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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 1857 के विद्रोह के पास न तो कोई केंद्रीय संगठन और अखिल भारतीय दृष्टिकोण था और न ही कोई सुसंगत भविष्य का राजनीतिक, आर्थिक या सामाजिक एजेंडा था, जिसके कारण विभिन्न क्षेत्रों के नेताओं ने केवल अपने स्थानीय हितों और अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी।
- 2. ब्रिटिश सेना के पास आधुनिक संचार साधनों (जैसे टेलीग्राफ), उन्नत हथियार प्रणालियों और प्रशिक्षित सैन्य कमांडरों की एक संगठित श्रृंखला थी, जबकि विद्रोहियों के पास नेतृत्व में एकता, सैन्य अनुशासन और रणनीतिक समन्वय का पूर्ण अभाव था।
- 3. भारत के अधिकांश बड़े शासकों, रियासतों और पश्चिमी शिक्षा प्राप्त मध्यम वर्ग ने इस विद्रोह का सक्रिय रूप से समर्थन किया था और इसे विदेशी शासन से मुक्ति का एकमात्र साधन माना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 का विद्रोह ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध एक बड़ा जन-विद्रोह था, किंतु संगठन, नेतृत्व और दूरदर्शिता की कमी के कारण यह असफल हो गया। इस विद्रोह के पास कोई केंद्रीय राजनीतिक प्राधिकरण या भविष्य की योजनाओं का स्पष्ट दृष्टिकोण नहीं था। इसके अलावा, भारत के अधिकांश बड़े रियासतों के शासकों (जैसे सिंधिया, होलकर, हैदराबाद के निजाम और पटियाला के राजा) तथा उभरते हुए पश्चिमी शिक्षित मध्यम वर्ग ने ब्रिटिश शासन का साथ दिया और विद्रोहियों से दूरी बनाए रखी। 1857 के विद्रोह की असफलता के विभिन्न कारणों और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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मुगल प्रशासन में आय-व्यय की जांच करने वाले "लेखा परीक्षक" (Auditor) को क्या कहा जाता था?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रारंभिक राजनीतिक कार्यप्रणाली और नरम दल-गरम दल काल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कांग्रेस के प्रारंभिक उदारवादी (नरम दल) नेताओं ने 'प्रार्थना, याचिका और विरोध' (Prayer, Petition and Protest) की पद्धति को अपनाया तथा उनका मुख्य विश्वास ब्रिटिश न्यायप्रियता और क्रमिक संवैधानिक सुधारों में था, जिसके तहत उन्होंने भारत में पहली बार 'धन की निकासी' (Drain of Wealth) के सिद्धांत का विधिवत आर्थिक विश्लेषण प्रस्तुत किया।
2. वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के पश्चात उत्पन्न उग्रवादी (गरम दल) आंदोलन का नेतृत्व करने वाले प्रमुख नेताओं—बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल और अरविंद घोष—ने ब्रिटिश शासन के समक्ष केवल प्रशासनिक सुधारों की भीख मांगने के बजाय 'स्वराज' को अपना मुख्य लक्ष्य घोषित किया।
3. वर्ष 1907 के ऐतिहासिक सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर नरमपंथियों और उग्रवादियों के बीच उत्पन्न वैचारिक एवं संगठनात्मक मतभेदों के परिणामस्वरूप कांग्रेस का विभाजन हुआ, जिसमें गरम दल के नेता रास बिहारी घोष को कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया और नरमपंथियों ने संगठन पर अपना नियंत्रण बनाए रखा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारण और बैरकपुर छावनी में हुई घटना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जनवरी 1857 में कलकत्ता के पास डमडम शस्त्रागार में नए 'एनफील्ड राइफल' और उसमें प्रयुक्त होने वाले कारतूसों के संबंध में यह अफवाह फैली कि इन कारतूसों के आवरण में गाय और सूअर की चर्बी का प्रयोग किया गया है, जिसे लोड करने से पहले दांतों से काटना पड़ता था।
2. बैरकपुर छावनी (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरोध में अपने वरिष्ठ अधिकारियों (लेफ्टिनेंट बॉब और सार्जेंट ह्यूसन) पर आक्रमण कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फाँसी दे दी गई।
3. मंगल पांडे की फाँसी के उपरांत बैरकपुर छावनी की 34वीं और 19वीं एनफैंट्री को तुरंत सम्मानित किया गया और ब्रिटिश सरकार ने सेना में नई राइफलों के प्रयोग को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया ताकि सैनिकों का असंतोष शांत किया जा सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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मुगल काल में "अहदी" (Ahadi) सैनिक किन्हें कहा जाता था?
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दिल्ली में 1857 के विद्रोह के नेतृत्व और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यद्यपि विद्रोही सिपाहियों ने बहादुर शाह जफर को भारत का सम्राट (शहंशाह-ए-हिंदुस्तान) घोषित कर दिया था, किंतु जफर की इच्छा के विरुद्ध उन्हें यह नेतृत्व स्वीकार करने के लिए विवश किया गया था और उनकी भूमिका मुख्य रूप से एक प्रतीकात्मक एवं अनिच्छुक केंद्रबिंदु की थी।
2. दिल्ली में विद्रोहियों की वास्तविक सैन्य कमान जनरल बख्त खान के हाथों में थी, जो बरेली से आने वाली विद्रोही सेना का नेतृत्व कर रहे थे और जिन्हें जफर द्वारा 'साहिब-ए-आलम बहादुर' की उपाधि प्रदान की गई थी।
3. दिल्ली पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के लिए ब्रिटिश सेना ने सितंबर 1857 में कश्मीरी गेट पर भीषण आक्रमण किया, जिसमें ब्रिटिश अधिकारी जॉन निकलसन गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उनकी मृत्यु हो गई।
4. हुमायूं के मकबरे से ब्रिटिश अधिकारी विलियम हडसन द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद बहादुर शाह जफर पर दिल्ली के लाल किले में मुकदमा चलाया गया और उन्हें निर्वासित कर रंगून भेज दिया गया, जहाँ उनकी मृत्यु हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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