BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

General Science
14 views

प्रकाश का वेग?

Detailed Explanation

3 लाख किमी/से।
Share:

Related Questions

नाभिकीय भौतिकरी और कण त्वरकों (Particle Accelerators) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. साइक्लोट्रॉन (Cyclotron) एक ऐसा कण त्वरक है जिसका उपयोग आवेशित कणों (जैसे प्रोटॉन और ड्यूट्रॉन) को उच्च ऊर्जा तक त्वरित करने के लिए किया जाता है, और इसमें कणों को त्वरित करने के लिए एक समान चुंबकीय क्षेत्र और परिवर्ती (Oscillating) विद्युत क्षेत्र का एक साथ उपयोग होता है। 2. साइक्लोट्रॉन में उच्च ऊर्जा प्राप्त करने की एक मुख्य सीमा यह है कि जब इलेक्ट्रॉनों या हल्के कणों को अत्यधिक उच्च वेग तक त्वरित किया जाता है, तो आपेक्षिकीय प्रभाव (Relativistic effect) के कारण उनका द्रव्यमान बढ़ने लगता है, जिससे उनका आवर्तकाल उच्च आवृत्ति वाले प्रत्यावर्ती विभवांतर के साथ समकालिक (Synchronized) नहीं रह पाता है। 3. द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता के सिद्धांत के अनुसार, जब किसी नाभिक का निर्माण उसके व्यक्तिगत न्यूट्रॉनों और प्रोटॉनों से होता है, तो कुल द्रव्यमान में होने वाली कमी (द्रव्यमान क्षति) नाभिकीय बंधन ऊर्जा के रूप में मुक्त होती है, और प्रति न्यूक्लियन बंधन ऊर्जा जितनी अधिक होती है, नाभिक उतना ही अधिक स्थायी होता है। 4. बीटा-क्षय ($eta$-decay) के दौरान उत्सर्जित होने वाले पॉजिट्रॉन ($e^+$) और इलेक्ट्रॉन ($e^-$) के अलावा, एक अनावेशित और अत्यंत कम द्रव्यमान वाला कण भी उत्सर्जित होता है जिसे 'न्यूट्रिनो' (Neutrino) कहा जाता है, और इसकी भविष्यवाणी सबसे पहले ऊर्जा और रैखिक संवेग संरक्षण के नियमों को संतुष्ट करने के लिए वोल्फगैंग पाउली द्वारा की गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं? विद्युत धारा, प्रतिरोध और सर्किट (Electricity) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी चालक के भीतर मुक्त इलेक्ट्रॉनों का अपवाह वेग (Drift velocity) बहुत कम होता है (लगभग $10^{-4}$ m/s की कोटि का), किंतु विद्युत क्षेत्र प्रकाश के वेग से गति करता है जिससे स्विच ऑन करते ही सर्किट में तुरंत धारा प्रवाहित होने लगती है। 2. किर्चहॉफ का प्रथम नियम (Kirchhoff's Current Law) आवेश संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी भी संधि (Junction) पर मिलने वाली समस्त धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है। 3. किर्चहॉफ का द्वितीय नियम (Kirchhoff's Voltage Law) ऊर्जा संरक्षण के नियम का पालन करता है, जिसके अनुसार किसी बंद लूप (Closed loop) में प्रतिरोधों और उनमें बहने वाली धाराओं के गुणनफल का बीजगणितीय योग उस लूप में उपस्थित कुल विद्युत वाहक बलों (EMF) के बीजगणितीय योग के बराबर होता है। 4. अतिचालकता (Superconductivity) की स्थिति में किसी पदार्थ की विद्युत प्रतिरोधकता अनंत हो जाती है और चुंबकीय क्षेत्र पूरी तरह से अंदर प्रवेश कर जाता है जिसे 'मीस्नर प्रभाव' कहते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा निष्कर्षण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'भर्जन' (Roasting) प्रक्रम के दौरान अयस्क को वायु की नियमित या सीमित आपूर्ति में उसके गलनांक से कम तापमान पर गर्म किया जाता है, जिसका मुख्य उपयोग कार्बोनेट अयस्कों को ऑक्साइड में बदलने के लिए किया जाता है। 2. 'थर्माइट प्रक्रम' (Thermite Process) में एल्युमिनियम पाउडर का उपयोग एक शक्तिशाली अपचायक के रूप में किया जाता है, जो आयरन (III) ऑक्साइड जैसे भारी धातु ऑक्साइडों को अपचयित कर पिघली हुई अवस्था में धातु प्राप्त करने में सहायता करता है। 3. 