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Child Development
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत 'पूर्व संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage: लगभग 2 से 7 वर्ष) की तात्विक और गत्यात्मक संरचना का गहन विश्लेषण करने पर, इस चरण की एक प्रमुख विशेषता 'जीववाद' (Animism) और 'अहमकेन्द्रियता' (Egocentrism) मानी जाती है। यदि कोई चार वर्ष का बालक अपने खिलौने वाली कार के गिर जाने पर यह रोने लगता है कि 'कार को चोट लग गई है और उसे बहुत दर्द हो रहा है', तथा वह यह मानता है कि हर व्यक्ति दुनिया को उसी तरह देखता और अनुभव करता है जैसे वह स्वयं देखता है, तो पियाजे के इस संज्ञानात्मक ढांचे के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस व्यवहार की तात्विक प्रक्रिया को सर्वाधिक वैज्ञानिक एवं प्रामाणिक रूप से स्पष्ट करता है?

Detailed Explanation

जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, पूर्व संक्रियात्मक अवस्था (Preoperational Stage) में बच्चों में 'अहमकेन्द्रियता' (Egocentrism) और 'जीववाद' (Animism) प्रमुख विशेषताएं होती हैं। जीववाद वह प्रवृत्ति है जिसके तहत बच्चा निर्जीव वस्तुओं (जैसे खिलौना, कार, चंद्रमा आदि) में भी सजीवता, चेतना और भावनाओं का आरोपण करता है। वहीं, अहमकेन्द्रियता के कारण बच्चा यह मानने में असमर्थ होता है कि अन्य व्यक्तियों का दृष्टिकोण उसके अपने दृष्टिकोण से भिन्न हो सकता है। इस विषय में अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
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