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Indian Polity
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भारतीय संविधान सभा के गठन, विभिन्न समितियों और इसकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान सभा के कुल सदस्यों में से 292 सदस्य ब्रिटिश प्रांतों से, 4 सदस्य चीफ कमिश्नर क्षेत्रों से और 93 सदस्य रियासतों से नामित होने थे, तथा रियासतों के प्रतिनिधियों का चुनाव संबंधित रियासतों के शासकों द्वारा मनोनीत किया जाना था, जिससे यह एक पूरी तरह से प्रत्यक्ष निर्वाचित निकाय बन गया था।
- 2. संविधान सभा की संघ शक्ति समिति, संघीय संविधान समिति और प्रांतीय संविधान समिति के अध्यक्ष क्रमशः पंडित जवाहरलाल नेहरू, पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल थे, जबकि प्रक्रिया नियम समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे।
- 3. संविधान सभा द्वारा कुल 11 सत्र आयोजित किए गए थे तथा इसके निर्माण कार्य में कुल 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा था, और अंतिम दिन यानी 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा की अंतिम बैठक आयोजित की गई थी जिसके बाद यह विघटित हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन अप्रत्यक्ष रूप से प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के माध्यम से किया गया था, न कि प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा। इसके अलावा, रियासतों के प्रतिनिधियों का चयन भी जनता द्वारा नहीं बल्कि संबंधित रियाسतों के शासकों द्वारा परामर्श के आधार पर किया जाना था। कथन 2 सही है; संघ शक्ति समिति और संघीय संविधान समिति के अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू थे, प्रांतीय संविधान समिति के अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल थे, और प्रक्रिया नियम समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। कथन 3 पूरी तरह सही है; संविधान के निर्माण में 2 वर्ष 11 महीने और 18 दिन लगे, 11 सत्र हुए और 24 जनवरी 1950 को अंतिम बैठक संपन्न हुई। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के तहत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा ऐसे निबंधनों और शर्तों को ठीक समझे, संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना कर सकेगी, जबकि अनुच्छेद 3 संसद को किसी राज्य के क्षेत्र को घटाने, बढ़ाने या उसके नाम में परिवर्तन करने का अधिकार देता है, और इसके लिए संबंधित राज्य के विधानमंडल की पूर्व सहमति होना अनिवार्य है।
2. अनुच्छेद 3 के अंतर्गत किसी नए राज्य के निर्माण या मौजूदा राज्य की सीमाओं में परिवर्तन से संबंधित विधेयक को राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता है, तथा राष्ट्रपति इस विधेयक को संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसके विचार जानने के लिए भेजते हैं, और राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर दी गई राय राष्ट्रपति या संसद पर आबद्धकर (Binding) होती है।
3. अनुच्छेद 4 यह स्पष्ट करता है कि अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के अधीन बनाए गए नए राज्यों के प्रवेश या गठन तथा राज्यों की सीमाओं या नामों में परिवर्तन से संबंधित विधियों को संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' नहीं माना जाएगा, अर्थात ऐसी विधियाँ साधारण बहुमत से पारित की जा सकती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम द्वारा संविधान में भाग IX जोड़ा गया, जिसका शीर्षक 'पंचायते' है और इसमें अनुच्छेद 243 से 243-O तक के प्रावधान शामिल हैं, तथा इसके तहत ग्यारहवीं अनुसूची में कुल 29 कार्यकारी विषयों को सूचीबद्ध किया गया है जिन पर पंचायतों को विध बनाने की शक्ति दी गई है।
2. अधिनियम के अनुसार प्रत्येक राज्य में ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर पंचायतों का गठन किया जाना अनिवार्य है, किंतु जिन राज्यों की जनसंख्या 20 लाख से कम है, उन्हें मध्यवर्ती स्तर की पंचायत का गठन न करने का विकल्प प्रदान किया गया है।
3. पंचायती राज संस्थाओं के सभी स्तरों पर महिलाओं के लिए कुल सीटों के एक-तिहाई (कम से कम 33%) से कम स्थान आरक्षित नहीं होंगे, और यह आरक्षण केवल कुल निर्वाचित सीटों तक ही सीमित है, बल्कि अध्यक्षों (Chairpersons) के पदों पर भी इसी अनुपात में आरक्षण लागू होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग-III के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 13 न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) का स्पष्ट आधार प्रदान करता है, जिसके तहत संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा बनाई गई कोई भी ऐसी विधि जो भाग-III के प्रावधानों का उल्लंघन करती है, अपने उल्लंघन की मात्रा तक शून्य (Void) होगी।
