BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
8 views

मौर्योत्तर काल और गुप्त साम्राज्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मौर्योत्तर काल में सातवाहन राजवंश ने शीशे (Lead) के सिक्के बड़े पैमाने पर चलाए थे, तथा उनके अभिलेखों में मातृनाम (जैसे गौतमीपुत्र, वसिष्ठिपुत्र) जोड़े जाने की प्रथा से यह संकेत मिलता है कि उनका समाज पूर्णतः मातृसत्तात्मक था।
  2. 2. कुषाण शासक कनिष्ठ के शासनकाल में चतुर्थ बौद्ध संगीति का आयोजन कश्मीर के कुंडलवन में हुआ था, जिसमें बौद्ध धर्म स्पष्ट रूप से हिनयान और महायान संप्रदायों में विभाजित हो गया था और महायान शाखा को कुषाणों का राजकीय संरक्षण प्राप्त हुआ था।
  3. 3. गुप्त राजवंश के शासक समुद्रगुप्त को उसकी सैन्य विजयों के कारण इतिहासकार विंसेंट स्मिथ द्वारा 'भारत का नेपोलियन' कहा गया है, तथा उसकी इन विजयों का विस्तृत विवरण हरिषेण द्वारा रचित 'प्रयाग प्रशस्ति' (इलाहाबाद स्तंभ लेख) में संस्कृत भाषा और चम्पू शैली में मिलता है।
  4. 4. गुप्त काल में भूमि राजस्व की दर उपज का सामान्यतः 1/6 से 1/4 भाग हुआ करती थी, किंतु इस काल में व्यापारिक गतिविधियों में अभूतपूर्व वृद्धि होने के कारण तांबे के सिक्कों का सबसे बड़ा भंडार (निधि) जारी किया गया, जबकि सोने के सिक्के (दीनार) बहुत कम मात्रा में चलाए गए थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि सातवाहन राजवंश में राजाओं के नाम के आगे माता का नाम जोड़ने की प्रथा (जैसे गौतमीपुत्र सातकर्णि) जरूर थी, जो यह दर्शाती है कि राजपरिवार में महिलाओं को उच्च सम्मान प्राप्त था और वे शासन कार्यों में प्रभाव रखती थीं, परंतु सातवाहन समाज मूल रूप से 'पितृसत्तात्मक' (Patriarchal) ही था, मातृसत्तात्मक नहीं। कथन 2 सही है, कुषाण शासक कनिष्क के संरक्षण में कुंडलवन (कश्मीर) में चतुर्थ बौद्ध संगीति हुई थी, जहाँ बौद्ध धर्म स्पष्ट रूप से हिनयान और महायान में बँट गया। कथन 3 सही है, समुद्रगुप्त की दिग्विजयों का वर्णन उसके दरबारी कवि हरिषेण द्वारा रचित 'प्रयाग प्रशस्ति' में चम्पू शैली (गद्य-पद्य मिश्रित) में है, और विंसेंट स्मिथ ने उसे भारत का नेपोलियन कहा है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार गुप्त काल में सोने के सिक्के (दीनार) सबसे अधिक मात्रा में जारी किए गए थे, जबकि तांबे के सिक्के बहुत कम थे, इसलिए कथन 4 गलत है।
Share:

