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General Science
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों, उनके रोगजनकों (Pathogens) और उनके संचरण के तरीकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. क्षय रोग (Tuberculosis) एक जीवाणु जनित रोग है जो 'माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस' के कारण होता है, और यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है, जबकि 'डॉट्स' (DOTS) प्रणाली इसके उपचार के लिए अपनाई जाने वाली प्रत्यक्ष अवलोकन उपचार रणनीति है।
- 2. जापानी एन्सेफलाइटिस एक विषाणु जनित मस्तिष्क का संक्रमण है, जिसका संचरण मुख्य रूप से 'क्युलेक्स' प्रजाति की संक्रमित मादा मच्छरों के काटने से होता है, और इसके विषाणु के लिए सुअर तथा पक्षी प्राथमिक पोषक (Reservoir hosts) के रूप में कार्य करते हैं।
- 3. रिलैप्सिंग फीवर और टाइफस ज्वर जैसे संक्रामक रोग जीवाणुओं (जैसे बोरेलिया और रिकेट्सिया) के कारण होते हैं, जिनका संचरण टिक (Ticks), जूँ (Lice) और पिùओं (Fleas) जैसे आर्थ्रोपोड वैक्टर द्वारा होता है।
- 4. हेपेटाइटिस बी एक डीएनए विषाणु है जो मुख्य रूप से दूषित जल और भोजन के सेवन से फैलता है, तथा इसके संक्रमण से आंतों की उपकला कोशिकाओं का गंभीर क्षय और यकृत सिरोसिस (Liver Cirrhosis) उत्पन्न होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि क्षय रोग (टीबी) माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया के कारण होता है और इसके नियंत्रण के लिए WHO समर्थित DOTS (Directly Observed Treatment, Short-course) रणनीति का उपयोग किया जाता है। कथन 2 सही है; जापानी एन्सेफलाइटिस एक वायरल संक्रमण है जो क्युलेक्स मच्छरों द्वारा फैलता है और सुअर तथा जलपक्षीय पक्षी इसके मुख्य प्राकृतिक पोषक हैं। कथन 3 सही है क्योंकि रिकेट्सिया और बोरेलिया जैसे रोगजनक आर्थ्रोपोड वैक्टर (जूँ, टिक) के माध्यम से फैलते हैं। कथन 4 गलत है क्योंकि हेपेटाइटिस बी एक डीएनए वायरस है जो दूषित जल से नहीं, बल्कि संक्रमित रक्त, यौन संपर्क या संदूषित सुइयों के माध्यम से फैलता है (दूषित जल से हेपेटाइटिस ए और ई फैलता है)। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा निष्कर्षण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'भर्जन' (Roasting) प्रक्रम के दौरान अयस्क को वायु की नियमित या सीमित आपूर्ति में उसके गलनांक से कम तापमान पर गर्म किया जाता है, जिसका मुख्य उपयोग कार्बोनेट अयस्कों को ऑक्साइड में बदलने के लिए किया जाता है।
2. 'थर्माइट प्रक्रम' (Thermite Process) में एल्युमिनियम पाउडर का उपयोग एक शक्तिशाली अपचायक के रूप में किया जाता है, जो आयरन (III) ऑक्साइड जैसे भारी धातु ऑक्साइडों को अपचयित कर पिघली हुई अवस्था में धातु प्राप्त करने में सहायता करता है।
3. 'जोन परिष्करण' (Zone Refining) विधि का उपयोग मुख्य रूप से अर्धचालकों (जैसे सिलिकॉन और जर्मेनियम) के अत्यधिक उच्च शुद्धिकरण के लिए किया जाता है, जो इस सिद्धांत पर आधारित है कि अशुद्धियाँ ठोस अवस्था की तुलना में गलित अवस्था (Molten state) में अधिक विलेय होती हैं।
4. सोडियम कार्बोनेट के निर्माण की 'सॉल्वे प्रक्रम' (Solvay Process) विधि में अमोनिया का पुनर्चक्रण किया जाता है, और इस प्रक्रिया में उपोत्पाद के रूप में कैल्शियम क्लोराइड ($CaCl_2$) प्राप्त होता है, जिससे अमोनिया की कोई बड़ी हानि नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन और ईंधन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्केन्स (Alkanes) संतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जिनमें सभी कार्बन-कार्बन बंध एकल सहसंयोजक बंध होते हैं, और इनका सामान्य सूत्र $C_n H_{2n+2}$ होता है, जबकि इनमें प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ (Substitution reactions) मुख्य अभिलाक्षणिक गुण हैं।
2. ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन, जैसे बेंजीन ($C_6H_6$), हकल के नियम ($4n+2$ पाई इलेक्ट्रॉन) का पालन करते हैं और वे अपनी उच्च असंतृप्ति के बावजूद योगात्मक अभिक्रियाओं (Addition reactions) की तुलना में आसानी से इलेक्ट्रॉnesnėहिषी प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ प्रदर्शित करते हैं।
3. द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है, जिसमें सुरक्षा की दृष्टि से गंध के लिए एथिल मर्कैप्टेन ($C_2H_5SH$) मिलाया जाता है, क्योंकि प्राकृतिक रूप से यह गैस गंधहीन होती है।
4. ऑक्टेन संख्या (Octane number) डीजल ईंधन की स्फोटक-विरोधी (Anti-knock) गुणवत्त्ता का माप है, जिसमें उच्च ऑक्टेन संख्या वाले ईंधन (जैसे आइसो-ऑक्टेन) इंजन में 'नॉक' या अपस्फोटन को कम करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्रकाश का वेग?
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रासायनिक बंधन (Chemical Bonding) और अम्ल-क्षार सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लुईस अम्ल (Lewis acid) वे रासायनिक स्पीशीज होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण कर सकती हैं (इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही), जबकि लुईस क्षार इलेक्ट्रॉन युग्म को दान करते हैं।
2. अमोनिया ($NH_3$) अणु में नाइट्रोजन परमाणु पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone pair) की उपस्थिति के कारण यह एक उत्कृष्ट लुईस क्षार के रूप में कार्य करता है।
3. ब्रॉन्स्टेड-लोरी (Bronsted-Lowry) संकल्पना के अनुसार, किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार (Conjugate base) भी अत्यंत प्रबल और प्रतिक्रियाशील होता है।
4. जल एक उभयधर्मी (Amphoteric) विलायक है जो ब्रॉन्स्टेड-लोरी अम्ल और ब्रॉन्स्टेड-लोरी क्षार दोनों रूप में कार्य कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भूस्थिर उपग्रहों (Geostationary Satellites) और ध्रुवीय उपग्रहों (Polar Satellites) की गति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भूस्थिर उपग्रह पृथ्वी की सतह से लगभग 36,000 किमी की ऊँचाई पर एक ऐसी कक्षा में स्थापित किए जाते हैं जहाँ उनका परिक्रमण काल पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूर्णन काल (ठीक 24 घंटे) के बराबर होता है और उनकी परिक्रमा की दिशा हमेशा पश्चिम से पूर्व की ओर होती है।
2. ध्रुवीय उपग्रह बहुत कम ऊँचाई (लगभग 500 से 800 किमी) पर चक्कर लगाते हैं और इनकी कक्षा उत्तर-दक्षिण दिशा में होती है, जिससे ये पृथ्वी के उत्तर और दक्षिण ध्रुवों के ऊपर से गुजरते हुए पूरे ग्लोब का रिमोट सेंसिंग और मौसम पूर्वानुमान के लिए प्रेक्षण करते हैं।
3. तुल्यकालिक कक्षा (Synchronous Orbit) में घूमते हुए किसी उपग्रह की कक्षीय चाल (Orbital velocity), भूस्थिर कक्षा के उपग्रह की तुलना में अधिक होती है क्योंकि इसकी ऊँचाई भूस्थिर उपग्रह की तुलना में कम होती है।
4. किसी उपग्रह के भीतर बैठे अंतरिक्ष यात्री को भारहीनता (Weightlessness) का अनुभव इसलिए होता है क्योंकि उपग्रह और अंतरिक्ष यात्री दोनों पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल कार्य करना बंद कर देता है, जिसके परिणामस्वरूप दोनों का त्वरण शून्य हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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