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General Science
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भूस्थिर उपग्रहों (Geostationary Satellites) और ध्रुवीय उपग्रहों (Polar Satellites) की गति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भूस्थिर उपग्रह पृथ्वी की सतह से लगभग 36,000 किमी की ऊँचाई पर एक ऐसी कक्षा में स्थापित किए जाते हैं जहाँ उनका परिक्रमण काल पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूर्णन काल (ठीक 24 घंटे) के बराबर होता है और उनकी परिक्रमा की दिशा हमेशा पश्चिम से पूर्व की ओर होती है।
  2. 2. ध्रुवीय उपग्रह बहुत कम ऊँचाई (लगभग 500 से 800 किमी) पर चक्कर लगाते हैं और इनकी कक्षा उत्तर-दक्षिण दिशा में होती है, जिससे ये पृथ्वी के उत्तर और दक्षिण ध्रुवों के ऊपर से गुजरते हुए पूरे ग्लोब का रिमोट सेंसिंग और मौसम पूर्वानुमान के लिए प्रेक्षण करते हैं।
  3. 3. तुल्यकालिक कक्षा (Synchronous Orbit) में घूमते हुए किसी उपग्रह की कक्षीय चाल (Orbital velocity), भूस्थिर कक्षा के उपग्रह की तुलना में अधिक होती है क्योंकि इसकी ऊँचाई भूस्थिर उपग्रह की तुलना में कम होती है।
  4. 4. किसी उपग्रह के भीतर बैठे अंतरिक्ष यात्री को भारहीनता (Weightlessness) का अनुभव इसलिए होता है क्योंकि उपग्रह और अंतरिक्ष यात्री दोनों पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल कार्य करना बंद कर देता है, जिसके परिणामस्वरूप दोनों का त्वरण शून्य हो जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 सही हैं। भूस्थिर उपग्रह पृथ्वी की निरक्षीय कक्षा में 36,000 किमी की ऊँचाई पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूमते हैं और इनका आवर्तकाल 24 घंटे होता है। ध्रुवीय उपग्रह कम ऊँचाई पर उत्तर-दक्षिण दिशा में चक्कर लगाते हैं। कम ऊँचाई वाली कक्षाओं में उपग्रह की कक्षीय चाल अधिक होती है। कथन 4 गलत है क्योंकि उपग्रह के भीतर अंतरिक्ष यात्री को भारहीनता का अनुभव इसलिए होता है क्योंकि अंतरिक्ष यात्री और उपग्रह दोनों पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में मुक्त पतन (Free fall) की स्थिति में होते हैं, जिससे उनका प्रभावी भार शून्य हो जाता है; गुरुत्वाकर्षण बल शून्य नहीं होता बल्कि वही उन्हें वृत्ताकार कक्षा में बनाए रखता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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