BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
9 views

सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की परिपक्व अवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित नगरों और उनके विशिष्ट पुरातात्विक साक्ष्यों या विशेषताओं पर विचार कीजिए:

  1. 1. चान्हूदड़ो — यह एकमात्र ऐसा हड़प्पाकालीन स्थल था जहाँ किसी भी प्रकार का कोई दुर्ग (Citadel) नहीं पाया गया है, और यहाँ मनके बनाने के कारखाने (Bead-making factory) के साथ-साथ वक्रাকার ईंटों के साक्ष्य भी मिले हैं।
  2. 2. लोथल — यहाँ से गोदीबाड़ा (Dockyard) के अवशेष मिले हैं, जो यह प्रमाणित करता है कि यह एक प्रमुख बंदरगाह और व्यापारिक केंद्र था, तथा यहाँ से चावल और बाजरे के साक्ष्य के साथ-साथ युगल शवाधान (Double burial) के भी प्रमाण प्राप्त हुए हैं।
  3. 3. कालीबंगा — इस स्थल के निचले शहर और दुर्ग दोनों क्षेत्रों को एक ही सामान्य रक्षाप्राचीर से घेरा गया था, और यहाँ से जुते हुए खेत के साक्ष्य तथा भूकंप के प्राचीनतम प्रमाण भी प्राप्त हुए हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए कथनों में से कथन 1 और 2 सही हैं, किंतु कथन 3 आंशिक रूप से असत्य है। सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़े विस्तृत अध्ययन के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है। चान्हूदड़ो एकमात्र ऐसा हड़प्पाकालीन नगर था जो बिना दुर्ग के था और यहाँ मनके बनाने के कारखाने व वक्रাকার ईंटें मिलीं। लोथल में गोदीबाड़ा (Dockyard), चावल के साक्ष्य और युगल शवाधान के प्रमाण मिले हैं। जहाँ तक कालीबंगा का प्रश्न है, यहाँ निचले शहर और दुर्ग को अलग-अलग प्राचीर से घेरा गया था, न कि एक ही सामान्य रक्षाप्राचीर से, जबकि जुते हुए खेत और भूकंप के साक्ष्य यहाँ से वास्तव में प्राप्त हुए हैं।
Share:

