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General Science
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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'थर्मिट प्रक्रम' (Thermite Process) के दौरान फेरिक ऑक्साइड ($Fe_2O_3$) को एल्युमिनियम चूर्ण के साथ अपचयित किया जाता है, जिसमें एल्युमिनियम एक प्रबल अपचायक के रूप में कार्य करते हुए अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न करता है, और इस ऊष्मा का उपयोग रेल की पटरियों या टूटे हुए मशीनरी भागों को जोड़ने (वेल्डिंग) के लिए किया जाता है।
- 2. जब सफेद फॉस्फोरस ($P_4$) को सांद्र सोडियम हाइड्रोक्साइड (NaOH) विलयन के साथ अक्रिय वातावरण में गर्म किया जाता है, तो यह असमानुपातन (Disproportionation) अभिक्रिया के माध्यम से फॉस्फीन गैस ($PH_3$) और सोडियम हाइपोफॉस्फाइट ($NaH_2PO_2$) का निर्माण करता है।
- 3. 'एक्वा रीजिया' (Aqua Regia), जो कि सांद्र हाइड्रोक्लोरिक एसिड ($HCl$) और सांद्र नाइट्रिक एसिड ($HNO_3$) का $3:1$ के आयतन अनुपात में ताजा मिश्रण होता है, सोने और प्लैटिनम जैसी उत्कृष्ट धातुओं को घोलने में सक्षम होता है क्योंकि इसमें उत्पन्न होने वाला 'क्लोरीन मुक्त मूलक' और 'नाइट्रोसिल क्लोराइड' इन धातुओं के साथ क्लोराइड संकुल बनाते हैं।
- 4. सोडियम कार्बोनेट के निर्माण के लिए प्रयुक्त 'सॉल्वे प्रक्रम' (Solvay Process) में मध्यवर्ती उत्पाद के रूप में अमोनियम कार्बोनेट और अमोनियम बाइकार्बोनेट बनते हैं, तथा इस प्रक्रम की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें अमोनिया का पुनर्चक्रण (Recycling) कैल्शियम हाइड्रोक्साइड के साथ अमोनियम क्लोराइड की प्रतिक्रिया द्वारा सफलतापूर्वक किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। 1. थर्मिट प्रक्रम में एल्युमिनियम की उच्च ऑक्सीजन बंधुता के कारण यह $Fe_2O_3$ को अपचयित कर पिघला हुआ लोहा प्रदान करता है। 2. सफेद फॉस्फोरस की कास्टिक सोडा के साथ अभिक्रिया एक विशिष्ट असमानुपातन प्रतिक्रिया है जिसमें फॉस्फीन गैस निकलती है। 3. एक्वा रीजिया $3:1$ ($HCl:HNO_3$) का मिश्रण है जो सोने ($Au$) और प्लैटिनम ($Pt$) जैसी अक्रिय धातुओं को उनके समन्वय संकुल (Coordination complexes) बनाकर घोल देता है। 4. सॉल्वे प्रक्रम में अमोनिया की पुनर्प्राप्ति (Recycling) पर्यावरण और आर्थिक दृष्टि से इस विधि को अत्यधिक कुशल बनाती है। धातु और उनके यौगिकों के विस्तृत अध्ययन के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
Related Questions
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी उदासीन गैसीय परमाणु की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का मान हमेशा ऋणात्मक होता है, क्योंकि प्रत्येक स्थिति में इलेक्ट्रॉन जोड़ने पर ऊर्जा का निष्कासन होता है।
2. आवर्त सारणी में किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ने के कारण आयनन एन्थैल्पी के मान में सामान्यतः कमी आती है, किंतु 5d संक्रमण श्रेणी के तत्वों की आयनन एन्थैल्पी उनके ठीक ऊपर की 4d श्रेणी के तत्वों की तुलना में अधिक होती है, जिसका मुख्य कारण 'लैंथेनाइड संकुचन' है।
3. पॉलिंग पैमाने पर फ्लोरिन की विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) संपूर्ण आवर्त सारणी में सर्वाधिक (4.0) होती है, लेकिन इसकी प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान क्लोरीन की तुलना में कम होता है।
4. किसी तत्व की धात्विक प्रकृति आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर बढ़ती है क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश घट जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सापेक्षता के सिद्धांत में समय फैलाव (Time Dilation) के अनुसार, अत्यधिक वेग से गतिमान घड़ी पर समय का क्या प्रभाव पड़ता है?
