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भारत में कृषि पद्धतियों, फसल विविधीकरण और विशेषीकृत कृषि प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'जीरो बजट प्राकृतिक खेती' (ZBNF), जिसे वर्तमान में 'भारतीय प्राकृत पद्धतिक कृषि' कहा जाता है, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के पूर्णतः बहिष्कार पर बल देती है और इसमें 'जीवामृत' तथा 'बीजामृत' जैसे स्थानीय रूप से उपलब्ध जैविक घटकों का उपयोग कर मृदा की सूक्ष्मजीवीय सक्रियता को पुनर्जीवित किया जाता है।
- 2. देश में 'सिल्वाकल्चर' (Silviculture) और 'एग्रोफॉरेस्ट्री' (Agroforestry) का संयोजन बंजर और क्षरित भूमियों के पुनरुद्धार के लिए किया जाता है, जिसमें काष्ठीय बारहमासी वृक्षों को कृषि फसलों के साथ एक ही भूमि के टुकड़े पर क्रमिक या समवर्ती रूप से उगाया जाता है।
- 3. 'मल्टी-टियर क्रॉपिंग' (Multi-tier Cropping) या बहु-स्तरीय फसल प्रणाली मुख्य रूप से कम वर्षा वाले शुष्क क्षेत्रों में अपनाई जाने वाली एक पारंपरिक पद्धति है, जिसमें एक ही खेत में समान ऊँचाई और एक जैसी जड़ गहराई वाली केवल एक ही फसल को बड़े पैमाने पर उगाया जाता है।
- 4. भारत में उगाई जाने वाली 'बीटी कपास' (Bt Cotton) एक आनुवंशिक रूप से संशोधित (Genetically Modified) फसल है, जिसमें जीवाणु 'बैसिलस थुरिंजिएंसिस' के जीन का उपयोग करके बॉलवर्म (कपास के कीट) के विरुद्ध प्रतिरोधक क्षमता विकसित की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि जीरो बजट प्राकृतिक खेती (ZBNF) पूरी तरह से रासायनिक उर्वरकों और कृत्रिम कीटनाशकों के उपयोग को वर्जित करती है तथा जीवामृत, बीजामृत और मल्चिंग के माध्यम से मृदा के स्वास्थ्य को सुधारने पर केंद्रित है। कथन 2 सही है क्योंकि एग्रोफॉरेस्ट्री और सिल्वाकल्चर के माध्यम से वृक्षों और कृषि फसलों का एक साथ समवर्ती उत्पादन किया जाता है, जो मृदा क्षरण को रोकता है। कथन 3 गलत है क्योंकि 'मल्टी-टियर क्रॉपिंग' (बहु-स्तरीय फसल प्रणाली) कम वर्षा वाले शुष्क क्षेत्रों में नहीं, बल्कि मुख्य रूप से उच्च वर्षा या सिंचित क्षेत्रों (जैसे बागवानी और उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों) में अपनाई जाती है, जिसमें अलग-अलग ऊँचाई और जड़ गहराई वाले पौधों को एक साथ उगाकर सूर्य के प्रकाश का अधिकतम उपयोग किया जाता है। कथन 4 सही है क्योंकि बीटी कपास में 'बैसिलस थुरिंजिएंसिस' (विकिपीडिया संदर्भ) जीवाणु से प्राप्त जीन का उपयोग करके लेपिडॉप्टेरियन कीटों के खिलाफ आंतरिक प्रतिरोधक क्षमता पैदा की जाती है।
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भारत में अपनाई जाने वाली विभिन्न कृषि पद्धतियों और सिंचाई तकनीकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'श्री पद्धति' (System of Rice Intensification - SRI) धान की खेती की एक ऐसी विधि है जिसमें कम उम्र के पौधों (seedlings), व्यापक दूरी (wider spacing), और जैविक खादों के उपयोग के साथ खेत में निरंतर जल भराव के बजाय वैकल्पिक रूप से गीला और सूखा रखने (Alternate Wetting and Drying) की तकनीक अपनाई जाती है।
2. सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों में, 'ड्रिप सिंचाई' (Drip Irrigation) विधि वाष्पीकरण और सतही अपवाह (Runoff) को न्यूनतम करते हुए सीधे पौधों के मूल क्षेत्र (Root zone) तक जल पहुँचाती है, जिससे लवणता (Salinity) और खरपतवार की समस्याओं में प्रभावी रूप से कमी आती है।
3. 'परिशुद्ध कृषि' (Precision Agriculture) एक ऐसी कृषि प्रबंधन रणनीति है जो सूचना प्रौद्योगिकी और उपग्रह डेटा (GPS/GIS) का उपयोग करके खेत के भीतर स्थानिक और लौकिक विविधताओं के अनुसार इनपुट (उर्वरक, बीज, पानी) के अनुकूलतम उपयोग को सुनिश्चित करती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में 'शून्य जुताई' (Zero Tillage) तकनीक का मुख्य उद्देश्य मृदा की ऊपरी परत को गहराई से उलट-पलट करना है ताकि खरपतवारों का पूर्ण विनाश हो सके और रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत के प्रमुख पर्वतीय क्षेत्रों, पर्वत श्रेणियों और घाटियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'काराकोरम श्रेणी' (Karakoram Range), जिसे 'उच्च एशिया की रीढ़' (Backbone of High Asia) भी कहा जाता है, ट्रांस-हिमालय प्रणाली का हिस्सा है और इसमें भारत की सबसे ऊंची चोटी 'के-2' (गॉडविन ऑस्टिन) स्थित है।
2. 'पीर पंजाल श्रेणी' (Pir Panjal Range) लघु हिमालय (मध्य हिमालय) की सबसे लंबी और महत्वपूर्ण पर्वत श्रृंखला है, जो हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में फैली हुई है और इसी श्रेणी में प्रसिद्ध बनिहाल दर्रा स्थित है जो जम्मू को श्रीनगर से जोड़ता है।
