BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Geography
10 views

भूकंपीय तरंगों की गतिकी, सुनामी की विशेषताओं और ज्वालामुखी उद्गार की प्रक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. प्राथमिक तरंगें (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं जो ध्वनि तरंगों के समान व्यवहार करती हैं और ठोस, तरल तथा गैस तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, जबकि द्वितीयक तरंगें (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें होती हैं जो केवल ठोस माध्यम से ही गमन कर सकती हैं।
  2. 2. खुले महासागरों में सुनामी तरंगों की तरंग दैर्ध्य (Wavelength) अत्यंत लंबी और ऊँचाई बहुत कम होती है, जिसके कारण गहरे समुद्र में जहाजों को इसका आभास नहीं होता है; किंतु उथले तटीय जल में पहुँचने पर इनकी गति कम हो जाती है और ऊर्जा संपीड़न के कारण इनकी ऊँचाई अत्यधिक बढ़ जाती है।
  3. 3. 'स्ट्रोम्बोलियन' (Strombolian) प्रकार का ज्वालामुखी उद्गार अत्यधिक शांत और दरारी (Fissure) प्रकार का होता है, जिसमें कम श्यानता वाला बेसिक लावा बिना किसी विस्फोटक गतिविधि के शांत रूप से लावा प्रपात के रूप में बहता है।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार रिक्टर पैमाना (Richter Scale) एक लघुगणकीय (Logarithmic) पैमाना है जो भूकंप के दौरान मुक्त होने वाली कुल ऊर्जा या परिमाण (Magnitude) को मापता है, न कि केवल सतह पर होने वाली तबाही या तीव्रता (Intensity) को।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि P-तरंगें अनुदैर्ध्य होती हैं और सभी माध्यमों से गुजर सकती हैं, जबकि S-तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं और केवल ठोस माध्यम में चलती हैं। कथन 2 सही है; खुले महासागरों में सुनामी की तरंग दैर्ध्य सैकड़ों किलोमीटर लंबी और ऊँचाई 1 मीटर से कम होती है, लेकिन तट के पास आने पर मंद गति के कारण जल राशि संपीड़ित होकर ऊँची दीवारों का रूप ले लेती है। कथन 3 गलत है क्योंकि 'स्ट्रोम्बोलियन' प्रकार का उद्गार अत्यधिक विस्फोटक और रुक-रुक कर होने वाला होता है, जिसमें मध्यम से उच्च श्यानता वाला लावा और गैस के बुलबुले निकलते हैं; शांत और दरारी उद्गार 'हवाइयन' या 'फ्लड बेसाल्ट' प्रकार के होते हैं। कथन 4 सही है, रिक्टर पैमाना एक लघुगणकीय पैमाना है जो भूकंपीय ऊर्जा का मापन करता है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भूकंप का अध्ययन सिस्मोलॉजी कहलाता है।
Share:

Related Questions

भारत में सिंचाई, कृषि पद्धतियों और प्रमुख फसलों (Cropping Systems) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'सिंचाई की ड्रिप पद्धति' (Drip Irrigation) पौधों की जड़ों तक सीधे और नियंत्रित रूप से जल पहुँचाने की सबसे कुशल विधि है, जिससे वाष्पीकरण और सतही अपवाह (Runoff) द्वारा होने वाले जल की हानि न्यूनतम होती है और खरपतवारों की वृद्धि भी नियंत्रित रहती है। 2. 'बहु-फसली कृषि प्रणाली' (Multiple Cropping) के अंतर्गत एक ही कृषि वर्ष में एक ही खेत में दो या दो से अधिक फसलें एक साथ उगाई जाती हैं, जबकि 'मिश्रित कृषि' (Mixed Cropping) में फसल उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन को भी प्रमुख रूप से अपनाया जाता है। 3. भारत में 'धान की SRI (System of Rice Intensification) पद्धति' पारंपरिक बाढ़ सिंचाई की तुलना में कम जल का उपयोग करती है, जिसमें कम बीज, कम पौधे प्रति पहाड़ी और मिट्टी को एरोबिक (वायवीय) दशा में रखने पर बल दिया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? भारत की मृदा प्रणालियों और उनके रासायनिक तथा भौतिक गुणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'काली मृदा' (Regur Soil) का निर्माण मुख्य रूप से दक्कन ट्रैप के बेसल्टिक चट्टानों के अपक्षय से हुआ है, और इसमें उच्च जल-धारण क्षमता (Water Retention Capacity) पाई जाती है, जिससे गीली होने पर यह अत्यधिक चिपचिपी और सूखी होने पर गहरी चौड़ी दरारों से विदीर्ण हो जाती है। 2. 'लैटेराइट मृदा' (Laterite Soil) उच्च तापमान और भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र 'निक्षालन' (Leaching) प्रक्रिया के परिणामस्वरुप विकसित होती है, जिसके कारण इसमें ह्यूमस, नाइट्रोजन और पोटाश की प्रचुरता होती है, जबकि आयरन ऑक्साइड और एल्यूमीनियम की कमी पाई जाती है। 3. 'लाल और पीली मृदा' (Red and Yellow Soils) का लाल रंग क्रिस्टलीय और रूपांतरित चट्टानों में लौह धातु (Iron) के व्यापक प्रसार के कारण होता है, जबकि जलयोजन (Hydration) की स्थिति में यह पीली दिखाई देती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? भारत के प्रमुख उद्योगों, औद्योगिक अवसंरचना और परिवहन नेटवर्क (राष्ट्रीय राजमार्ग, रेल और जलमार्ग) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर' भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना है, जो जापानी 'शिंकानसेन' (Shinkansen) तकनीक पर आधारित है और इसके मार्ग में कुल 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं। 2. देश में 'समर्पित माल गलियारा निगम लिमिटेड' (DFCCIL) द्वारा निर्मित 'पश्चिमी समर्पित माल गलियारा' (Western DFC) दादरी (उत्तर प्रदेश) से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT, नवी मुंबई) तक जाता है, जो मुख्य रूप से उत्तरी अंतर्देशीय क्षेत्रों को पश्चिमी बंदरगाहों से जोड़ता है। 3. भारत के प्रमुख लौह और इस्पात कारखानों में 'भिलाई इस्पात संयंत्र' सार्वजनिक क्षेत्र का पहला इस्पात संयंत्र है, जिसकी स्थापना द्वितीय पंचवर्षीय योजना के दौरान तत्कालीन सोवियत संघ (USSR) के सहयोग से की गई थी। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में आधुनिक ढंग से पहला सीमेंट कारख़ाना वर्ष 1904 में चेन्नई (मद्रास) में स्थापित किया गया था, जो सीपियों (Shells) पर आधारित था और सफल नहीं हो सका था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत की जलवायु और मानसून की उत्पत्ति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ग्रीष्मकाल में उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानों में अत्यधिक ताप के कारण निम्न वायुदाब का क्षेत्र (मानसून गर्त या मॉनसून ट्रफ) विकसित होता है, जो दक्षिणी गोलार्ध से आने वाली दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक पवनों को भूमध्य रेखा पार करने के बाद फेरेल के नियम और कोरियॉलिस बल के प्रभाव से दक्षिण-पश्चिमी मानसून पवनों में परिवर्तित कर देता है। 2. 'अल नीनो' (El Niño) घटना पेरू के तट के पास ठंडी जलधारा के स्थान पर एक गर्म जलधारा के अस्थायी रूप से प्रकट होने से जुड़ी है, जो भारतीय महासागर में वायुदाब को प्रभावित करके सामान्यतः भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा को कमज़ोर या बाधित करती है। 3. 'मैडन-जूलियन दोलन' (Madden-Julian Oscillation - MJO) एक पूर्वगामी महासागरीय-वायुमंडलीय तरंग है जो हिंद महासागर में बादलों और वर्षा के विकास को प्रभावित करती है, और इसके 'सक्रिय चरण' (Active Phase) के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप में मानसून की वर्षा में वृद्धि होती है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार तिब्बत का पठार ग्रीष्मकाल में एक विशाल 'ऊष्मीय इंजन' (Thermal Low) के रूप में कार्य करता है, जो वायुमंडल के ऊपरी क्षोभमंडल में प्रति-चक्रवात (Anticyclone) और जेट स्ट्रीम की स्थिति को प्रेरित कर दक्षिण-पश्चिम मानसून को खींचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत के भौगोलिक विस्तार, स्थिति और अक्षांश-देशांतर रेखाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत की मुख्य भूमि का विस्तार 8°4' उत्तर से 37°6' उत्तर अक्षांशों के मध्य है, और इसका देशांतरीय विस्तार 68°7' पूर्व से 97°25' पूर्व देशांतरों के बीच है, जिससे इसके अक्षांश और देशांतर दोनों का विस्तार लगभग 30° का बनता है। 2. भारत का सबसे पूर्वी बिंदु 'किबिथु' (Kibithu) अरुणाचल प्रदेश में स्थित है और सबसे पश्चिमी बिंदु 'गुहार मोती' (Ghuar Mota) गुजरात के कच्छ जिले में स्थित है, जिनके स्थानीय समय में लगभग 2 घंटे का अंतर पाया जाता है। 3. भारत के मध्य से गुजरने वाली मानक मध्याह्न रेखा (Standard Meridian) 82°30' पूर्व देशांतर है, जो उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश कुल पाँच राज्यों से होकर गुजरती है और यह ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) से 5 घंटे 30 मिनट आगे है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत की उत्तर से दक्षिण की कुल लंबाई लगभग 3,214 किमी और पूर्व से पश्चिम की कुल चौड़ाई लगभग 2,933 किमी है, तथा कर्क रेखा (23°30' उत्तर) देश के लगभग बीचों-बीच आठ राज्यों से गुजरती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.