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General Science
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प्रकाश का परावर्तन नियम?

Detailed Explanation

आपतन = परावर्तन कोण।
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र, रुधिर समूहों और प्लाज्मा प्रोटीन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. रक्त प्लाज्मा में उपस्थित 'एल्ब्यूमिन' (Albumin) प्रोटीन यकृत द्वारा संश्लेषित होता है और यह रक्त का परासरणी दाब (Osmotic pressure) बनाए रखने में मुख्य भूमिका निभाता है, जबकि 'फाइब्रिनोजेन' रक्त स्कंदन में सहायक होता है। 2. 'बॉम्बे रक्त समूह' (Bombay Blood Group या $O_h$) सबसे पहले 1952 में मुंबई में खोजा गया था, जिसकी लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर 'H' एंटीजन का पूर्ण अभाव होता है, और इस रक्त समूह वाले व्यक्ति को केवल इसी समूह का रक्त चढ़ाया जा सकता है। 3. 'एरिथ्रोब्लास्टोसिस फेटalis' (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति केवल तब उत्पन्न होती है जब Rh-धनात्मक माता और Rh-ऋणात्मक पिता का गर्भधारण होता है, जिससे दूसरी गर्भावस्था के दौरान भ्रूण की लाल रक्त कोशिकाओं का मोठ्या पैमाने पर विनाश होता है। 4. मानव शरीर में लिंफ (लसिका) एक रंगहीन द्रव है जिसमें लाल रक्त कोशिकाएँ और रक्त प्लेटलेट्स अनुपस्थित होते हैं, किंतु इसमें श्वेत रक्त कोशिकाएँ (मुख्यतः लिंफोसाइट्स) प्रचुर मात्रा में पाई जाती हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए उत्तरदायी हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? शुक्र ग्रह? आकाश नीला? मानव शरीर में होने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों, उनके संचरण के माध्यम और उनके उपचार या प्रतिरक्षात्मक तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'क्षय रोग' (Tuberculosis) माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु के कारण होता है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है, और इसके उपचार के लिए दी जाने वाली 'डॉट्स्' (DOTS) प्रणाली में रिफैम्पिसिन और आइसोनियाज़िड जैसी एंटीबायोटिक्स का उपयोग किया जाता है। 2. 'रेबीज' (Rabies) एक विषाणुजनित घातक बीमारी है जो मुख्य रूप से लाइساवाइरस (Lyssavirus) के संक्रमण से होती है, और यह रोग संक्रमित जानवरों (विशेषकर कुत्तों) की लार से मानव तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है जिसके लिए पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) प्रभावी होती है। 3. 'एड्स' (AIDS) उत्पन्न करने वाला एचआईवी (HIV) एक रेट्रोवायरस है जो शरीर की CD4+ T-लिम्फोसाइट कोशिकाओं पर आक्रमण कर प्रतिरक्षा तंत्र को पूरी तरह नष्ट कर देता है, और इसके निदान के लिए 'एलिसा' (ELISA) परीक्षण प्राथमिक संपुष्टि (Confirmatory test) के रूप में किया जाता है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? रासायनिक बंधन, समस्थानिक प्रभाव और अम्ल-क्षार साम्यावस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी अम्ल की प्रबलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसका संयुग्मी क्षार कितना स्थायी है; अतः यदि किसी अम्ल के वियोजन में जुड़े बंध के निर्माण में शामिल परमाणुओं के आकार में वृद्धि होती है या विद्युत ऋणात्मकता अधिक होती है, तो बंध की लंबाई और उसकी वियोजन ऊर्जा में परिवर्तन के कारण अम्ल की सामर्थ्य बढ़ जाती है। 2. भारी हाइड्रोजन (ड्यूटीरियम, D) युक्त अम्लों (जैसे DCl) का आबंध वियोजन समस्थानिक प्रभाव (Isotope Effect) के कारण सामान्य हाइड्रोजन अम्ल (HCl) की तुलना में अधिक होता है, जिसके परिणामस्वरूप ड्यूटीरियम युक्त अम्ल जलीय विलयन में अधिक तीव्रता से और पूर्ण रूप से वियोजित होते हैं। 3. 'कठिन-मृदु अम्ल-क्षार' (HSAB) सिद्धांत के अनुसार, एक कठोर अम्ल (Hard Acid) छोटे आकार, उच्च धनात्मक आवेश घनत्व और कम ध्रुवणीयता वाले धनायनों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है, जो प्राथमिकता से कठोर क्षारों (Hard Bases) के साथ मजबूत और स्थिर आयनिक या उपसहसंयोजक बंध बनाते हैं। 4. बहुप्रोटिक अम्लों (जैसे ऑर्थोफॉस्फोरिक अम्ल, $H_3PO_4$) के क्रमिक वियोजन स्थिरांकों ($K_{a1}, K_{a2}, K_{a3}$) का मान उत्तरोत्तर घटता जाता है, जिसका मुख्य कारण यह है कि ऋणावेशित आयन से धनात्मक प्रोटॉन को अलग करना अधिक कठिन हो जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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