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General Science
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नाभिकीय भौतिकरी और रेडियोएक्टिवता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) के दौरान किसी भारी नाभिक का दो या दो से अधिक मध्यम आकार के नाभिकों में टूटना द्रव्यमान क्षति (Mass defect) पर आधारित है, जहाँ आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता समीकरण $E = mc^2$ के अनुसार मुक्त हुई ऊर्जा नाभिकीय बंधन ऊर्जा (Binding energy per nucleon) में वृद्धि के कारण होती है।
  2. 2. सूर्य और अन्य तारों पर ऊर्जा का मुख्य स्रोत 'नाभिकीय संलयन' (Nuclear Fusion) है, जिसमें अत्यधिक उच्च ताप और दाब पर हल्के हाइड्रोजन नाभिक मिलकर हीलियम नाभिक का निर्माण करते हैं, और यह प्रक्रिया केवल अनियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया के रूप में ही संभव है।
  3. 3. रेडियोएक्टिव क्षय के दौरान उत्सर्जित होने वाली 'गामा किरणें' वास्तव में उच्च आवृत्ति की विद्युत चुंबकीय तरंगें होती हैं, जो नाभिक के ऊर्जा स्तरों में संक्रमण के कारण उत्पन्न होती हैं और इनके उत्सर्जन से न तो परमाणु क्रमांक बदलता है और न ही द्रव्यमान संख्या।
  4. 4. किसी रेडियोएक्टिव पदार्थ की अर्ध-आयु (Half-life) उसके प्रारंभिक द्रव्यमान और उस पर बाहरी दाब या तापमान की परिस्थितियों पर निर्भर करती है, जबकि उसका क्षय नियतांक (Decay constant) केवल उस विशिष्ट आइसोटोप की आंतरिक प्रकृति पर निर्भर करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि नाभिकीय विखंडन में मुक्त होने वाली ऊर्जा इसलिए प्राप्त होती है क्योंकि भारी नाभिक की तुलना में विखंडित उत्पादों (मध्यम नाभिकों) की प्रति न्यूक्लियन बंधन ऊर्जा अधिक होती है, जिससे बंधन ऊर्जा में वृद्धि होती है न कि द्रव्यमान क्षति के कारण ऊर्जा बंधन ऊर्जा में बढ़ती है (बल्कि द्रव्यमान ऊर्जा में बदलता है)। कथन 2 असत्य है क्योंकि तारों में होने वाला नाभिकीय संलयन नियंत्रित रूप से प्राकृतिक रूप से निरंतर जारी रहता है, और हाइड्रोजन बम में यह अनियंत्रित होता है, जबकि सभी संलयन अभिक्रियाएँ अनियंत्रित नहीं होतीं। कथन 3 पूरी तरह सत्य है; गामा किरणें विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम का हिस्सा हैं जो नाभिकीय डी-एक्साइटेशन से निकलती हैं, और इनसे परमाणु क्रमांक ($Z$) तथा द्रव्यमान संख्या ($A$) अपरिवर्तित रहते हैं। कथन 4 असत्य है क्योंकि अर्ध-आयु पदार्थ के प्रारंभिक द्रव्यमान और बाहरी भौतिक कारकों (तापमान, दाब आदि) से पूर्णतः स्वतंत्र होती है; यह केवल क्षय नियतांक पर निर्भर करती है। विकिपीडिया संदर्भ
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