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General Science
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मानव शरीर में जैविक अणुओं, पोषण और विटामिनों की चयापचय क्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. विटामिन B$_{12}$ (सायनोकोबलामिन) एकमात्र ऐसा जल-विघटनीय विटामिन है जो यकृत (Liver) में कई वर्षों तक संचित रह सकता है, और इसके अवशोषण के लिए आमाशय की पैराइटल कोशिकाओं द्वारा स्रावित 'कैसल का आंतरिक कारक' (Castle's intrinsic factor) अनिवार्य होता है।
- 2. 'क्वाशियोकोर' (Kwashiorkor) रोग गंभीर प्रोटीन की कमी के कारण होता है जिसमें ऊर्जा की कमी प्रमुख नहीं होती, जबकि 'मरास्मस' (Marasmus) प्रोटीन और कुल कैलोरी दोनों की गंभीर कमी से उत्पन्न होने वाला विकार है जो आमतौर पर शिशुओं में देखा जाता है।
- 3. जल-में-घुलनशील विटामिन (जैसे विटामिन C और B समूह के विटामिन) शरीर में आसानी से संग्रहित हो जाते हैं, जिसके कारण इनकी दैनिक आवश्यकता नहीं होती और इनके अत्यधिक सेवन से 'हाइपरविटामिनोसिस' की स्थिति उत्पन्न होती है।
- 4. हमारे शरीर में 'आवश्यक वसीय अम्ल' (Essential fatty acids), जैसे लिनोलिक और लिनोलेनिक अम्ल, का संश्लेषण स्वतः नहीं हो सकता है, इसलिए इन्हें आहार के माध्यम से प्राप्त करना आवश्यक होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि विटामिन B$_{12}$ पानी में घुलनशील होने के बावजूद यकृत में संग्रहित हो सकता है और इसके अवशोषण हेतु कैसल का आंतरिक कारक आवश्यक है। कथन 2 सही है; क्वाशियोकोर केवल प्रोटीन की कमी से और मरास्मस प्रोटीन व कैलोरी दोनों की कमी से होता है। कथन 3 गलत है क्योंकि जल-में-घुलनशील विटामिन शरीर में संग्रहित नहीं होते, बल्कि मूत्र के माध्यम से उत्सर्जित हो जाते हैं, अतः इनकी नियमित आवश्यकता होती है (वसा-में-घुलनशील विटामिन जैसे विकिपीडिया संदर्भ शरीर में संचित होते हैं)। कथन 4 सही है क्योंकि आवश्यक वसीय अम्ल शरीर द्वारा संश्लेषित नहीं किए जा सकते। अतः सही विकल्प (a) है।
Related Questions
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न संक्रामक और गैर-संक्रामक रोगों, उनके सूक्ष्मजीवितीय कारकों तथा नैदानिक परीक्षणों (Diagnostic Tests) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. क्षय रोग (Tuberculosis) के निदान के लिए किया जाने वाला 'मोंटौक्स परीक्षण' (Mantoux test) एक प्रकार का त्वचा परीक्षण (Skin test) है जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस के विरुद्ध सेल-मीडिएटेड इम्युनिटी की उपस्थिति को दर्शाता है, किंतु यह सक्रिय संक्रमण और पूर्व टीकाकरण या पुरानी ठीक हो चुकी संक्रमण के बीच भेद करने में विफल रहता है।
2. एड्स (AIDS) के संपुष्टि (Confirmatory) परीक्षण के रूप में 'वेस्टर्न ब्लॉट' (Western blot) विधि का उपयोग किया जाता है, जिसमें वायरल प्रोटीन्स को जेल वैद्युतकणसंचलन (Gel electrophoresis) द्वारा अलग करके रोगी के सीरम में मौजूद विशिष्ट एंटीबॉडीज़ की पहचान की जाती है,
3. एन्टामोएबा हिस्टोलिटिका (Entamoeba histolytica) एक परजीवी प्रोटोजोआ है जो मनुष्य की बड़ी आंत में संक्रमण फैलाकर 'अमीबायसिस' या अमीबी पेचिश उत्पन्न करता है, और इसके गंभीर मामलों में यह आंतों की दीवार को भेदकर यकृत (Liver) में गंभीर फोड़ा (Liver abscess) भी बना सकता है।
4. टाइफाइड बुखार के परीक्षण के लिए प्रयुक्त 'विडाल परीक्षण' (Widal test) एक प्रतिजन-प्रतिपिंड (Antigen-Antibody) प्रतिक्रिया पर आधारित एग्लूटीनेशन परीक्षण है, जो 'साल्मोनेला टाइफी' के 'O' और 'H' एंटीजेंस का पता लगाता है, और संक्रमण के पहले सप्ताह में इसकी संवेदनशीलता शत-प्रतिशत सटीक होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भूमध्य रेखा पर दिन-रात की अवधि कैसी होती है?