Related Questions

वर्ष 1857 के विद्रोह के विभिन्न कारणों (राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रिटिश भू-राजस्व नीतियों और अत्यधिक कर की दरों के कारण ग्रामीण किसान तबाह हुए, वहीं अंग्रेजों की मुक्त व्यापार नीति (Free Trade Policy) के परिणामस्वरूप भारतीय हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों का तेजी से पतन हुआ, जिससे कारीगर वर्ग में तीव्र आर्थिक असंतोष उत्पन्न हुआ। 2. लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झांसी के साथ-साथ कुशासन के आधार पर अवध रियासत का भी ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर दिया गया, जिससे अवध के सैनिकों और जनता में गहरी राजनीतिक नाराजगी फैली। 3. वर्ष 1850 में पारित 'धार्मिक अयोग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) द्वारा हिंदू धर्म से ईसाई धर्म में परिवर्तित होने वाले व्यक्ति को उसके पैतृक संपत्ति के अधिकारों से वंचित कर दिया गया, जिसे रूढ़िवादी भारतीयों ने ईसाई मिशनरियों के प्रभाव में उठाया गया कदम माना। 4. लॉर्ड कैनिंग के कार्यकाल में वर्ष 1856 में पारित 'सामान्य सेना सेवा भर्ती अधिनियम' (General Service Enlistment Act) के तहत यह अनिवार्य कर दिया गया कि बंगाल सेना के नए रंगरूटों को आवश्यकता पड़ने पर समुद्र पार (विदेशों में) भी सेवा देने जाना होगा, जिसे उच्च वर्ण के सैनिकों ने अपनी धार्मिक मान्यताओं के पूर्णतः विरुद्ध माना। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारतीय स्वतंत्रता, माउंटबेटन योजना और देश के विभाजन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. माउंटबेटन योजना (3 जून 1947 योजना) के तहत ब्रिटिश भारत के विभाजन का प्रस्ताव रखा गया था, जिसके अंतर्गत बंगाल और पंजाब की प्रांतीय विधानसभाओं की बैठकों में यह निर्णय लिया जाना था कि क्या इन प्रांतों का विभाजन किया जाए या नहीं। 2. ब्रिटिश संसद में प्रस्तुत 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947' (Indian Independence Act 1947) के प्रावधानों के अनुसार 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियन (Dominions) की स्थापना की गई, जिन्हें ब्रिटिश राष्ट्रमंडल से अलग होने का पूर्ण अधिकार दिया गया था। 3. पंजाब और बंगाल में सीमाओं के निर्धारण के लिए सर सिरिल रेडक्लिफ की अध्यक्षता में दो अलग-अलग सीमा आयोगों (Boundary Commissions) का गठन किया गया था, जिन्होंने स्वतंत्रता प्राप्ति के ठीक पूर्व अपनी अंतिम सीमा रेखा की रिपोर्ट प्रकाशित कर दी थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों और उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जैन धर्म के 'स्यादवाद' (अनेकांतवाद) के सिद्धांत के अनुसार, प्रत्येक वस्तु के अनेक धर्म होते हैं और ज्ञान की सापेक्षता के कारण किसी भी सत्य को पूर्ण रूप से एक ही दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता, जबकि बौद्ध धर्म के 'प्रतीतसमुत्पाद' का सिद्धांत सभी घटनाओं के कारण-और-प्रभाव (हेतु-प्रत्यय) पर आधारित होने की बात करता है। 2. बौद्ध धर्म ने वेदों की प्रामाणिकता और ईश्वर के अस्तित्व को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया, किंतु यज्ञों में होने वाली पशु-हिंसा और वर्ण व्यवस्था के कठोर नियमों का खंडन करते हुए 'मध्यम मार्ग' (अतार्गिक तपस्या और भोगविलास के बीच) का उपदेश दिया। 3. जैन धर्म में संलेखना (सल्लेखना) या संथारा पद्धति द्वारा स्वेच्छा से प्राण त्यागने के विधान को मान्यता दी गई है, जिसके तहत चंद्रगुप्त मौर्य ने भी श्रवणबेलगोला में अपने जीवन का अंत किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका तथा उनके सैन्य संघर्षों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बृजकीिसर (बिरजीस कादिर) को नवाब घोषित कर किया था और ब्रिटिश रेजीडेंसी की घेराबंदी के दौरान उन्होंने अवध की जनता तथा तालुकेदारों को अंग्रेजों के विरुद्ध एकजुट किया था। 2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता था, ने फैजाबाद और अवध क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध का नेतृत्व किया तथा चिनहट के युद्ध (जुलाई 1857) में हेनरी लॉरेंस के नेतृत्व वाली ब्रिटिश सेना को करारी शिकस्त दी थी। 3. बेगम हजरत महल ने अंततः ब्रिटिश सेनापति सर कोलिन कैंपबेल के समक्ष लखनऊ में आत्मसमर्पण कर दिया था और उन्हें ब्रिटिश सरकार द्वारा पेंशन देकर कानपुर में रहने की अनुमति दे दी गई थी। 4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह को अंग्रेजों द्वारा पकड़ने के लिए पचास हजार रुपये का भारी इनाम घोषित किया गया था, और अंत में पवना के राजा के साथ विश्वासघात के कारण उनकी हत्या कर दी गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों—स्थाई बंदोबस्त (Permanent Settlement), रयतवारी व्यवस्था (Ryotwari System) और महालवारी व्यवस्था (Mahalwari System)—के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा 1793 में लागू किए गए 'स्थाई बंदोबस्त' के तहत जमींदारों को भूमि का स्थायी स्वामी मान लिया गया, जिन्हें सरकार को एक निश्चित भू-राजस्व का 10/11वां हिस्सा देना होता था, जबकि शेष 1/11वां हिस्सा उनके प्रशासनिक और व्यक्तिगत खर्च के रूप में उनके पास रहता था। 2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी में विकसित 'रयतवारी व्यवस्था' में सरकार और कृषक (रयत) के बीच सीधा अनुबंध होता था, जिसमें किसानों को भू-स्वामी बनाया गया और अकाल या फसल नष्ट होने की स्थिति में भी लगान माफी का कोई स्थायी कानूनी प्रावधान नहीं था। 3. हॉल्ट मैकेंज़ी और विलियम बेंटिंक के काल में उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू 'महालवारी व्यवस्था' के अंतर्गत भू-राजस्व का निर्धारण व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक कृषक के साथ न करके संपूर्ण ग्राम या महाल के आधार पर किया जाता था, जिसमें गाँव का मुखिया या लंबरदार राजस्व एकत्र करने के लिए उत्तरदायी होता था। 4. तीनों ही भू-राजस्व प्रणालियों में ब्रिटिश सरकार द्वारा कृषि के आधुनिकीकरण, वैज्ञानिक सिंचाई पद्धतियों और उन्नत बीजों के प्रयोग के लिए भारी वित्तीय निवेश किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय कृषि का व्यावसायिकरण तेजी से हुआ और किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.