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Indian Polity
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भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में 'विधि के समक्ष समानता' का अधिकार दिया गया है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अनुच्छेद 14 सुनिश्चित करता है कि राज्य किसी भी व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता से वंचित नहीं करेगा।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की कार्यकारी, विधाई और क्षदान संबंधी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को किसी भी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति के दंड को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति प्राप्त है, और यदि किसी व्यक्ति को मृत्युदंड दिया गया है, तो केवल राष्ट्रपति के पास ही उसे क्षमा करने की अनन्य शक्ति है, जबकि राज्यपाल के पास मृत्युदंड के मामले में क्षमादान की शक्ति नहीं होती है।
2. राष्ट्रपति द्वारा अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति (अनुच्छेद 123) संसद की कानून बनाने की शक्ति के सह-विस्तारित (co-extensive) है, जिसका अर्थ यह है कि राष्ट्रपति केवल उन्हीं विषयों पर अध्यादेश जारी कर सकता है जिन पर संसद को कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है, और प्रत्येक ऐसा अध्यादेश संसद के पुनः समवेत होने के छह सप्ताह के भीतर स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है, भले ही संसद द्वारा उसे अस्वीकृत करने का कोई औपचारिक प्रस्ताव पारित न किया गया हो।
3. अनुच्छेद 74 के अंतर्गत राष्ट्रपति अपने कृत्यों का प्रयोग करने में मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करेगा, किंतु 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह प्रावधान जोड़ा गया कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद से उसकी सलाह पर 'पुनर्विचार' करने की अपेक्षा एक बार कर सकता है, और पुनर्विचार के पश्चात दी गई सलाह के अनुसार कार्य करने के लिए राष्ट्रपति पूर्णतः बाध्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग IV-क के अंतर्गत समाहित 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) और स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की सिफारिशों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में स्थान नहीं दिया गया था, बल्कि इन्हें वर्ष 1976 में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा सरदार स्वर्ण सिंह समिति की अनुशंसा पर संविधान में जोड़ा गया, जिसमें समिति ने मूल रूप से नागरिकों के लिए करों का भुगतान (Payment of Taxes) करने को भी एक अनिवार्य कर्तव्य बनाने की संस्तुति की थी।
2. संविधान के अनुच्छेद 51-क के अंतर्गत वर्तमान में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं, जिनमें से 11वाँ कर्तव्य (6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करना) 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया था, तथा यह प्रावधान किया गया कि ये कर्तव्य नागरिकों के साथ-साथ भारत के राज्यक्षेत्र में निवास करने वाले विदेशी नागरिकों पर भी समान रूप से लागू होंगे।
3. यद्यपि मूल कर्तव्यों की प्रकृति न्यायोचित (Non-justiciable) है और इनके उल्लंघन पर सीधे न्यायालय द्वारा कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती, तथापि संसद को यह विधाई शक्ति प्राप्त है कि वह कानून बनाकर इनके क्रियान्वयन को सुनिश्चित कर सकती है और अवहेलना की स्थिति में शास्ति (Penalty) या दंड का प्रावधान कर सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की संरचना, उसकी अधिकारिता और न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 143 के अंतर्गत राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय से विधि या तथ्य के किसी ऐसे प्रश्न पर परामर्श मांगने की शक्ति प्राप्त है जो लोक महत्व का हो, और इस अनुच्छेद के अधीन राष्ट्रपति द्वारा निर्देशित किए जाने पर उच्चतम न्यायालय अपनी राय राष्ट्रपति को देने के लिए पूरी तरह बाध्य है।
2. उच्चतम न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) से संबंधित विधि बनाने की पूर्ण शक्ति संसद में निहित है, और इसके तहत संसद ने 'न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971' पारित किया है, जिसके अंतर्गत दीवानी और आपराधिक दोनों प्रकार की अवमानना के लिए दंड का प्रावधान किया गया है।
3. संविधान की मूल संरचना (Basic Structure Doctrine) के सिद्धांत के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय द्वारा न्यायिक समीक्षा की शक्ति को संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत किए गए किसी भी संवैधानिक संशोधन के माध्यम से भी समाप्त या सीमित नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राष्ट्रपति का चुनाव किस पद्धति से होता है?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधायी संबंधों और अंतर-राज्यीय परिषद् के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 249 के अनुसार, यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से एक संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक है कि संसद राज्य सूची में शामिल किसी विषय पर कानून बनाए, तो संसद को पूरे देश या उसके किसी भाग के लिए उस विषय पर विधि बनाने की शक्ति मिल जाती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम दो वर्षों के लिए प्रवृत्त रहता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत राष्ट्रपति को 'अंतर-राज्यीय परिषद्' (Inter-State Council) की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और इस परिषद् का मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न विवादों की जाँच करना, ऐसे विषयों पर सलाह देना जिनमें राज्यों के समान हित हों, तथा नीतिगत समन्वय पर विचार करना है, जिसके निर्णय न्यायालय के आदेश की तरह सभी पक्षों पर बाध्यकारी होते हैं।
3. सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) की संस्तुति के आधार पर वर्ष 1990 में राष्ट्रपति के आदेश द्वारा अंतर-राज्यीय परिषद् को एक स्थायी निकाय के रूप में स्थापित किया गया था, और इस परिषद् की बैठकों की अध्यक्षता प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है, जबकि सभी राज्यों के मुख्यमंत्री इसके स्थायी सदस्य होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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