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विद्युत परिपथों और चालकों के गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी धात्विक चालक का विद्युत प्रतिरोध तापमान में वृद्धि के साथ बढ़ता है, क्योंकि उच्च तापमान पर इलेक्ट्रॉनों और आयनों के बीच टकराव (collisions) की आवृत्ति बढ़ जाती है, जिससे श्रांति काल (relaxation time) कम हो जाता है।
- 2. अतिचालकता (Superconductivity) की स्थिति में कुछ पदार्थों का विद्युत प्रतिरोध शून्य हो जाता है और उनका चुंबकीय प्रकटन (magnetic susceptibility) आदर्श प्रतिचुंबकीय व्यवहार प्रदर्शित करते हुए -1 हो जाता है, जिसे 'माइस्नर प्रभाव' कहा जाता है।
- 3. किर्चॉफ का द्वितीय नियम (वोल्टेज नियम या KVL) आवेश संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी बंद विद्युत परिपथ के प्रत्येक भाग में प्रवाहित धाराओं और उनके संगत प्रतिरोधों के गुणनफल का बीजगणितीय योग उस लूप में कुल विद्युत वाहक बलों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है।
- 4. मिश्रधातुओं (जैसे मैंगनीन या कांस्टेंटन) का उपयोग मानक प्रतिरोधक बनाने के लिए किया जाता है क्योंकि उनकी प्रतिरोधकता उच्च होती है और उनका प्रतिरोध ताप गुणांक (temperature coefficient of resistance) बहुत कम होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि तापमान बढ़ाने पर धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की तापीय गति बढ़ जाती है जिससे उनका श्रांति काल घटता है और प्रतिरोध बढ़ता है। कथन 2 सही है; अतिचालक अवस्था में पदार्थ न केवल शून्य प्रतिरोध दर्शाते हैं बल्कि माइस्नर प्रभाव के कारण चुंबकीय फ्लक्स को बाहर धकेल देते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि किर्चॉफ का द्वितीय नियम (KVL) 'ऊर्जा संरक्षण के नियम' पर आधारित है, न कि आवेश संरक्षण पर (आवेश संरक्षण पर KCL आधारित है)। कथन 4 सही है क्योंकि मानक प्रतिरोधक बनाने के लिए ऐसी मिश्रधातुओं का चयन किया जाता है जिन पर तापमान परिवर्तन का न्यूनतम प्रभाव पड़े।
Related Questions
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मानव रोगों, उनके संचरण के माध्यम और उनके उपचार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'टाइफाइड' (आंत्र ज्वर) एक जीवाणु जनित रोग है जो 'सालमोनेला टाइफी' (Salmonella typhi) जीवाणु के संक्रमण से होता है, और इसके संपुष्टि के लिए 'विडाल परीक्षण' (Widal test) किया जाता है।
2. 'फाइलेरियासिस' (हाथीपांव) का संक्रमण क्रिमि 'वुचेरेरिया बैनक्रॉफ्टी' (Wuchereria bancrofti) के कारण होता है, जो मादा एनोफेलीज मच्छर के काटने से मानव शरीर में फैलता है और इसके कारण लसीका वाहिकाओं में चिरकारी सूजन आ जाती है।
3. एड्स (AIDS) उत्पन्न करने वाला 'ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस' (HIV) एक रेट्रोवायरस है जो मुख्य रूप से 'सहायक टी-लिम्फोसाइट्स' ($T_h$ कोशिकाओं) को संक्रमित करके उनकी संख्या को धीरे-धीरे कम कर देता है।
4. जन्मजात और उपार्जित प्रतिरक्षा के अंतर्गत, 'इंटरफेरॉन' (Interferons) प्रोटीन विषाणु-संक्रमित कोशिकाओं द्वारा स्रावित किए जाते हैं जो आसपास की गैर-संक्रमित कोशिकाओं को और अधिक विषाणु संक्रमण से बचाने का कार्य करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर में जैविक अणुओं, पोषण और विटामिनों की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जल में घुलनशील विटामिन (जैसे विटामिन B और C) शरीर में संचित नहीं किए जा सकते हैं और मूत्र के माध्यम से उत्सर्जित हो जाते हैं, सिवाय 'विटामिन B12' के, जिसका यकृत (Liver) में महीनों तक भंडारण हो सकता है।
2. 'नियासिन' (विटामिन B3) का अग्रगामी (Precursor) आवश्यक अमीनो अम्ल 'ट्रिप्टोफैन' है, और शरीर में ट्रिप्टोफैन की पर्याप्त मात्रा होने पर इसका संश्लेषण किया जा सकता है, जिसकी कमी से 'पेलग्रा' (Pellagra) रोग होता है जिसे '4Ds' (Dermatitis, Diarrhea, Dementia, Death) के लक्षणों से पहचाना जाता है।
3. वसा में घुलनशील विटामिन 'विटामिन K' प्रोथ्रॉम्बिन के संश्लेषण के लिए अनिवार्य है और यह केवल बाह्य स्रोतों (आहार) से प्राप्त होता है, क्योंकि मानव शरीर की आंतों में उपस्थित सहजीवी बैक्टीरिया इसका संश्लेषण करने में पूरी तरह असमर्थ होते हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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मानव शरीर में प्रतिजैविक (Antibiotics) के अत्यधिक या गलत उपयोग से 'प्लाज्मिड-मध्यस्थित एंटीबायोटिक प्रतिरोध' (Plasmid-mediated antibiotic resistance) मुख्य रूप से किस जैविक प्रक्रिया के माध्यम से एक जीवाणु से दूसरे जीवाणु में तेजी से फैलता है?
