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History of India
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बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनकी संस्थागत व्यवस्थाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बौद्ध धर्म के मध्यम प्रतिपपदा (मध्यम मार्ग) की तरह जैन धर्म ने भी हमेशा अतिवादी तपस्या और कायाक्लेश का पूर्ण रूप से निषेध किया तथा गृहस्थ जीवन में रहकर ही मोक्ष प्राप्ति को एकमात्र मार्ग माना।
  2. 2. बौद्ध संघ में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु सीमा 15 वर्ष निर्धारित थी, जबकि जैन संघ (गण) में किसी भी आयु के व्यक्ति को बिना अनुमति के प्रवेश की स्वतंत्रता थी।
  3. 3. बौद्ध धर्म में पुनर्जन्म की अवधारणा को स्वीकार किया गया है परंतु जैन धर्म के विपरीत वहाँ किसी स्थायी 'आत्मा' (जीव) के अस्तित्व को स्वीकार नहीं किया जाता है, बल्कि चेतना की एक धारा (विज्ञान) का पुनर्जन्म होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि जैन धर्म ने अत्यधिक कठोर तपस्या, उपवास और कायाक्लेश पर विशेष बल दिया है, जबकि बौद्ध धर्म ने अष्टम मार्ग और मध्यम मार्ग का उपदेश दिया। कथन 2 असत्य है क्योंकि बौद्ध संघ में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 15 वर्ष थी, जबकि जैन संघ में भी कड़े नियम थे। कथन 3 पूरी तरह सत्य है; बौद्ध दर्शन 'अनात्मवादी' है और वह स्थायी आत्मा के अस्तित्व को नकारते हुए चेतना की निरंतरता को मानता है, जबकि जैन दर्शन प्रत्येक जीव में शाश्वत 'जीव' (आत्मा) की उपस्थिति को स्वीकार करता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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