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जड़?
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जीवाणुभोजी (Bacteriophage) और आनुवंशिक विकास के संदर्भ में, 'हर्शेल और चेस के प्रयोग' (Hershey-Chase experiment) तथा 'डीएनए प्रतिकृति' (DNA replication) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्शेल और चेस ने अपने प्रयोग में रेडियोएक्टिव सल्फर ($^{35}S$) का उपयोग डीएनए को चिन्हित करने के लिए और रेडियोएक्टिव फॉस्फोरस ($^{32}P$) का उपयोग प्रोटीन आवरण को चिन्हित करने के लिए किया था, जिससे यह सिद्ध हुआ कि आनुवंशिक पदार्थ प्रोटीन है।
2. मेसेल्सन और स्टाल (Meselson and Stahl) ने एस्चेरिचिया कोलाई ($E. coli$) पर अपने प्रयोग द्वारा यह प्रमाणित किया कि डीएनए की प्रतिकृति 'संरक्षी' (Conservative) प्रकार की होती है, जिसमें मूल डीएनए अणु का दोनों स्ट्रैंड सुरक्षित रहता है और एक नया दोहरा स्ट्रैंड बनता है।
3. डीएनए पोलीमरेज एंजाइम हमेशा $5' \rightarrow 3'$ दिशा में नए स्ट्रैंड के संश्लेषण को उत्प्रेरित करता है, जिसके कारण रज्जुक (Strand) का निर्माण दो रूपों में होता है—एक 'अग्रगामी रज्जुक' (Leading strand) जो सतत रूप से बनता है और दूसरा 'पश्चगामी रज्जुक' (Lagging strand) जो छोटे खंडों (ओकाजाकी खंड) के रूप में असंतत रूप से संश्लेषित होता है।
4. आनुवंशिक कूट (Genetic code) त्रिक (Triplet) प्रकृति का होता है, यानी तीन नाइट्रोजन क्षारकों का एक समूह एक अमीनो अम्ल को कोड करता है, और यह कूट 'अपहृत' (Degenerate) होता है क्योंकि एक से अधिक प्रकूट (Codon) एक ही अमीनो अम्ल के लिए कोड कर सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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मानव शरीर के तंत्रों की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आमाशय में जठर रस (Gastric juice) में उपस्थित 'पेप्सिनोजन' एक निष्क्रिय प्रोएंजाइम है, जो हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($HCl$) की उपस्थिति में सक्रिय पेप्सिन में परिवर्तित होता है और प्रोटीन को प्रोटीज तथा पेप्टोन में जलघटित करता है।
2. फुफ्फुसीय वेंटिलेशन (Pulmonary ventilation) के दौरान, जब अंतःश्वसन मांसपेशियां (बाहरी इंटरकोस्टल मांसपेशियाँ और डायाफ्राम) संकुचित होती हैं, तो वक्ष गुहा का आयतन बढ़ जाता है, जिससे फेफड़ों के भीतर का अंतःफुफ्फुसीय दबाव वायुमंडलीय दबाव से कम हो जाता है और वायु फेफड़ों के अंदर प्रवाहित होती है।
3. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में न्यूरॉन्स के अक्षतंतु (Axon) पर 'मिएलिन आच्छद' (Myelin sheath) का निर्माण श्वान कोशिकाओं द्वारा होता है, जो तंत्रिका आवेगों के संचरण की गति को धीमा कर देती हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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