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General Science
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तरंग वेवफ्रंट?

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समान कला वाले।
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मानव शरीर में होने वाले संक्रामक रोगों और उनके रोगजनकों (Pathogens) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'लेप्रोसी' (कुष्ठ रोग) एक जीवाणु जनित संक्रमण है जो माइकोबैक्टीरियम लेप्री (Mycobacterium leprae) के कारण होता है और यह मुख्य रूप से परिधीय तंत्रिकाओं (Peripheral nerves) और त्वचा को प्रभावित करता है। 2. 'ट्रैकोमा' (Trachoma), जो कि एक प्रमुख नेत्र रोग है, क्लैडाइडिया ट्रैकोमैटिस (Chlamydia trachomatis) नामक बैक्टीरिया द्वारा फैलता है और इसके संक्रमण से कॉर्निया में घाव तथा अंधापन हो सकता है। 3. 'रैबीज' एक विषाणु जनित घातक रोग है जो लाइसावायरस (Lyssavirus) के संक्रमण से होता है, और यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है तथा इसमें कपाल तंत्रिकाओं की ऐंठन के कारण हाइड्रोफोबिया (जल से डर) के लक्षण प्रकट होते हैं। 4. 'प्रियन' (Prions) संक्रामक प्रोटीन कण होते हैं जो न्यूक्लिक अम्ल (DNA या RNA) से रहित होते हैं, और इनके कारण मनुष्य में क्रूत्जफिल्ड-जैकोब रोग (CJD) जैसी घातक तंत्रिका संबंधी बीमारियाँ हो सकती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? प्रकाशिकी (Optics) के सिद्धांतों और लेंस-दर्पण के व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जब किसी उत्तल लेंस को ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक हो जाती है और वह अभिसारी (Converging) लेंस के बजाय अपसारी (Diverging) लेंस की तरह व्यवहार करने लगता है। 2. गोलीय दर्पण की फोकस दूरी ($f$) और उसकी वक्रता त्रिज्या ($R$) के बीच का संबंध $R = 2f$ केवल तभी सटीक रूप से लागू होता है जब आपतित किरणें मुख्य अक्ष के अत्यधिक निकट हों (जिन्हें पैरेक्सियल किरणें या Paraxial rays कहा जाता है)। 3. जब प्रकाश किरण विरल माध्यम से सघन माध्यम में प्रवेश करती है, तो उसकी तरंगदैर्ध्य और वेग दोनों कम हो जाते हैं, किंतु उसकी आवृत्ति (Frequency) अपरिवर्तित रहती है क्योंकि आवृत्ति स्रोत की विशेषता है। 4. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) के लिए यह आवश्यक है कि प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में जा रही हो तथा आपतन कोण का मान माध्यम युग्म के क्रांतिक कोण (Critical angle) से कम होना चाहिए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं? विद्युत धारा, प्रतिरोध और परिपथ के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी चालक का प्रतिरोध उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती और उसकी लंबाई के अनुक्रमानुपाती होता है, जबकि विशिष्ट प्रतिरोध (प्रतिरोधकता) चालक की भौतिक विमाओं पर निर्भर न करके केवल उसके पदार्थ की प्रकृति और ताप पर निर्भर करता है। 2. जब कई प्रतिरोधकों को समानांतर क्रम (Parallel combination) में जोड़ा जाता है, तो परिपथ का कुल तुल्य प्रतिरोध (Equivalent resistance) संयोजन के प्रत्येक व्यक्तिगत प्रतिरोध के मान से कम होता है, और सभी प्रतिरोधकों के सिरों के बीच विभवांतर समान रहता है। 3. किर्चॉफ का प्रथम नियम (धारा नियम - KCL) आवेश संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी संधि पर मिलने वाली सभी धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है। 4. अतिचालकता (Superconductivity) की स्थिति में कुछ पदार्थों का विद्युत प्रतिरोध शून्य हो जाता है और उनकी चुंबकीय पारगम्यता अनंत हो जाती है, जिससे वे पूर्ण प्रति-चुंबकीय की तरह व्यवहार करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? चार्ल्स नियम? विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (emf) का परिमाण उस परिपथ से गुजरने वाले चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर के सीधे समानुपाती होता है। 2. लेंज का नियम (Lenz's Law) ऊर्जा संरक्षण के नियम का पालन करता है, जिसके अनुसार प्रेरित धारा की दिशा हमेशा उस कारण का विरोध करती है जिससे वह स्वयं उत्पन्न होती है। 3. जब किसी बंद कुंडली को एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है, तो उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान चुंबकीय क्षेत्र के घूमने की आवृत्ति और कुंडली के क्षेत्रफल के वर्ग के सीधे समानुपाती होता है। 4. स्वप्रेरण (Self-induction) किसी कुंडली का वह गुण है जिसके कारण वह कुंडली से गुजरने वाली धारा के परिवर्तन का विरोध करती है, और इसका एसआई मात्रक 'हेनरी' (Henry) है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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