3. 'नंदा देवी चोटी' (Nanda Devi) कुमाऊँ हिमालय का एक प्रमुख भाग है जो उत्तराखंड राज्य में स्थित है और यह पूर्णतः भारत के भीतर स्थित दूसरी सबसे ऊंची पर्वत चोटी है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'महान हिमालय' (Greater Himalaya), जिसे हिमाद्री भी कहा जाता है, एक निरंतर पर्वत श्रृंखला है जिसकी औसत ऊंचाई लगभग 8,000 मीटर है और इसमें माउंट एवरेस्ट, कंचनजंगा तथा धौलागिरि जैसी विश्व की सर्वोच्च शिखर श्रृंखलाएं शामिल हैं, लेकिन इस श्रेणी में कोई भी ग्लेशियर या हिमानी नहीं पाई जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी के वायुमंडल के संगठन, विभिन्न परतों और वैश्विक वायुदाब पेटियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वायुमंडल की नीचली परतों (क्षोभमंडल) में गैसों का मिश्रण लगभग एकसमान रहता है, जिसे 'सममंडल' (Homosphere) कहा जाता है, जबकि लगभग 90 किलोमीटर की ऊँचाई के ऊपर गैसों के आणविक भार के आधार पर परतों में विभाजन होने लगता है जिसे 'विषममंडल' (Heterosphere) कहते हैं।
2. आयनमंडल (Ionosphere) के भीतर स्थित 'डी-परत' (D-layer) लंबी रेडियो तरंगों को परावर्तित करती है और यह परत केवल दिन के समय सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में सक्रिय रहती है, जबकि रात होते ही यह लुप्त हो जाती है।
3. भूमध्यरेखीय निम्न वायुदाब पेटी (Equatorial Low-Pressure Belt) का निर्माण मुख्य रूप से गत्यात्मक कारणों (Dynamic Factors) से होता है, जहाँ पृथ्वी के घूर्णन बल (कोरिऑलिस बल) के कारण हवाएँ ध्रुवों की ओर विक्षेपित हो जाती हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार मध्यमंडल (Mesosphere) में ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान में लगातार गिरावट आती है और इस परत के ऊपरी छोर (मेसोपॉज) पर पृथ्वी के वायुमंडल का न्यूनतम तापमान दर्ज किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भूकंपीय तरंगों की गतिकी, सुनामी की विशेषताओं और ज्वालामुखी उद्गार की प्रक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्राथमिक तरंगें (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं जो ध्वनि तरंगों के समान व्यवहार करती हैं और ठोस, तरल तथा गैस तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, जबकि द्वितीयक तरंगें (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें होती हैं जो केवल ठोस माध्यम से ही गमन कर सकती हैं।
2. खुले महासागरों में सुनामी तरंगों की तरंग दैर्ध्य (Wavelength) अत्यंत लंबी और ऊँचाई बहुत कम होती है, जिसके कारण गहरे समुद्र में जहाजों को इसका आभास नहीं होता है; किंतु उथले तटीय जल में पहुँचने पर इनकी गति कम हो जाती है और ऊर्जा संपीड़न के कारण इनकी ऊँचाई अत्यधिक बढ़ जाती है।
3. 'स्ट्रोम्बोलियन' (Strombolian) प्रकार का ज्वालामुखी उद्गार अत्यधिक शांत और दरारी (Fissure) प्रकार का होता है, जिसमें कम श्यानता वाला बेसिक लावा बिना किसी विस्फोटक गतिविधि के शांत रूप से लावा प्रपात के रूप में बहता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार रिक्टर पैमाना (Richter Scale) एक लघुगणकीय (Logarithmic) पैमाना है जो भूकंप के दौरान मुक्त होने वाली कुल ऊर्जा या परिमाण (Magnitude) को मापता है, न कि केवल सतह पर होने वाली तबाही या तीव्रता (Intensity) को।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत की पर्वत श्रेणियों, उनकी संरचनात्मक विशेषताओं और प्रमुख घाटियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'पीर पंजाल श्रेणी' (Pir Panjal Range) लघु हिमालय की सबसे लंबी और महत्वपूर्ण श्रेणी है, जो कश्मीर घाटी को दक्षिण में जम्मू क्षेत्र से अलग करती है और इसी श्रेणी में प्रसिद्ध 'बनिहाल दर्रा' स्थित है जो जवाहर सुरंग के माध्यम से बारह मास सड़क संपर्क प्रदान करता है。
2. 'जास्कर श्रेणी' (Zaskar Range) महान हिमालय के उत्तर में समानांतर रूप से फैली हुई है, जो लद्दाख क्षेत्र को तिब्बत से अलग करती है और इस श्रेणी का सर्वोच्च शिखर 'नन कुन' (Nun Kun) है।
3. 'नल्लामाला पहाड़ियाँ' (Nallamala Hills) पूर्वी घाट का एक महत्वपूर्ण भाग हैं, जो आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के राज्यों में फैली हुई हैं और ये मुख्यतः क्वार्टजाइट तथा स्लेट जैसी कायांतरित चट्टानों से निर्मित हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'कुल्लू घाटी' (Kullu Valley) धौलाधार और पीर पंजाल श्रेणियों के बीच ब्यास नदी द्वारा निर्मित एक विस्तृत अनुदैर्ध्य घाटी है, जिसे 'देवों की घाटी' भी कहा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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