समावेशी शिक्षा
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के मूल दर्शन और 'सार्वभौमिक डिजाइन फॉर लर्निंग' (Universal Design for Learning - UDL) के परिप्रेक्ष्य में, पारंपरिक 'विशिष्ट शिक्षा' (Special Education) से यह किस मूलभूत और संरचनात्मक बिंदु पर भिन्न होती है?
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Detailed Explanation
समावेशी शिक्षा एक ऐसी शिक्षण व्यवस्था है जिसमें सामान्य और विशिष्ट आवश्यकता वाले सभी बच्चे एक ही छत के नीचे बिना किसी भेदभाव के शिक्षा प्राप्त करते हैं। यह व्यवस्था बच्चों की कमियों को दूर करने के बजाय विद्यालयी व्यवस्था और पाठ्यक्रम को बच्चों की विविध आवश्यकताओं के अनुकूल बदलने पर जोर देती है। इसके विपरीत, विशिष्ट शिक्षा प्रणाली अक्सर बच्चों को उनकी अक्षमता के आधार पर अलग-थलग (Segregated) विद्यालयों या कक्षाओं में पढ़ाती है। समावेशी शिक्षा के सिद्धांतों को विस्तार से समझने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत 'विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चे'…
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के तहत विशिष्ट…
Related Questions
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'समावेशी शिक्षा और विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (Inclusive Education and Children with Special Needs)' के संदर्भ में, निकोलस हॉब्स (Nicholas Hobbs) द्वारा प्रतिपादित 'पारिस्थितिकीय सिद्धांत (Ecological Systems Theory) का विशेष शिक्षा में अनुप्रयोग' के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डorsolateral प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Dorsolateral Prefrontal Cortex - dlPFC), 'इंसुला' (Insula), और 'सुपीरियर टेम्पोरल सल्カス' (Superior Temporal Sulcus - STS) के बीच सामाजिक संज्ञान, पर्यावरणीय अनुकूलन और न्यूरोडाइवर्सिटी (Neurodiversity) प्रसंस्करण की सक्रियण गतिकी, तथा उता फ्रिथ (Uta Frith) द्वारा प्रतिपादित 'ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार (ASD) का न्यूरो-कोग्निटिव माइंडब्लाइंडनेस मॉडल (Mindblindness Model - Theory of Mind)' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक व उच्च प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, सार्वभौमिक डिजाइन फॉर लर्निंग (UDL: Universal Design for Learning) और विद्यार्थियों में संवेगात्मक नियमन, सामाजिक सहभागिता व सर्वांगीण समावेशन के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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कक्षा में 'समावेशी शिक्षा' (Inclusive Education) का अर्थ क्या है?
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कक्षा में 'समावेशी शिक्षा' (Inclusive Education) का अर्थ है:
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत 'विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों' (CWSN) के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और 'अधिकार अधिनियम (RPwD Act 2016)' के प्रावधानों तथा 'सार्वभौमिक डिज़ाइन फॉर लर्निंग' (UDL) के सिद्धांतों का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई विद्यालय संवेदी, शारीरिक, बौद्धिक या बहु-विकलांगता (Multiple Disabilities) से ग्रस्त बच्चों को सामान्य बालकों के साथ मुख्यधारा की शिक्षा में पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पाठ्यचर्या में लचीलापन, सुगम्यता (Accessibility) और सहायक तकनीकी (Assistive Technology) का उपयोग करता है, तो समावेशी शिक्षाशास्त्र के इन तात्विक एवं वैधानिक मानदंडों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत 'विभेदीकृत अनुदेशन' (Differentiated Instruction) की अवधारणा का मूल शैक्षणिक उद्देश्य निम्नलिखित में से क्या है?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में 'सार्वभौमिक रूप से डिज़ाइन किया गया अधिगम' (Universal Design for Learning - UDL) का मुख्य शैक्षिक निहितार्थ निम्नलिखित में से क्या है?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में, 'सार्वभौमिक रूप से अभिकल्पित अधिगम' (Universal Design for Learning - UDL) का मुख्य शैक्षणिक सिद्धांत निम्नलिखित में से किस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए सबसे अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक माना जाता है?
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बिहार आर्थिक सर्वेक्षण एवं राज्य बजट के नवीनतम आंकड़ों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए प्रस्तुत बिहार के बजट में कुल व्यय का सर्वाधिक हिस्सा 'सामान्य सेवाओं' (General Services) के बाद 'सामाजिक सेवाओं' (Social Services) पर आवंटित किया गया है, जिसमें शिक्षा क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
2. बिहार आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, राज्य की अर्थव्यवस्था में स्थिर मूल्यों पर सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) की वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत की तुलना में कम दर्ज की गई है, और प्राथमिक क्षेत्र का योगदान द्वितीयक क्षेत्र की तुलना में सबसे अधिक बना हुआ है।
3. राज्य में प्रति 1 लाख जनसंख्या पर बैंक शाखाओं और वित्तीय समावेशन के विस्तार के कारण प्रति व्यक्ति आय के मामले में पटना जिला लगातार शीर्ष पर बना हुआ है, जबकि सबसे कम प्रति व्यक्ति आय वाला जिला शिवहर है।
4. जीविका (Jeevika) कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए गठित स्वयं सहायता समूहों की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पूंजी निर्माण का एक प्रमुख स्रोत बन चुके हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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