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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'थर्मिट प्रक्रम' (Thermite Process) के दौरान फेरिक ऑक्साइड ($Fe_2O_3$) को एल्युमिनियम चूर्ण के साथ अपचयित किया जाता है, जिसमें एल्युमिनियम एक प्रबल अपचायक के रूप में कार्य करते हुए अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न करता है, और इस ऊष्मा का उपयोग रेल की पटरियों या टूटे हुए मशीनरी भागों को जोड़ने (वेल्डिंग) के लिए किया जाता है।
2. जब सफेद फॉस्फोरस ($P_4$) को सांद्र सोडियम हाइड्रोक्साइड (NaOH) विलयन के साथ अक्रिय वातावरण में गर्म किया जाता है, तो यह असमानुपातन (Disproportionation) अभिक्रिया के माध्यम से फॉस्फीन गैस ($PH_3$) और सोडियम हाइपोफॉस्फाइट ($NaH_2PO_2$) का निर्माण करता है।
3. 'एक्वा रीजिया' (Aqua Regia), जो कि सांद्र हाइड्रोक्लोरिक एसिड ($HCl$) और सांद्र नाइट्रिक एसिड ($HNO_3$) का $3:1$ के आयतन अनुपात में ताजा मिश्रण होता है, सोने और प्लैटिनम जैसी उत्कृष्ट धातुओं को घोलने में सक्षम होता है क्योंकि इसमें उत्पन्न होने वाला 'क्लोरीन मुक्त मूलक' और 'नाइट्रोसिल क्लोराइड' इन धातुओं के साथ क्लोराइड संकुल बनाते हैं।
4. सोडियम कार्बोनेट के निर्माण के लिए प्रयुक्त 'सॉल्वे प्रक्रम' (Solvay Process) में मध्यवर्ती उत्पाद के रूप में अमोनियम कार्बोनेट और अमोनियम बाइकार्बोनेट बनते हैं, तथा इस प्रक्रम की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें अमोनिया का पुनर्चक्रण (Recycling) कैल्शियम हाइड्रोक्साइड के साथ अमोनियम क्लोराइड की प्रतिक्रिया द्वारा सफलतापूर्वक किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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अनुदैर्ध्य तरंगों (Longitudinal waves) और अनुप्रस्थ तरंगों (Transverse waves) की गति एवं विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी ठोस माध्यम में अनुप्रस्थ तरंगें और अनुदैर्ध्य तरंगें दोनों संचालित हो सकती हैं, क्योंकि ठोस माध्यमों में प्रत्यास्थता के साथ-साथ कठोरता (Shear modulus) का गुण भी विद्यमान होता है।
2. जब कोई ध्वनि तरंग (जो कि एक अनुदैर्ध्य तरंग है) वायु से जल में प्रवेश करती है, तो उसकी आवृत्ति अपरिवर्तित रहती है, किंतु तरंगदैर्ध्य और वेग दोनों के मान में आनुपातिक रूप से वृद्धि हो जाती है।
3. लाप्लास द्वारा न्यूटन के ध्वनि की चाल के सूत्र में किए गए संशोधन के अनुसार, वायु में ध्वनि का संचरण एक रुद्धोष्म (Adiabatic) प्रक्रिया है, क्योंकि संपीडन और विरलन की प्रक्रिया इतनी तीव्र होती है कि उत्पन्न होने वाली ऊष्मा परिवेश में स्थानांतरित नहीं हो पाती है।
4. डॉप्लर प्रभाव के अनुसार, जब ध्वनि स्रोत और श्रोता दोनों एक ही दिशा में समान चाल से गति करते हैं, तो श्रोता द्वारा सुनी जाने वाली आभासी आवृत्ति में कोई परिवर्तन नहीं होता है और वह वास्तविक आवृत्ति के बराबर ही रहती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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