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Indian Polity
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भारतीय संविधान की अनुसूचियों, राजभाषा और राजनीतिक दलों के विधि-सम्मत नियमन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें समय-समय पर संशोधनों द्वारा बढ़ाया गया; जैसे सिंधी भाषा को 21वें संविधान संशोधन (1967) द्वारा, कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली को 71वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा, तथा बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली को 92वें संविधान संशोधन (2003) द्वारा जोड़ा गया, जिससे वर्तमान में इस अनुसूची में कुल 22 भाषाएँ शामिल हैं।
  2. 2. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) में राजनीतिक दलों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है, जिसके अनुसार किसी भी नए राजनीतिक दल को अपने गठन के 30 दिनों के भीतर आयोग के समक्ष आवेदन करना होता है, किंतु निर्वाचन आयोग को किसी पंजीकृत राजनीतिक दल का पंजीकरण रद्द करने या वापस लेने की कोई वैधानिक शक्ति प्राप्त नहीं है।
  3. 3. संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून), जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था, के पैरा 4 के अनुसार किसी राजनीतिक दल का किसी अन्य दल में विलय (Merger) तब वैध माना जाता है जब उस दल के कम से कम दो-तिहाई (2/3rd) सदस्य उस विलय के पक्ष में हो जाते हैं, और ऐसे विलय की स्थिति में दलबदल के आधार पर अयोग्यता लागू नहीं होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं और वर्तमान में संशोधनों के माध्यम से इनकी कुल संख्या 22 हो गई है। कथन 2 गलत है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय और कानूनी प्रावधानों के अनुसार, यद्यपि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29A के तहत पंजीकरण का प्रावधान है, लेकिन यदि कोई दल धोखाधड़ी से पंजीकरण कराता है या संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ का उल्लंघन करता है, तो निर्वाचन आयोग के पास वैधानिक रूप से उसकी मान्यता या पंजीकरण रद्द करने की अंतर्निहित शक्ति नहीं है (हालांकि इस पर न्यायिक समीक्षा और सुधार के प्रस्ताव निरंतर चलते रहते हैं; आयोग सीधे तौर पर आंतरिक लोकतंत्र के अभाव में पंजीकरण रद्द नहीं कर सकता)। कथन 3 बिल्कुल सही है, क्योंकि 91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा दलबदल कानून में संशोधन करके यह प्रावधान किया गया कि विलय तभी वैध होगा जब मूल दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य उसके पक्ष में हों। अधिक विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के पोर्टल पर जा सकते हैं।
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