रति असहमति दर्शाता है, और मितव्ययिता कटौती में विशिष्ट राशि कम करने का प्रस्ताव होता है। कथन 3 गलत है क्योंकि ध्यानाकर्षण प्रस्ताव की पूर्व अनुमति लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति से प्राप्त करना अनिवार्य होता है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर जा सकते हैं।
Related Questions
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की संस्तुति पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IV-A और अनुच्छेद 51A के तहत जोड़ा गया था, और मूल रूप से इनकी संख्या 10 थी, जबकि 11वां मूल कर्तव्य 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया।
2. ये मूल कर्तव्य केवल भारतीय नागरिकों पर ही लागू होते हैं, विदेशी नागरिकों पर नहीं, और प्रकृति से ये न्यायोचित (Justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि इनके उल्लंघन पर किसी भी न्यायालय द्वारा सीधे रिट जारी करके कानूनी दंड दिया जा सकता है।
3. 86वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़े गए 11वें मूल कर्तव्य के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया है कि माता-पिता या संरक्षक का यह कर्तव्य होगा कि वह अपने छह से चौदह वर्ष की आयु के बीच के बच्चे को शिक्षा के अवसर प्रदान करे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में 'विधि के समक्ष समानता' का अधिकार दिया गया है?
→
संसद सत्र कौन आहूत करता है?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य प्रशासनिक संबंधों तथा अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत राष्ट्रपति को 'अंतर-राज्यीय परिषद्' की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और इस परिषद् का मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न विवादों की जाँच करना, ऐसे विषयों पर सलाह देना जिनमें राज्यों के समान हित हों, तथा नीतिगत समन्वय पर विचार करना है, किंतु इस परिषद् के निर्णय न्यायालय के आदेश की तरह अंतिम और बाधक (Binding) प्रकृति के नहीं होते हैं।
2. सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) की संस्तुति के आधार पर वर्ष 1990 में राष्ट्रपति के आदेश द्वारा अंतर-राज्यीय परिषद् को एक स्थायी निकाय के रूप में स्थापित किया गया था, और इस परिषद् के अध्यक्ष देश के प्रधानमंत्री होते हैं, जबकि सभी राज्यों के मुख्यमंत्री इसके स्थायी सदस्य होते हैं।
3. अनुच्छेद 258 के अंतर्गत राष्ट्रपति, किसी राज्य की सरकार की सहमति से, उस सरकार या उसके अधिकारियों को संघ की कार्यकारी शक्ति के अंतर्गत आने वाले किसी विषय पर ऐसे कृत्य सौंप सकता है जो विशुद्ध रूप से केंद्रीय विषयों से संबंधित हों, किंतु ऐसा करने के लिए संसद द्वारा उस विषय पर एक विशेष कानून पारित किया जाना अनिवार्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण और मुख्यमंत्री की नियुक्ति से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 213 के अंतर्गत राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की शक्ति वही होती है जो राज्य विधानमंडल द्वारा पारित अधिनियम की होती है, किंतु राज्यपाल किसी भी परिस्थिति में राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति के बिना अध्यादेश प्रख्यापित नहीं कर सकता यदि उस विषय पर राज्य विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति की संस्तुति आवश्यक हो।
2. अनुच्छेद 164 के अनुसार राज्य के मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा राज्यों में जनजातियों के कल्याण के लिए भारसाधक एक पृथक् मंत्री का होना अनिवार्य किया गया है।
3. राज्यपाल की क्षमादान की शक्ति (अनुच्छेद 161) के अंतर्गत उसे राज्य सूची के विषयों से संबंधित विधियों के विरुद्ध अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति के दंड को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु राज्यपाल को मृत्युदंड (Death Sentence) के मामले में क्षमादान देने तथा सेना के न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड के विरुद्ध शक्ति का प्रयोग करने का अधिकार प्राप्त नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.