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General Science
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कोशिका?

Detailed Explanation

इकाई।
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भौतिक राशियों और उनके मापन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पार्सैक (Parsec) खगोलीय दूरियों को मापने की सबसे बड़ी व्यावहारिक इकाई है, जो कि एक आकाशीय पिंड द्वारा पृथ्वी की कक्षा की औसत त्रिज्या (1 खगोलीय इकाई) पर अंतरित 1 आर्कसेकंड का कोण बनाती है, और यह लगभग 3.26 प्रकाश वर्ष के बराबर होती है। 2. 'एम्पीयर' को विद्युत धारा के मात्रक के रूप में परिभाषित करते समय निर्वात में दो सीधे, अनंत लंबाई के और नगण्य अनुप्रस्थ काट वाले चालकों के बीच प्रति मीटर लंबाई पर लगने वाले चुंबकीय बल का मान $2 \times 10^{-7}$ न्यूटन निर्धारित किया गया है। 3. 'कैंडेला' दीप्त तीव्रता का एसआई मात्रक है, जिसे किसी निश्चित दिशा में 540 $\times$ $10^{12}$ हर्ट्ज़ आवृत्ति वाले एकवर्णी प्रकाश के स्रोत द्वारा उत्सर्जित दीप्त तीव्रता के आधार पर परिभाषित किया जाता है जिसकी विकिरण तीव्रता उस दिशा में $\frac{1}{683}$ वाट प्रति स्टेरडियन होती है। 4. समतलीय कोण का मात्रक 'रेडियन' और ठोस कोण का मात्रक 'स्टेरडियन' दोनों ही एसआई प्रणाली में व्युत्पन्न राशियाँ (Derived quantities) और व्युत्पन्न मात्रक माने जाते हैं, जिनका कोई विमीय सूत्र नहीं होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? नाभिकीय भौतिकरी और रेडियोएक्टिवता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) के दौरान किसी भारी नाभिक का दो या दो से अधिक मध्यम आकार के नाभिकों में टूटना द्रव्यमान क्षति (Mass defect) पर आधारित है, जहाँ आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता समीकरण $E = mc^2$ के अनुसार मुक्त हुई ऊर्जा नाभिकीय बंधन ऊर्जा (Binding energy per nucleon) में वृद्धि के कारण होती है। 2. सूर्य और अन्य तारों पर ऊर्जा का मुख्य स्रोत 'नाभिकीय संलयन' (Nuclear Fusion) है, जिसमें अत्यधिक उच्च ताप और दाब पर हल्के हाइड्रोजन नाभिक मिलकर हीलियम नाभिक का निर्माण करते हैं, और यह प्रक्रिया केवल अनियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया के रूप में ही संभव है। 3. रेडियोएक्टिव क्षय के दौरान उत्सर्जित होने वाली 'गामा किरणें' वास्तव में उच्च आवृत्ति की विद्युत चुंबकीय तरंगें होती हैं, जो नाभिक के ऊर्जा स्तरों में संक्रमण के कारण उत्पन्न होती हैं और इनके उत्सर्जन से न तो परमाणु क्रमांक बदलता है और न ही द्रव्यमान संख्या। 4. किसी रेडियोएक्टिव पदार्थ की अर्ध-आयु (Half-life) उसके प्रारंभिक द्रव्यमान और उस पर बाहरी दाब या तापमान की परिस्थितियों पर निर्भर करती है, जबकि उसका क्षय नियतांक (Decay constant) केवल उस विशिष्ट आइसोटोप की आंतरिक प्रकृति पर निर्भर करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? प्रकाशिकी (Optics) के अंतर्गत गोलीय दर्पणों और लेंसों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी अवतल दर्पण (Concave mirror) के सामने जब वस्तु को उसके वक्रता केंद्र (Centre of curvature) और फोकस (Focus) के बीच रखा जाता है, तो बनने वाला प्रतिबिंब वास्तविक, उल्टा और वस्तु से आकार में बड़ा होता है। 