BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Indian Polity
7 views

ब्रिटिश भारत में संवैधानिक विकास के प्रारंभिक चरणों के अंतर्गत 'पिट्स इंडिया एक्ट, 1784' (Pitt's India Act, 1784) के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. इस अधिनियम द्वारा कंपनी के राजनीतिक और वाणिज्यिक कार्यों को पहली बार पृथक किया गया, तथा राजनीतिक मामलों के अधीक्षण और नियंत्रण के लिए ब्रिटिश मंत्रिमंडल के छह सदस्यों वाले एक नए निकाय 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' (Board of Control) की स्थापना की गई, जिससे ब्रिटिश सरकार को भारत में कंपनी के नागरिक, सैन्य और राजस्व संबंधी सभी मामलों पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त हो गया।
  2. 2. गवर्नर-जनरल की परिषद के सदस्यों की संख्या जो 'रेगुलेटिंग एक्ट, 1773' के तहत चार निर्धारित की गई थी, उसे पिट्स इंडिया एक्ट के माध्यम से घटाकर तीन कर दिया गया, ताकि गवर्नर-जनरल को निर्णय लेने में विशेष परिस्थितियों में निर्णायक मत (Casting Vote) के माध्यम से अधिक प्रशासनिक सुगमता और स्थायित्व मिल सके।
  3. 3. इस अधिनियम के माध्यम से भारत में पहली बार द्वैध शासन प्रणाली (System of Dual Government) की औपचारिक शुरुआत हुई, जिसके तहत कंपनी के व्यावसायिक मामलों का प्रबंधन 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' (Court of Directors) के हाथों में छोड़ दिया गया, जबकि राजनीतिक मामलों का प्रबंधन 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' के अधीन कर दिया गया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 (Pitt's India Act, 1784) के संदर्भ में पूरी तरह सही हैं। पिट्स इंडिया एक्ट ने रेगुलेटिंग एक्ट 1773 की कमियों को दूर करने के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी के वाणिज्यिक और राजनीतिक कार्यों को अलग-अलग कर दिया। इसके तहत नियंत्रण बोर्ड (Board of Control) की स्थापना की गई जो ब्रिटिश मंत्रिमंडल के नियंत्रण में था, और निदेशक मंडल (Court of Directors) को व्यापारिक मामलों का जिम्मा सौंपा गया, जिससे द्वैध शासन की शुरुआत हुई। साथ ही, गवर्नर-जनरल की परिषद के सदस्यों की संख्या 4 से घटाकर 3 कर दी गई ताकि निर्णय प्रक्रिया तेज हो सके। भारतीय संविधान के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में अधिक विस्तार से पढ़ने के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के इस विस्तृत पोर्टल का अध्ययन कर सकते हैं।
Share:

Related Questions

संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची से कब हटाया गया? भारतीय संविधान की अनुसूचियों, राजभाषा और राजनीतिक दलों के विधि-सम्मत नियमन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें समय-समय पर संशोधनों द्वारा बढ़ाया गया; जैसे सिंधी भाषा को 21वें संविधान संशोधन (1967) द्वारा, कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली को 71वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा, तथा बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली को 92वें संविधान संशोधन (2003) द्वारा जोड़ा गया, जिससे वर्तमान में इस अनुसूची में कुल 22 भाषाएँ शामिल हैं। 2. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) में राजनीतिक दलों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है, जिसके अनुसार किसी भी नए राजनीतिक दल को अपने गठन के 30 दिनों के भीतर आयोग के समक्ष आवेदन करना होता है, किंतु निर्वाचन आयोग को किसी पंजीकृत राजनीतिक दल का पंजीकरण रद्द करने या वापस लेने की कोई वैधानिक शक्ति प्राप्त नहीं है। 3. संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून), जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था, के पैरा 4 के अनुसार किसी राजनीतिक दल का किसी अन्य दल में विलय (Merger) तब वैध माना जाता है जब उस दल के कम से कम दो-तिहाई (2/3rd) सदस्य उस विलय के पक्ष में हो जाते हैं, और ऐसे विलय की स्थिति में दलबदल के आधार पर अयोग्यता लागू नहीं होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस संशोधन द्वारा संविधान में भाग IX जोड़ा गया जिसका शीर्षक 'पंचायते' है और इसे अनुच्छेद 243 से 243-O तक समाविष्ट किया गया है, तथा इसके साथ ही ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी गई जिसमें पंचायतों के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले कुल 29 कार्यकारी विषयों का उल्लेख किया गया है। 2. अधिनियम के अनुसार प्रत्येक राज्य में ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर पंचायतों का गठन किया जाना अनिवार्य है, किंतु जिन राज्यों की कुल जनसंख्या 20 लाख से कम है, उन्हें मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत का गठन करने की छूट प्रदान की गई है। 3. पंचायतों के सभी स्तरों पर प्रत्यक्ष चुनावों के माध्यम से भरे जाने वाले कुल स्थानों का कम से कम एक-तिहाई (33 प्रतिशत) भाग महिलाओं के लिए आरक्षित होना अनिवार्य है, तथा यह आरक्षण महिलाओं के लिए केवल कुल सीटों तक ही सीमित है और इसे अध्यक्षों के पदों (Offices of Chairpersons) पर लागू नहीं किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 और शहरी स्थानीय शासन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम द्वारा संविधान में भाग IX-क जोड़ा गया तथा अनुच्छेद 243-प्र (Article 243S) के अंतर्गत 'वार्ड समितियों' (Wards Committees) के गठन का प्रावधान किया गया, जो कि पाँच लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाले नगरपालिका क्षेत्र के अंतर्गत एक या अधिक वार्डों को मिलाकर बनाई जाती हैं। 2. अनुच्छेद 243-य-घ (Article 243ZD) के प्रावधानों के अनुसार, प्रत्येक राज्य में जिला स्तर पर 'जिला योजना समिति' (District Planning Committee) का गठन किया जाएगा, जो जिले की पंचायतों और नगरपालिकाओं द्वारा तैयार की गई योजनाओं को समेकित करके जिले के लिए विकास योजना का प्रारूप तैयार करेगी, और इस समिति के कुल सदस्यों में से चार-पाँचवें (4/5th) सदस्य जिले की पंचायतों और नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अपने में से ही चुने जाते हैं। 3. 74वें संविधान संशोधन के तहत नगरपालिकाओं के तीन प्रकारों — नगर पंचायत, नगरपालिका परिषद और नगर निगम — का गठन किया जाता है, और किसी संक्रमणकालीन क्षेत्र (ग्रामीण से नगरीय क्षेत्र में परिवर्तित होने वाला क्षेत्र) के लिए 'नगरपालिका परिषद' का गठन किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त 'मूल अधिकारों' (Fundamental Rights - भाग III) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' (Law) की परिभाषा में अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम, और रूढ़ि या प्रथा (Custom or Usage) को शामिल किया गया है, और उच्चतम न्यायालय ने 'केशवानंद भारती वाद' में यह स्पष्ट किया था कि संविधान संशोधन अधिनियम (Constitutional Amendment Act) को अनुच्छेद 13 के अधीन 'विधि' नहीं माना जा सकता, अतः संसद मूल अधिकारों में संशोधन करके उन्हें पूरी तरह समाप्त भी कर सकती है। 2. अनुच्छेद 19(1)(g) के अंतर्गत कोई भी वृत्ति, व्यापार या कारोबार करने का अधिकार नागरिकों को प्राप्त है, किंतु राज्य को इस अधिकार पर 'व्यावहित हित' (Public Interest) या सामान्य जनहित के आधार पर तथा किसी वृत्ति या व्यापार के लिए तकनीकी अर्हताएं निर्धारित करने के संबंध में उचित प्रतिबंध (Reasonable Restrictions) लगाने की विधายक शक्ति प्राप्त है। 3. अनुच्छेद 21 के अंतर्गत दिए गए 'प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के संरक्षण' के दायरे में उच्चतम न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक निर्णयों द्वारा 'त्वरित न्याय का अधिकार', 'निजता का अधिकार (Right to Privacy)', और 'विदेश यात्रा करने का अधिकार' को भी मौलिक अधिकार के रूप में शामिल किया है, जो केवल नागरिकों के लिए उपलब्ध हैं, विदेशियों के लिए नहीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.