नैतिक एवं चारित्रिक विकास
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत में 'नैतिक यथार्थवाद' (Moral Realism) और 'स्वायत्त नैतिकता' (Autonomous Morality) के संक्रांति काल तथा बच्चों में न्याय की धारणा के विकास का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई बच्चा नियमों को अपरिवर्तनीय, बाहरी रूप से थोपी गई और पवित्र सत्ता (जैसे माता-पिता या ईश्वर) की देन मानता है और वह किसी दुर्घटना में अधिक बर्तन टूटने को कम बर्तन टूटने की तुलना में बड़ा नैतिक अपराध मानता है (भले ही नीयत दोनों बार दुर्घटना की रही हो), तो पियाजे के इस नैतिक विकास के सैद्धांतिक प्रतिमान और संज्ञानात्मक संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जीन पियाजे के अनुसार, बाल्यावस्था के शुरुआती दौर में बच्चों में 'नैतिक यथार्थवाद' या 'पर-नैतिकता' (Heteronomous Morality) पाई जाती है, जहाँ वे नियमों को परम, अपरिवर्तनीय और बाहरी सत्ता द्वारा निर्धारित मानते हैं। इस अवस्था में बच्चे कार्य के परिणामों (Objective Consequences) को कर्ता की नीयत (Subjective Intention) से अधिक महत्व देते हैं। पियाजे और उनके विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार संज्ञानात्मक परिपक्वता और सामाजिक अंतर्क्रिया बढ़ने पर बच्चे 'स्वायत्त नैतिकता' (Autonomous Morality) की ओर बढ़ते हैं जहाँ वे नियमों को आपसी सहमति और लचीला मानते हैं।
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत 'रूढ़िगगत स्तर' (Conventional Morality) के द्वितीय चरण यानी 'अधिकार और सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने का अभिमुखीकरण' (Authority and Social Order Maintaining Orientation) का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई किशोर या वयस्क इस मान्यता से प्रेरित होकर कार्य करता है कि सामाजिक नियमों, कानूनों और कर्तव्यों का पालन करना समाज में सुव्यवस्थित व्यवस्था बनाए रखने और अराजकता को रोकने के लिए परम आवश्यक है, और कानून का उल्लंघन करना हर परिस्थिति में अनैतिक है; तो कोहलबर्ग के इस नैतिक विकास के प्रतिमान के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से सत्य है?
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Theory of Moral Development) की आलोचनाओं और उसके उत्तर-रूढ़िगत स्तर (Post-conventional Morality) की तात्विक संरचना का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई व्यक्ति सामाजिक अनुबंध (Social Contract) की सीमाओं से परे जाकर अपने व्यक्तिगत अंतःकरण के सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों (Universal Ethical Principles) के आधार पर निर्णय लेता है, और वह यह मानता है कि न्याय, मानवाधिकार और मानवीय गरिमा किसी भी लिखित कानून या सामाजिक समझौते से सर्वोपरि हैं, तो कोहलबर्ग के इस मॉडल के अनुसार व्यक्ति का यह आचरण नैतिक विकास के किस विशिष्ट चरण (Stage) को निरूपित करता है?
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Theory of Moral Development) के विभिन्न स्तरों और चरणों की गत्यात्मक संरचना का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई परिपक्व व्यक्ति समाज द्वारा निर्धारित पारंपरिक नियमों या कानूनों से परे जाकर अपने स्वयं के आंतरिक विवेक, मानवाधिकारों और न्याय के सार्वभौमिक सिद्धांतों (Universal Ethical Principles) के आधार पर नैतिक निर्णय लेता है—भले ही वे नियम किसी विशिष्ट सामाजिक संदर्भ में कानून के विरुद्ध क्यों न हों—तो कोहलबर्ग के इस नैतिक ढांचे के अनुसार व्यक्ति का यह आचरण किस उच्चतम स्तर और चरण को प्रदर्शित करता है?
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