2. उत्तल लेंस (Convex lens) की क्षमता धनात्मक होती है, और जब इस लेंस को किसी ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की फोकस दूरी बढ़ जाती है और उसकी प्रकृति अभिसारी से बदलकर अपसारी (Diverging) हो जाती है। 3. लेंस निर्माता सूत्र (Lens maker's formula) के अनुसार, किसी पतले लेंस की फोकस दूरी लेंस के दोनों पृष्ठों की वक्रता त्रिज्याओं और लेंस के पदार्थ के सापेक्षिक अपवर्तनांक पर निर्भर करती है, तथा यह प्रकाश के रंग (तरंगदैर्ध्य) से पूर्णतः स्वतंत्र होती है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों की जैव-रासायनिक और प्रतिरक्षात्मक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) की सतह पर पाए जाने वाले ABO रक्त समूह प्रतिजन (Antigens) लिपिड और प्रोटीन रीढ़ की हड्डी से जुड़े कार्बोहाइड्रेट श्रृंखलाओं (Oligosaccharides) के रूप में होते हैं, जिनका संश्लेषण ग्लाइकोसिलट्रांसफेरेज एंजाइमों द्वारा होता है, न कि सीधे 'ABO' जीन द्वारा कूटबद्ध पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाओं से। 2. 'बॉम्बे फिनोटाइप' ($O_h$) से ग्रसित व्यक्तियों में H-एंटीजन का पूर्णतः अभाव होता है क्योंकि उनमें FUT1 जीन उत्परिवर्तित होता है, जिसके कारण उनके प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B के साथ-साथ एक विशेष 'एंटी-H' एंटीबॉडी भी उपस्थित होती है, जो उन्हें किसी भी सामान्य ABO रक्त समूह से रक्त लेने से रोकती है। 3. Rh-असंगतता (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति में, यदि एक Rh-ऋणात्मक माता और Rh-धनात्मक पिता की संतान Rh-धनात्मक होती है, तो प्रथम गर्भधारण के दौरान माँ के शरीर में बनी IgG प्रकार की एंटी-Rh एंटीबॉडी प्लेसेंटा को पार कर सकती हैं और प्रथम शिशु को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। 4. रुधिर स्कंदन (Blood Coagulation) की बाह्य प्रणाली (Extrinsic pathway) की शुरुआत रक्त वाहिका की क्षति के बाद ऊतक कारक (Tissue Factor या Factor III) के मुक्त होने और प्लाज्मा में उपस्थित फैक्टर VII के साथ मिलकर उसके सक्रिय होने से होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मानव शरीर में जैविक अणुओं, पोषण और विटामिनों की चयापचय क्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. विटामिन B$_{12}$ (सायनोकोबलामिन) एकमात्र ऐसा जल-विघटनीय विटामिन है जो यकृत (Liver) में कई वर्षों तक संचित रह सकता है, और इसके अवशोषण के लिए आमाशय की पैराइटल कोशिकाओं द्वारा स्रावित 'कैसल का आंतरिक कारक' (Castle's intrinsic factor) अनिवार्य होता है। 2. 'क्वाशियोकोर' (Kwashiorkor) रोग गंभीर प्रोटीन की कमी के कारण होता है जिसमें ऊर्जा की कमी प्रमुख नहीं होती, जबकि 'मरास्मस' (Marasmus) प्रोटीन और कुल कैलोरी दोनों की गंभीर कमी से उत्पन्न होने वाला विकार है जो आमतौर पर शिशुओं में देखा जाता है। 3. जल-में-घुलनशील विटामिन (जैसे विटामिन C और B समूह के विटामिन) शरीर में आसानी से संग्रहित हो जाते हैं, जिसके कारण इनकी दैनिक आवश्यकता नहीं होती और इनके अत्यधिक सेवन से 'हाइपरविटामिनोसिस' की स्थिति उत्पन्न होती है। 4. हमारे शरीर में 'आवश्यक वसीय अम्ल' (Essential fatty acids), जैसे लिनोलिक और लिनोलेनिक अम्ल, का संश्लेषण स्वतः नहीं हो सकता है, इसलिए इन्हें आहार के माध्यम से प्राप्त करना आवश्यक होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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