वृद्धि एवं विकास: अवधारणा और अंतर
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बाल विकास के संदर्भ में 'अभिवृद्धि' (Growth) और 'विकास' (Development) की अवधारणाओं के बीच निम्नलिखित में से कौन सा तात्विक और वैज्ञानिक अंतर सबसे अधिक सटीक है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
बाल मनोविज्ञान में 'अभिवृद्धि' (Growth) का तात्पर्य शारीरिक संरचना और आकार में होने वाले परिवर्तनों (जैसे लंबाई, वजन, भार आदि) से है, जिसे मात्रात्मक रूप से मापा जा सकता है। यह विकास का एक भाग है। इसके विपरीत, 'विकास' (Development) एक व्यापक, सार्वभौमिक और आजीवन (Life-long) प्रक्रिया है जिसमें शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक और सामाजिक परिवर्तनों के साथ-साथ गुणात्मक बदलाव (जैसे कार्यकुशलता और परिपक्वता) भी शामिल होते हैं। इस विषय की विस्तृत वैज्ञानिक अवधारणा को समझने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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बाल विकास के संदर्भ में 'अभिवृद्धि' (Growth) और 'विकास' (Development) के बीच…
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बाल विकास के संदर्भ में 'अभिवृद्धि' (Growth) और 'विकास' (Development) की प्रकृति और उनके नियमों के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन वैज्ञानिक रूप से सर्वाधिक उपयुक्त है?
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बाल विकास के संदर्भ में 'अभिवृद्धि' (Growth) और 'विकास' (Development) के बीच का कौन सा सैद्धांतिक अंतर सबसे अधिक सटीक और व्यापक है?
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बाल विकास के सिद्धांतों और अधिगम की प्रक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'परिपक्वता' (Maturation) एक आनुवंशिक रूप से निर्धारित जैविक प्रक्रिया है, जो पर्यावरणीय अनुभवों और अधिगम के बिना भी एक निश्चित क्रम में स्वतः घटित होती है, जबकि अधिगम अभ्यास और अनुभव पर आधारित एक अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन है।
2. लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के 'उत्तर-रूढ़िगत स्तर' (Post-conventional Morality) के अंतर्गत आने वाले सामाजिक अनुबंधन अभिविन्यास (Social Contract Orientation) में व्यक्ति कानून को एक अटल और अपरिवर्तनीय नियम मानता है तथा कानून तोड़ने को अनैतिक समझता है।
3. ब्रूनर (Jerome Bruner) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत में 'प्रतीकात्मक अवस्था' (Symbolic Stage) वह चरण है जहाँ बालक विचारों को प्रस्तुत करने के लिए मुख्य रूप से भाषा, प्रतीकों और अमूर्त संकेतों का उपयोग करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत एवं लेव वायगोत्स्की के सामाजिक-सांस्कृतिक विकास के सिद्धांत के तुलनात्मक संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पियाजे का मानना था कि बालक का संज्ञानात्मक विकास उसकी जैविक परिपक्वता (Biological Maturation) और पर्यावरण के साथ सक्रिय भौतिक अन्वेषण से पहले होता है, जबकि भाषा इस विकास का उपोत्पाद (By-product) मात्र है।
2. वायगोत्स्की के अनुसार भाषा और चिंतन आरंभ में दो स्वतंत्र और अलग गतिविधियाँ होती हैं, लेकिन लगभग 2 वर्ष की आयु के आसपास बालक के भीतर भाषा और विचार आपस में मिल जाते हैं, जिससे बालक 'आंतरिक वाक्' (Inner Speech) के माध्यम से अपने चिंतन को विनियमित करना सीखता है।
3. पियाजे के सिद्धांत में 'बालक को एक छोटा वैज्ञानिक' (Little Scientist) माना गया है जो ज्ञान का निर्माण स्वयं अपने स्वतंत्र प्रयासों से करता है, जबकि वायगोत्स्की के सिद्धांत में ज्ञान के सह-निर्माण (Co-construction) के लिए सामाजिक अंतःक्रिया और सांस्कृतिक उपकरणों को केंद्रीय महत्व दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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बालक के विकास में 'परिपक्वता' (Maturation) का क्या अर्थ है?
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अधिगम (Learning) को प्रभावित करने वाला 'व्यक्तिगत कारक' (Personal Factor) कौन सा है?
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