2. अनुच्छेद 15(5) के तहत राज्य को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हुए नागरिकों के वर्गों की उन्नति के लिए या अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए शैक्षणिक संस्थानों (अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों सहित) में प्रवेश के संबंध में विशेष उपबंध करने की शक्ति प्रदान की गई है।
3. अनुच्छेद 20(2) के अंतर्गत 'दोहरे जोखिम' (Double Jeopardy) के संरक्षण का अधिकार केवल किसी न्यायालय के समक्ष या न्यायिक अधिकरण (Judicial Tribunal) की कार्यवाही में अभियोजित किए जाने और दंडित किए जाने पर लागू होता है, यह विभागीय या प्रशासनिक प्राधिकारियों के समक्ष की गई कार्रवाइयों पर लागू नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश प्रख्यापित करने की प्रक्रिया (अनुच्छेद 213) और मुख्यमंत्री तथा मंत्रिपरिषद के संवैधानिक दायित्वों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 213 के अंतर्गत राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की वही शक्ति और प्रभाव होता है जो राज्य के विधानमंडल के किसी अधिनियम का होता है, किंतु यदि राज्य विधानमंडल के दोनों सदन सत्र में हों या द्विसदनीय व्यवस्था में कोई एक सदन सत्र में न हो, तब भी राज्यपाल इस शक्ति का प्रयोग कर सकता है बशर्ते मुख्यमंत्री इसकी लिखित संस्तुति करे।
2. राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश के लिए यह संवैधानिक रूप से अनिवार्य है कि उसे राज्य विधानमंडल के पुनः समवेत होने पर दोनों सदनों के समक्ष प्रस्तुत किया जाए, और यदि विधानमंडल द्वारा इसे छह सप्ताह के भीतर अस्वीकार करने वाला संकल्प पारित कर दिया जाता है, तो वह उसी क्षण निष्प्रभावी हो जाता है।
3. संविधान के अनुच्छेद 167 के अनुसार मुख्यमंत्री का यह विधिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासनिक मामलों और विधान के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे, तथा राज्यपाल द्वारा राज्य के प्रशासन से संबंधित मांगी गई समस्त जानकारी और सूचना अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) और अधीनस्थ न्यायालयों की संरचना, शक्तियों तथा क्षेत्राधिकार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 217 के अनुसार उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश को उसके पद से राष्ट्रपति द्वारा केवल सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया (संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित समावेदन) के आधार पर ही हटाया जा सकता है, किंतु इसके लिए संबंधित राज्य के राज्यपाल की पूर्व सहमति अनिवार्य होती है।
2. संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय को रिट (Writ) जारी करने की जो शक्ति प्राप्त है, वह न केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए बल्कि 'अन्य प्रयोजनों' (जैसे कि साधारण विधिक अधिकारों के उल्लंघन पर) के लिए भी प्रयोग की जा सकती है, और इस दृष्टि से उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार उच्चतम न्यायालय के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्रदत्त रिट क्षेत्राधिकार की तुलना में अधिक विस्तृत है।
3. संविधान के अनुच्छेद 233 के प्रावधानों के अंतर्गत किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा उस राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात ही की जाती है, और न्यायिक सेवा के अन्य सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा राज्य लोक सेवा आयोग तथा उच्च न्यायालय से परामर्श के आधार पर नियमों के तहत की जाती है।
4. संविधान के अनुच्छेद 235 के तहत राज्य के सभी अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण, जिसमें जिला न्यायालयों के नीचे के न्यायालयों के अधिकारियों की पोस्टिंग, प्रमोशन, पदस्थापन और अनुशासनिक नियंत्रण शामिल है, पूर्णतः संबंधित राज्य सरकार (राज्यपाल) के प्रशासनिक क्षेत्राधिकार में निहित होता है, और इसमें उच्च न्यायालय की कोई प्रशासनिक भूमिका नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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