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विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) के सिद्धांतों और उससे संबंधित नियमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी बंद परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस परिपथ से गुजरने वाले चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय दर के अनुक्रमानुपाती होता है।
2. 'लेंज का नियम' (Lenz's Law) ऊर्जा संरक्षण के नियम का एक प्रत्यक्ष परिणाम है, जिसके अनुसार प्रेरित विद्युत धारा या प्रेरित विद्युत वाहक बल की दिशा हमेशा उस कारण का विरोध करती है जिसके कारण वह स्वयं उत्पन्न होती है।
3. 'भंवर धाराएँ' (Eddy Currents) किसी चालक में तब उत्पन्न होती हैं जब उसे परिवर्तित चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, और इनका उपयोग प्रेरण भट्टी (Induction Furnace) में धातुओं को पिघलाने तथा विद्युत ब्रेक (Magnetic braking) प्रणालियों में प्रभावी रूप से किया जाता है।
4. स्वप्रेरकत्व (Self-inductance) किसी कुंडली का वह गुण है जो उसमें प्रवाहित होने वाली धारा के परिवर्तन का विरोध करता है, और इसका एसआई मात्रक 'हेनरी' ($Henry$) है जो कि $Weber/Ampere$ के तुल्य नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विलयन के अणुसंख्यक गुणों (Colligative properties) और उत्प्रेरण (Catalysis) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलयन के वाष्प दाब में होने वाला आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, जो राऊत के नियम से निर्धारित होता है।
2. परासरण दाब (Osmotic pressure) एक अणुसंख्यक गुण है, और वान 'ट हॉफ गुणांक ($i$) का मान उन पदार्थों के लिए एक से अधिक होता है जो जलीय विलयन में पूरी तरह से वियोजित (Dissociate) हो जाते हैं।
3. समांग उत्प्रेरण (Homogeneous catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक समान भौतिक अवस्था में होते हैं, जबकि विषमांग उत्प्रेरण में 'अधिध्रुवण' या ठोस उत्प्रेरक की सतह पर अभिकारकों का अधिशोषण (Adsorption) मुख्य भूमिका निभाता है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।
4. एन्जाइम उत्प्रेरण (Enzyme catalysis) अत्यधिक विशिष्ट और प्रभावी होते हैं, और इनकी उत्प्रेरणीय क्रिया का 'ताला-कुंजी मॉडल' (Lock and Key model) यह स्पष्ट करता है कि एन्जाइम का सक्रिय स्थल किसी विशिष्ट सबस्ट्रेट के साथ अनंतिम रूप से जुड़कर सक्रियण ऊर्जा को बढ़ा देता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्मों और उत्प्रेरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर उसके वाष्प दाब में होने वाला आपेक्षिक अवनमन (Relative Lowering of Vapour Pressure) विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह राउल्ट के नियम का सीधा परिणाम है।
2. वेंट-हॉफ कारक ($i$) का मान उन विलेय पदार्थों के लिए एक से अधिक होता है जो जलीय विलयन में पूर्ण रूप से संघनित (Association) हो जाते हैं, क्योंकि अणुओं के जुड़ने से कणों की कुल संख्या बढ़ जाती है।
3. उत्प्रेरक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy) को परिवर्तित करके अभिक्रिया के वेग को प्रभावित करते हैं, किंतु वे अग्र और पश्च अभिक्रियाओं के वेग को समान रूप से प्रभावित करते हैं जिससे साम्य स्थिरांक (Equilibrium Constant) का मान अपरिवर्तित रहता है।
4. जिओलाइट्स (Zeolites) त्रि-विमीय सिलिकेट नेटवर्क संरचना वाले सूक्ष्मछिद्रित उत्प्रेरक हैं जो 'आकार-वरण उत्प्रेरण' (Shape-selective Catalysis) प्रदर्शित करते हैं, क्योंकि इनकी उत्प्रेरकीय सक्रियता अभिकारकों और उत्पादों के अणुओं के आकार तथा छिद्रों के आकार पर निर्भर करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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