Related Questions

क्रांतिकारी आंदोलन के द्वितीय चरण और उससे जुड़े प्रमुख संगठनों तथा घटनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आज़ाद के नेतृत्व में 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) का नाम बदलकर 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) कर दिया गया, जिसमें समाजवाद को अपने मुख्य उद्देश्य के रूप में शामिल किया गया। 2. लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेने के लिए भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने दिसंबर 1928 में लाहौर में ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जे.पी. सॉंडर्स की हत्या कर दी थी, जिसमें चंद्रशेखर आज़ाद ने भी सक्रिय रूप से गोलीबारी की थी। 3. वर्ष 1925 में घटित 'काकोरी षड्यंत्र' के मामले में रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और रोशन सिंह के साथ-साथ चंद्रशेखर आज़ाद को भी गिरफ्तार कर लिया गया था, जिन्हें बाद में ब्रिटिश सरकार द्वारा फाँसी की सजा दी गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनकी संस्थागत व्यवस्थाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बौद्ध धर्म के मध्यम प्रतिपपदा (मध्यम मार्ग) की तरह जैन धर्म ने भी हमेशा अतिवादी तपस्या और कायाक्लेश का पूर्ण रूप से निषेध किया तथा गृहस्थ जीवन में रहकर ही मोक्ष प्राप्ति को एकमात्र मार्ग माना। 2. बौद्ध संघ में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु सीमा 15 वर्ष निर्धारित थी, जबकि जैन संघ (गण) में किसी भी आयु के व्यक्ति को बिना अनुमति के प्रवेश की स्वतंत्रता थी। 3. बौद्ध धर्म में पुनर्जन्म की अवधारणा को स्वीकार किया गया है परंतु जैन धर्म के विपरीत वहाँ किसी स्थायी 'आत्मा' (जीव) के अस्तित्व को स्वीकार नहीं किया जाता है, बल्कि चेतना की एक धारा (विज्ञान) का पुनर्जन्म होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? छठी शताब्दी ईसा पूर्व में महाजनपदों के उदय और मगध साम्राज्य के विस्तार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अंग महाजनपद को मगध में मिलाने वाला प्रथम शासक बिम्बिसार था, जिसने अपने सामरिक और राजनीतिक कौशल का परिचय देते हुए अंग के राजा ब्रह्मदत्त को पराजित किया था। 2. अजातशत्रु के शासनकाल में वैशाली के वज्जी संघ के साथ हुए लंबे संघर्ष के दौरान उसके मंत्रियों (वरकार) की कूटनीति और दो नवीन हथियारों—रथमूसल (ऐसा रथ जिससे गदा जुड़ी होती थी) और महाशिलाकंटक (बड़े पत्थरों को फेंकने वाला यंत्र)—का विशेष रूप से प्रयोग किया गया था। 3. नंद वंश के संस्थापक महापद्मनंद को पुराणों में 'सर्वक्षत्रान्तक' (क्षत्रत्रियों का नाश करने वाला) और 'एकराट' की उपाधि से विभूषित किया गया है, जिसने कलिंग सहित कई महाजनपदों को मगध साम्राज्य में मिला लिया था। 4. मगध के उत्कर्ष का मुख्य कारण केवल उसकी उपजाऊ भूमि और लौह खानों की उपलब्धता थी; प्रारंभ से ही मगध की नौसैनिक शक्ति इतनी प्रबल थी कि उसने बंगाल की खाड़ी के तटीय व्यापार पर पूर्ण एकाधिकार स्थापित कर लिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नरम दल और गरम दल के वैचारिक संघर्ष तथा बंगाल विभाजन के उपरांत उत्पन्न राजनीतिक परिदृश्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में कांग्रेस के भीतर गरमपंथियों (लाल-बाल-पाल) और नरमपंथियों के बीच भारी मतभेद उभरकर सामने आए, जहाँ गरमपंथी बंगाल विभाजन के विरोध में पूरे देश में स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन का विस्तार करना चाहते थे, जबकि गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में नरमपंथियों ने इसे केवल बंगाल तक ही सीमित रखने का प्रयास किया। 2. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी के अध्यक्ष बनने के कारण कांग्रेस विभाजन टल गया, और इस अधिवेशन में पहली बार कांग्रेस के मंच से 'स्वराज' (Self-Government) के लक्ष्य को आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया गया तथा स्वदेशी, बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा के प्रस्ताव पारित किए गए। 3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में नरमपंथियों और गरमपंथियों के बीच अध्यक्ष पद के चुनाव और आंदोलन के स्वरूप को लेकर खुला टकराव हुआ, जिसके परिणामस्वरूप कांग्रेस का विभाजन हो गया और गरमपंथी नेताओं (जैसे बाल गंगाधर तिलक) को कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया, जिससे आगामी नौ वर्षों तक वे कांग्रेस संगठन से बाहर रहे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? गुप्त साम्राज्य (Gupta Empire) की प्रशासनिक व्यवस्था, आर्थिक स्थिति और सांस्कृतिक विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गुप्त काल में भूमि को उसकी उपयोगिता और स्वामित्व के आधार पर कई श्रेणियों में विभाजित किया गया था; जैसे—'क्षेत्र' (खेती योग्य भूमि), 'वापस' (निवास योग्य भूमि), 'अप्राहत' (जंगल या बिना जोती गई भूमि) और 'अप्रहत' भूमि पर राज्य का पूर्ण नियंत्रण था। 2. इस काल में स्वर्ण मुद्राओं को 'दीनार' कहा जाता था, जो कुषाणों की तुलना में अधिक शुद्ध और प्रचुर मात्रा में जारी किए गए थे, किंतु गुप्त साम्राज्य के अंतिम चरण में (विशेषकर कुमारगुप्त प्रथम और स्कंदगुप्त के शासनकाल के बाद) सोने के सिक्कों में धातु की शुद्धता में भारी गिरावट देखी गई। 3. गुप्त राजवंश के शासक 'परमभागवत' की उपाधि धारण करते थे और वैष्णव धर्म उनके राजधर्म के रूप में स्थापित था, किंतु इसके बावजूद उन्होंने बौद्ध और जैन धर्म के प्रति पूरी तरह असहिष्णुता की नीति अपनाई तथा नालंदा विश्वविद्यालय के निर्माण में किसी भी प्रकार का राजकीय अनुदान देने से इनकार कर दिया था। 4. गुप्तकालीन वास्तुकला में पहली बार पक्की ईंटों और पत्थरों से निर्मित मंदिरों के निर्माण की शुरुआत हुई, जिसमें देवगढ़ का दशावतार मंदिर (झांसी) और एरण का वाराह मंदिर इसके उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जिनमें शिखर निर्माण और पंचायतन शैली के प्रारंभिक लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.