BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
8 views

मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, मनसबदारी प्रणाली और धार्मिक नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. अकबर द्वारा प्रारंभ की गई मनसबदारी व्यवस्था में 'जात' पद मनसबदार के व्यक्तिगत वेतन और पद-प्रतिष्ठा को निर्धारित करता था, जबकि 'सवार' पद उसके द्वारा रखे जाने वाले घोड़ों और घुड़सवार सैनिकों की संख्या को स्पष्ट करता था।
  2. 2. जहांगीर के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था के अंतर्गत 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' प्रणाली की शुरुआत की गई, जिसके माध्यम से मनसबदारों को अपने 'जात' पद को बढ़ाए बिना अधिक घुड़सवार सैनिक रखने की अनुमति दी गई।
  3. 3. शाहजहां के शासनकाल में स्थापत्य कला ने अपनी चरमोत्कर्ष अवस्था को प्राप्त किया, और उसके द्वारा सिजदा और पाइबॉस जैसी फारसी दरबारी परंपराओं को पुनः अनिवार्य कर दिया गया, जिन्हें अकबर ने समाप्त कर दिया था।
  4. 4. औरंगजेब ने अपने शासनकाल में संगीत और चित्रकला को शाही दरबार से पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया, तथा उसने हिन्दू मंदिरों के निर्माण और उनके जीर्णोद्धार पर रोक लगाने के साथ-साथ जजिया कर को पुनः लागू कर दिया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

मुगल साम्राज्य के प्रशासनिक विकास में मनसबदारी व्यवस्था का विशिष्ट स्थान था। कथन 1 सही है क्योंकि 'जात' से मनसबदार के पद और वेतन का तथा 'सवार' से उसके घुड़सवार सैनिकों की संख्या का बोध होता था। कथन 2 सही है, 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' प्रणाली को जहाँगीर द्वारा शुरू किया गया था जिसके तहत चुनिंदा मनसबदारों को बिना जात पद बढ़ाए अधिक सवार रखने की छूट थी। कथन 3 गलत है क्योंकि सिजदा और पाइबॉस जैसी परंपराओं को शाहजहां ने नहीं बल्कि औरंगजेब ने अपनी कट्टर धार्मिक नीतियों के तहत समाप्त कर दिया था या अकबर ने पहले ही प्रतिबंधित किया था; शाहजहां ने इन पर पूर्ण रोक लगाई थी। कथन 4 सही है, औरंगजेब ने संगीत, चित्रकला, झरोखा दर्शन तथा जजिया कर की पुनर्वापसी जैसी कठोर नीतियां अपनाई थीं। इस महान राजवंश के विस्तृत इतिहास के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