'जोन परिष्करण' (Zone Refining) विधि का उपयोग मुख्य रूप से अर्धचालकों (जैसे सिलिकॉन और जर्मेनियम) के अत्यधिक उच्च शुद्धिकरण के लिए किया जाता है, जो इस सिद्धांत पर आधारित है कि अशुद्धियाँ ठोस अवस्था की तुलना में गलित अवस्था (Molten state) में अधिक विलेय होती हैं। 4. सोडियम कार्बोनेट के निर्माण की 'सॉल्वे प्रक्रम' (Solvay Process) विधि में अमोनिया का पुनर्चक्रण किया जाता है, और इस प्रक्रिया में उपोत्पाद के रूप में कैल्शियम क्लोराइड ($CaCl_2$) प्राप्त होता है, जिससे अमोनिया की कोई बड़ी हानि नहीं होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? धातुओं, अधातुओं और उनके प्रमुख यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा निष्कर्षण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. एल्युमिनियम के निष्कर्षण के लिए हॉल-हरोल्ट प्रक्रम (Hall-Héroult process) में शुद्ध एल्युमिनियम ऑक्साइड ($Al_2O_3$) को पिघले हुए क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) और फ्लूएस्पर ($CaF_2$) के मिश्रण में घोला जाता है, जहाँ क्रायोलाइट विलायक का कार्य करते हुए मिश्रण के गलनांक को कम करता है और उसकी विद्युत चालकता को बढ़ाता है। 2. कॉपर मैटे (Copper matte), जो प्रगलन (Smelting) प्रक्रिया के दौरान परावर्ती भट्टी (Refractory furnace) में प्राप्त होता है, मुख्य रूप से क्यूप्रस सल्फाइड ($Cu_2S$) और फेरस सल्फाइड ($FeS$) का मिश्रण होता है, और इससे तांबे के निष्कर्षण (बेसेमरलीकरण) के दौरान फेरस सल्फाइड को हटाने के लिए सिलिका ($SiO_2$) का उपयोग गालक (Flux) के रूप में किया जाता है। 3. सफेद फॉस्फोरस ($P_4$) एक अत्यधिक अभिक्रियाशील, प्रतिक्रियाशील और दीप्तशील (Phosphorescent) अणु है जो कमरे के तापमान पर वायु में स्वतः जल उठता है, जबकि लाल फॉस्फोरस पॉलीमरिक संरचना होने के कारण कम अभिक्रियाशील होता है और विषैला नहीं होता है। 4. संक्रमण धातुओं के यौगिकों में 'लैंथेनाइड संकुचन' के कारण 4d और 5d संक्रमण श्रेणियों के तत्वों (जैसे जिरकोनियम और हाफ्नियम) की परमाणु त्रिज्याएँ और रासायनिक गुण लगभग समान हो जाते हैं, जिससे उन्हें अयस्कों से पृथक्करण करना अत्यंत कठिन हो जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों के जैविक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ABO रक्त समूह प्रणाली में, रक्त समूह 'O' वाले व्यक्ति के प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B दोनों प्राकृतिक एंटीबॉडी (एग्लुटिनिन) उपस्थित होते हैं, जिसके कारण यह समूह किसी भी अन्य रक्त समूह वाले व्यक्ति से लाल रक्त कोशिकाओं को प्राप्त कर सकता है बिना किसी संलयन (Agglutination) के। 2. 'Rh कारक' (Rhesus factor) के संदर्भ में, एक Rh-धनात्मक (Rh+) पुरुष और Rh-ऋणात्मक (Rh-) महिला के विवाह से उत्पन्न होने वाली गर्भभ्रूण रक्ताणुकोशाकता (Erythroblastosis fetalis) की समस्या पहले गर्भ के दौरान ही अत्यधिक गंभीर और घातक हो जाती है, क्योंकि प्राथमिक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया तत्काल और प्रबल होती है। 3. मानव हृदय के समेकित चालन प्रणाली (Conduction System) में, 'एट्रियोवेंट्रिकुलर नोड' (AV Node) से उत्पन्न होने वाला विद्युत आवेग हिज के बंडल (Bundle of His) और पुर्किंजे तंतुओं (Purkinje fibres) से होते हुए निलय की पेशियों तक पहुँचता है, जिससे दोनों निलयों का संकुचन आलिंदों की तुलना में एक निश्चित शारीरिक विलंब (Delay) के बाद होता है। 4. रक्त प्लाज्मा में प्रोथ्रोम्बिन और फाइब्रिनोजेन जैसे स्कंदन कारक मुख्य रूप से यकृत (Liver) द्वारा संश्लेषित किए जाते हैं, और फाइब्रिनोजेन को अघुलनशील फाइब्रिन में बदलने के लिए थ्रॉम्बोप्लास्टिन तथा कैल्शियम आयनों ($Ca^{2+}$) की उपस्थिति अनिवार्य होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.