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History of India
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क्रांतिकारी आंदोलन के द्वितीय चरण और उससे जुड़े प्रमुख संगठनों तथा घटनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आज़ाद के नेतृत्व में 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) का नाम बदलकर 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) कर दिया गया, जिसमें समाजवाद को अपने मुख्य उद्देश्य के रूप में शामिल किया गया।
  2. 2. लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेने के लिए भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने दिसंबर 1928 में लाहौर में ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जे.पी. सॉंडर्स की हत्या कर दी थी, जिसमें चंद्रशेखर आज़ाद ने भी सक्रिय रूप से गोलीबारी की थी।
  3. 3. वर्ष 1925 में घटित 'काकोरी षड्यंत्र' के मामले में रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और रोशन सिंह के साथ-साथ चंद्रशेखर आज़ाद को भी गिरफ्तार कर लिया गया था, जिन्हें बाद में ब्रिटिश सरकार द्वारा फाँसी की सजा दी गई।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 और 2 सही हैं। सितंबर 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आज़ाद के नेतृत्व में देश के युवा क्रांतिकारियों ने 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' का पुनर्गठन कर इसका नाम 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) रखा। इसका उद्देश्य समाजवादी समाज की स्थापना करना था। साइमन कमीशन के विरोध के दौरान लाला लाजपत राय पर हुए लाठीचार्ज और उनकी मृत्यु के प्रतिशोधस्वरूप 17 दिसंबर 1928 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने लाहौर में सहायक पुलिस अधीक्षक सॉंडर्स की गोली मारकर हत्या कर दी थी, जिसमें चंद्रशेखर आज़ाद ने भी भाग लिया था। कथन 3 गलत है क्योंकि काकोरी कांड (1925) के दौरान चंद्रशेखर आज़ाद पुलिस की गिरफ्त में आने से बचने में सफल रहे थे और वे कभी गिरफ्तार नहीं हुए; वर्ष 1931 में अल्फ्रेड पार्क (इलाहाबाद) में पुलिस मुठभेड़ के दौरान उन्होंने स्वयं को गोली मारकर अपनी शहादत दी थी। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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