मध्यकालीन भारत के इतिहास में भक्ति और सूफी आंदोलन के दार्शनिक स्वरूप, उनके प्रमुख संतों तथा उनकी विचारधाराओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. शंकराचार्य द्वारा प्रतिपादित 'अद्वैत वेदांत' के अनुसार ब्रह्म ही एकमात्र सत्य (परम सत्य) है और जगत एक 'माया' (भ्रम) है, जबकि इसके विपरीत रामानुजचार्य ने 'विशिष्टाद्वैत' का सिद्धांत दिया जिसके अंतर्गत जीवात्मा और जगत ब्रह्म का ही विशिष्ट अंश हैं। 2. सूफी सिलसिले (सिलसिला) मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित थे: 'बा-शरा' (जो इस्लामिक कानून यानी शरिया के नियमों का सख्ती से पालन करते थे, जैसे चिश्ती और सुहरावर्दी) और 'बे-शरा' (जो शरिया के पारंपरिक बंधनों से पूरी तरह मुक्त होकर जीवन बिताते थे, जैसे कलंदरी और मदारिया)। 3. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाने वाले रामानंद ने जातिगत भेदभाव और ऊँच-नीच की पारंपरिक रूढ़ियों का कड़ा विरोध किया तथा उनके शिष्यों में संत कबीर (जुलाहा), रैदास (मोची), सेना (नाई) और पीपा (राजपूत शासक) जैसे विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधि शामिल थे। 4. चिश्ती सिलसिले के महान संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के प्रमुख शिष्य निजामुद्दीन औलिया थे, जिनके दरबार में सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी से लेकर मुहम्मद बिन तुगलक तक कई सुल्तानों ने व्यक्तिगत रूप से भेंट की थी, किंतु औलिया ने कभी भी किसी भी शासक से राजकीय अनुदान या वित्तीय सहायता स्वीकार नहीं की। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 1857 के विद्रोह के पास न तो कोई केंद्रीय संगठन और अखिल भारतीय दृष्टिकोण था और न ही कोई सुसंगत भविष्य का राजनीतिक, आर्थिक या सामाजिक एजेंडा था, जिसके कारण विभिन्न क्षेत्रों के नेताओं ने केवल अपने स्थानीय हितों और अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी। 2. ब्रिटिश सेना के पास आधुनिक संचार साधनों (जैसे टेलीग्राफ), उन्नत हथियार प्रणालियों और प्रशिक्षित सैन्य कमांडरों की एक संगठित श्रृंखला थी, जबकि विद्रोहियों के पास नेतृत्व में एकता, सैन्य अनुशासन और रणनीतिक समन्वय का पूर्ण अभाव था। 3. भारत के अधिकांश बड़े शासकों, रियासतों और पश्चिमी शिक्षा प्राप्त मध्यम वर्ग ने इस विद्रोह का सक्रिय रूप से समर्थन किया था और इसे विदेशी शासन से मुक्ति का एकमात्र साधन माना था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान दिल्ली में सत्ता के वास्तविक स्वरूप और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मेरठ के सिपाहियों द्वारा दिल्ली पर अधिकार करने के बाद मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को अनिच्छा के बावजूद भारत का 'शहंशाह-ए-हिंदुस्तान' घोषित किया गया था, और उन्होंने इस विप्लव को वैधानिकता प्रदान करने में प्रतीकात्मक रूप से केंद्रीय भूमिका निभाई। 2. दिल्ली में विद्रोहियों का दैनिक सैन्य और प्रशासनिक नियंत्रण एक 'कोर्ट ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर्स' (Court of Administrators) के हाथों में था, जिसमें मुख्य रूप से सैनिक और नागरिक प्रतिनिधि शामिल थे, तथा सम्राट जफर इस संस्था के निर्णयों को अपनी इच्छा से पलटने की असीमित शक्ति रखते थे। 3. दिल्ली में अंग्रेजी सेना के पुनरधिकार अभियान के दौरान ब्रिटिश सेना का नेतृत्व करने वाले जनरल जॉन निकलसन कश्मीरी गेट पर संघर्ष के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसके परिणामस्वरूप अंततः उनकी मृत्यु हो गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? प्राचीन भारतीय इतिहास में बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों और उनकी मान्यताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जहाँ जैन धर्म आत्मा के अस्तित्व में पूर्ण विश्वास करता है और मोक्ष प्राप्ति के लिए कायाकल्‍प तथा संथारा (या संलेखना) जैसी कठोर तपस्या व शरीर के अंत पर बल देता है, वहीं बौद्ध धर्म 'अनात्मवाद' के सिद्धांत का प्रतिपादन करता है अर्थात् वह स्थिर आत्मा या जीव के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता है। 2. जैन धर्म के 'स्यादवाद' (अनेकांतवाद) के सिद्धांत के अनुसार सभी वस्तुमों के अनेक धर्म होते हैं और ज्ञान की सापेक्षता को स्वीकार करते हुए किसी भी सत्य को पूर्ण रूप से एक ही दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता, जबकि बुद्ध ने चरम तपस्या और भोग-विलासिता दोनों का त्याग कर 'मध्यम मार्ग' (मज्झिम पतिपदा) का उपदेश दिया। 3. जैन संघ के विपरीत, बौद्ध संघ में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति प्रारंभ से ही उनके प्रथम उपदेश के समय से ही सुलभ थी, और बुद्ध की माता महाप्रजापति गौतमी बौद्ध संघ में प्रविष्ट होने वाली प्रथम भिक्षुणी थीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की परिपक्व अवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित नगरों और उनके विशिष्ट पुरातात्विक साक्ष्यों या विशेषताओं पर विचार कीजिए: 1. चान्हूदड़ो — यह एकमात्र ऐसा हड़प्पाकालीन स्थल था जहाँ किसी भी प्रकार का कोई दुर्ग (Citadel) नहीं पाया गया है, और यहाँ मनके बनाने के कारखाने (Bead-making factory) के साथ-साथ वक्रাকার ईंटों के साक्ष्य भी मिले हैं। 2. लोथल — यहाँ से गोदीबाड़ा (Dockyard) के अवशेष मिले हैं, जो यह प्रमाणित करता है कि यह एक प्रमुख बंदरगाह और व्यापारिक केंद्र था, तथा यहाँ से चावल और बाजरे के साक्ष्य के साथ-साथ युगल शवाधान (Double burial) के भी प्रमाण प्राप्त हुए हैं। 3. कालीबंगा — इस स्थल के निचले शहर और दुर्ग दोनों क्षेत्रों को एक ही सामान्य रक्षाप्राचीर से घेरा गया था, और यहाँ से जुते हुए खेत के साक्ष्य तथा भूकंप के प्राचीनतम प्रमाण भी प्राप्त हुए हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.