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Indian Polity
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संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची से कब हटाया गया?

Detailed Explanation

44वें संविधान संशोधन (1978) द्वारा संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों से हटाकर अनुच्छेद 300A के तहत एक कानूनी अधिकार बना दिया गया।
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या अन्य सदस्यों की पदावधि उनके पद ग्रहण करने की तिथि से छह वर्ष की अवधि या पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक (इनमें से जो भी पहले हो) होती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के लिए यह आयु सीमा बासठ वर्ष निर्धारित की गई है। 2. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी सदस्य को राष्ट्रपति द्वारा उसके पद से केवल 'कदाचार' (Misbehavior) के आधार पर ही हटाया जा सकता है, और कदाचार के इस आरोप की जांच उच्चतम न्यायालय द्वारा की जाती है, जिसके द्वारा दी गई सलाह राष्ट्रपति पर पूर्ण रूप से बाध्यकारी होती है। 3. राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी सदस्य को हटाने की शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास है, भले ही उनकी नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, किंतु उन्हें निलंबित करने का अधिकार केवल संबंधित राज्य के राज्यपाल को प्राप्त होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यपाल की समाधान शक्तियों (Pardoning Powers) और मुख्यमंत्री तथा मंत्रिपरिषद के बीच संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल को उस विषय पर, जिससे संबंधित राज्य की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति के दंड को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु राज्यपाल किसी भी स्थिति में न्यायालय द्वारा दिए गए मृत्युदंड (Death Sentence) को पूरी तरह से क्षमा (Pardon) नहीं कर सकता है, क्योंकि मृत्युदंड के मामले में क्षमादान की अनन्य शक्ति केवल भारत के राष्ट्रपति के पास होती है। 2. संविधान के अनुच्छेद 164(1) के अनुसार राज्य के मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा राज्यों में जनजातीय कल्याण के लिए एक पृथक मंत्री का होना अनिवार्य किया गया है, जिसके पास किसी अन्य विभाग का प्रभार नहीं होना चाहिए। 3. संविधान के अनुच्छेद 167 के अंतर्गत मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे, और यदि राज्यपाल मंत्रिपरिषद के किसी ऐसे निर्णय पर, जिस पर किसी मंत्री ने विनिश्चय कर लिया है किंतु मंत्रिपरिषद ने विचार नहीं किया है, पुनर्विचार के लिए अपेक्षा करते हैं, तो मुख्यमंत्री के लिए उसे मंत्रिपरिषद के समक्ष रखना अनिवार्य होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) और उसके ऐतिहासिक संदर्भ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में प्रस्तुत 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) को 22 जनवरी 1947 को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया था, जो अंततः भारतीय संविधान की प्रस्तावना का आधार बना। 2. प्रस्तावना में उल्लिखित 'न्याय' (सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक) के आदर्श को वर्ष 1917 की रूसी क्रांति (Russian Revolution) से प्रेरणा लेकर शामिल किया गया था, जबकि 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व' के आदर्श को फ्रांसीसी क्रांति (French Revolution) से लिया गया है। 3. केशवानंद भारती वाद (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट रूप से निर्धारित किया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और संसद अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन करके प्रस्तावना में किसी भी प्रकार का संशोधन कर सकती है, बशर्ते कि वह संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) को नष्ट न करे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) तथा नए राज्यों के गठन या सीमाओं में परिवर्तन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो वह ठीक समझे, संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना कर सकती है, और यह शक्ति मुख्य रूप से उन क्षेत्रों पर लागू होती है जो पहले से भारतीय संघ का हिस्सा नहीं हैं (बाहरी राज्यों का प्रवेश)। 2. अनुच्छेद 3 के तहत संसद किसी भी राज्य के क्षेत्रफल में वृद्धि, कमी या उसकी सीमाओं में परिवर्तन कर सकती है, और इसके लिए प्रस्तुत किए जाने वाले विधेयक को संसद में पुनःस्थापित करने से पूर्व संबंधित राज्य के विधानमंडल की पूर्व सहमति (Prior Consent) प्राप्त करना अनिवार्य होता है, भले ही राज्य विधानमंडल द्वारा व्यक्त किया गया मत नकारात्मक क्यों न हो। 3. 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए परामर्श के आधार पर यह स्पष्ट किया गया था कि अनुच्छेद 3 के अंतर्गत प्राप्त विधायी शक्तियों के प्रयोग द्वारा संसद किसी भारतीय भू-भाग को किसी अन्य विदेशी देश को नहीं सौंप सकती है, और इसके लिए संविधान संशोधन (अनुच्छेद 368) करना अनिवार्य होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? संसद की बैठक की कोरम?
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