त्वरित लिंक्स
Indian Polity
7 views
भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों (अनुच्छेद 5-11) और नागरिकता से संबंधित अन्य संवैधानिक तथा विधายकीय पहलुओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 9 के अंतर्गत यह स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाएगी, किंतु यह नियम उन नागरिकों पर लागू नहीं होता है जो आपातकाल या युद्ध की स्थिति के दौरान भारत से बाहर प्रवास करते हैं।
- 2. अनुच्छेद 10 के अनुसार भारत का प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जो इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों (अनुच्छेद 5 से 8) में से किसी के भी अधीन भारत का नागरिक है या समझा जाता है, संसद द्वारा बनाई जाने वाली किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, नागरिकता का ऐसा ही अधिकारी बना रहेगा।
- 3. अनुच्छेद 11 संसद को यह पूर्ण अधिकार प्रदान करता है कि वह नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में कोई भी उपबंध कर सके, और इसी शक्ति का प्रयोग करते हुए संसद ने 'नागरिकता अधिनियम, 1955' अधिनियमित किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 9 में स्पष्ट रूप से यह प्रावधान है कि यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता अर्जित कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त (Termination) हो जाती है। इस अनुच्छेद में युद्ध या आपातकाल जैसी परिस्थितियों का कोई अपवाद नहीं जोड़ा गया है। कथन 2 सत्य है; अनुच्छेद 10 यह सुनिश्चित करता है कि भारत का प्रत्येक नागरिक, जो अनुच्छेद 5 से 8 के तहत नागरिकता प्राप्त करता है, संसद द्वारा बनाई गई विधियों के अधीन रहते हुए नागरिक बना रहेगा (नागरिकता की निरंतरता)। कथन 3 सत्य है; अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति के संबंध में कानून बनाने की अनन्य शक्ति देता है, और इसी संवैधानिक शक्ति के तहत संसद ने वर्ष 1955 में 'नागरिकता अधिनियम' पारित किया था। भारतीय संविधान के विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
Related Questions
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्च न्यायालयों (High Courts) की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) तथा अधीनस्थ न्यायालयों (Subordinate Courts) के नियंत्रण से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत किसी उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता का क्षेत्र, उच्चतम न्यायालय के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्रदत्त रिट अधिकारिता की तुलना में अधिक विस्तृत है, क्योंकि उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ किसी अन्य साधारण विधिक अधिकार (Legal Right) के उल्लंघन पर भी रिट जारी कर सकता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 233 के प्रावधानों के तहत किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति उस राज्य के राज्यपाल द्वारा राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करके की जाती है, तथा जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने वाले व्यक्ति के लिए यह आवश्यक है कि वह कम से कम सात वर्ष तक अधिवक्ता या प्लीडर रहा हो और संघ या राज्य की न्यायिक सेवा में पहले से सेवारत न हो।
3. संविधान के अनुच्छेद 235 के अनुसार राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण, जिसमें जिला न्यायालयों और उनके नीचे के अन्य न्यायिक अधिकारियों की पोस्टिंग, प्रमोशन और छुट्टियों से जुड़े प्रशासनिक मामले शामिल हैं, पूरी तरह से संबंधित राज्य के राज्यपाल में निहित होता है, और उच्च न्यायालय की इसमें केवल परामर्शदात्री भूमिका होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
संविधान के भाग 17 में क्या है?
→
भारतीय संविधान सभा के गठन और उसकी निर्माण प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धति (आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत) के माध्यम से किया गया था, जिसमें ब्रिटिश प्रांतों और रियासतों दोनों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें आवंटित की गई थीं।
2. संविधान सभा के लिए जुलाई-अगस्त 1946 में हुए चुनावों में कुल 296 सीटों के लिए ब्रिटिश भारत की प्रांतों से चुनाव संपन्न हुए थे, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 208 सीटें और मुस्लिम लीग को 73 सीटें प्राप्त हुई थीं।
3. संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को आयोजित की गई थी, जिसमें मुस्लिम लीग ने भाग नहीं लिया था, और इस बैठक में डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को सभा का अस्थायी अध्यक्ष (Interim President) चुना गया था, जो फ्रांस की संसदीय परंपरा पर आधारित था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'नागरिकता' (Citizenship) से संबंधित है?
→
भारतीय संविधान सभा के गठन, विभिन्न समितियों और इसकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा के कुल सदस्यों में से 292 सदस्य ब्रिटिश प्रांतों से, 4 सदस्य चीफ कमिश्नर क्षेत्रों से और 93 सदस्य रियासतों से नामित होने थे, तथा रियासतों के प्रतिनिधियों का चुनाव संबंधित रियासतों के शासकों द्वारा मनोनीत किया जाना था, जिससे यह एक पूरी तरह से प्रत्यक्ष निर्वाचित निकाय बन गया था।
2. संविधान सभा की संघ शक्ति समिति, संघीय संविधान समिति और प्रांतीय संविधान समिति के अध्यक्ष क्रमशः पंडित जवाहरलाल नेहरू, पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल थे, जबकि प्रक्रिया नियम समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे।
3. संविधान सभा द्वारा कुल 11 सत्र आयोजित किए गए थे तथा इसके निर्माण कार्य में कुल 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा था, और अंतिम दिन यानी 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा की अंतिम बैठक आयोजित की गई थी जिसके बाद यह विघटित हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.