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General Science
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ध्वनि का वेग?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
पानी में ज्यादा।
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective Nuclear Charge) में क्रमिक वृद्धि होती है, जिसके फलस्वरूप परमाणु त्रिज्या में निरंतर कमी आती है, किंतु समूह-18 के उत्कृष्ट गैसों की परमाणु त्रिज्या (वांडरवाल्स त्रिज्या) उनके ठीक पहले आने वाले हैलोजन तत्वों की सहसंयोजक त्रिज्या की तुलना में बड़ी होती है।
2. ऑक्सीजन की तुलना में नाइट्रोजन की प्रथम आयनन एन्थैल्पी (First Ionization Enthalpy) का मान अधिक होता है, जिसका मुख्य कारण नाइट्रोजन के 2p कक्षकों का अर्ध-पूर्ण (Half-filled) होना है।
3. आवर्त सारणी में फ्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान क्लोरीन की तुलना में अधिक होता है, क्योंकि फ्लोरीन का आकार अत्यंत छोटा होने के कारण आने वाला नया इलेक्ट्रॉन पहले से उपस्थित 2p इलेक्ट्रונים से अधिक प्रतिकर्षण अनुभव करता है।
4. लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanide Contraction) के कारण 4d और 5d संक्रमण श्रेणी के तत्वों (जैसे जिरकोनियम और हाफ़िज़ियम) की परमाणु और आयनिक त्रिज्याएँ लगभग समान हो जाती हैं, जिसका मुख्य कारण 4f कक्षकों का दुर्बल आवरण प्रभाव (Shielding effect) है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'थर्मिट प्रक्रम' (Thermite Process) के दौरान फेरिक ऑक्साइड ($Fe_2O_3$) को एल्युमिनियम चूर्ण के साथ अपचयित किया जाता है, जिसमें एल्युमिनियम एक प्रबल अपचायक के रूप में कार्य करते हुए अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न करता है, और इस ऊष्मा का उपयोग रेल की पटरियों या टूटे हुए मशीनरी भागों को जोड़ने (वेल्डिंग) के लिए किया जाता है।
2. जब सफेद फॉस्फोरस ($P_4$) को सांद्र सोडियम हाइड्रोक्साइड (NaOH) विलयन के साथ अक्रिय वातावरण में गर्म किया जाता है, तो यह असमानुपातन (Disproportionation) अभिक्रिया के माध्यम से फॉस्फीन गैस ($PH_3$) और सोडियम हाइपोफॉस्फाइट ($NaH_2PO_2$) का निर्माण करता है।
3. 'एक्वा रीजिया' (Aqua Regia), जो कि सांद्र हाइड्रोक्लोरिक एसिड ($HCl$) और सांद्र नाइट्रिक एसिड ($HNO_3$) का $3:1$ के आयतन अनुपात में ताजा मिश्रण होता है, सोने और प्लैटिनम जैसी उत्कृष्ट धातुओं को घोलने में सक्षम होता है क्योंकि इसमें उत्पन्न होने वाला 'क्लोरीन मुक्त मूलक' और 'नाइट्रोसिल क्लोराइड' इन धातुओं के साथ क्लोराइड संकुल बनाते हैं।
4. सोडियम कार्बोनेट के निर्माण के लिए प्रयुक्त 'सॉल्वे प्रक्रम' (Solvay Process) में मध्यवर्ती उत्पाद के रूप में अमोनियम कार्बोनेट और अमोनियम बाइकार्बोनेट बनते हैं, तथा इस प्रक्रम की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें अमोनिया का पुनर्चक्रण (Recycling) कैल्शियम हाइड्रोक्साइड के साथ अमोनियम क्लोराइड की प्रतिक्रिया द्वारा सफलतापूर्वक किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक तथा भौतिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सोडियम और पोटैशियम जैसी अत्यधिक प्रतिक्रियाशील क्षार धातुएँ इतनी नरम होती हैं कि इन्हें चाकू से आसानी से काटा जा सकता है, और ये ऑक्सीजन के साथ तीव्र अभिक्रिया करके क्षारीय ऑक्साइड बनाती हैं जो जल में घुलकर क्षार प्रदान करते हैं।
2. पारा (Mercury) कमरे के तापमान पर एकमात्र ऐसी तरल धातु है जो काँच को गीला नहीं करती है और इसका उच्च घनत्व तथा कम वाष्प दाब इसे थर्मामीटर के लिए आदर्श बनाता है।
3. कार्बन का अपरूप 'हीरा' (Diamond) विद्युत का कुचालक होता है क्योंकि इसका प्रत्येक कार्बन परमाणु अन्य चार कार्बन परमाणुओं से सहसंयोजक बंध द्वारा चतुष्फलकीय रूप से जुड़ा होता है, जिससे कोई भी मुक्त इलेक्ट्रॉन उपलब्ध नहीं होता है।
4. 'एक्वा रेजिया' (Aqua Regia) सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल का $3:1$ के अनुपात में मिश्रण है, जो स्वर्ण और प्लैटिनम जैसी उत्कृष्ट (Noble) धातुओं को भी घोलने की क्षमता रखता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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परमाणु भौतिकी और रेडियोधर्मिता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'बीटा-क्षय' (Beta decay) के दौरान नाभिक के भीतर एक न्यूट्रॉन का प्रोटॉन में रूपांतरण होता है, जिसके फलस्वरूप एक इलेक्ट्रॉन और एक 'एंटीन्यूट्रिनो' (Antineutrino) का उत्सर्जन होता है, जिससे द्रव्यमान संख्या अपरिवर्तित रहती है किंतु परमाणु क्रमांक एक से बढ़ जाता है।
2. 'समभारिक' (Isobars) वे परमाणु होते हैं जिनकी द्रव्यमान संख्या (Mass number) समान होती है लेकिन परमाणु क्रमांक (Atomic number) भिन्न होते हैं, और इनके नाभिकीय गुणों में भारी अंतर पाया जाता है।
3. 'नाभिकीय संलयन' (Nuclear fusion) की प्रक्रिया केवल अत्यधिक उच्च तापमान और उच्च दाब पर ही संभव है क्योंकि दो हल्के नाभिकों को एक-दूसरे के निकट लाने पर उनके बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल के कारण तीव्र प्रतिकर्षक ऊर्जा अवरोध उत्पन्न होता है जिसे पार करना अनिवार्य होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण (Acids, Bases and Salts) के वैचारिक परिप्रेक्ष्य में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लुईस अम्ल (Lewis acid) वे रासायनिक स्पीशीज होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म (Electron pair) को ग्रहण कर सकती हैं, जबकि लुईस क्षार (Lewis base) इलेक्ट्रॉन युग्म का त्याग कर सकते हैं, जिसके फलस्वरूप इनके मध्य उपसहसंयोजक बंध (Coordinate covalent bond) का निर्माण होता है।
2. ब्रॉन्स्टेड-लोरी संकल्पना के अनुसार, किसी अम्ल का 'संयुग्मी क्षार' (Conjugate base) उस अम्ल द्वारा एक प्रोटॉन ($H^+$) त्यागने के पश्चात शेष बची हुई स्पीशीज होती है, और एक दुर्बल अम्ल का संयुग्मी क्षार हमेशा एक प्रबल क्षार होता है।
3. बहुprotic अम्लों के जलीय विलयन में क्रमिक आयनन स्थिरांकों ($K_{a1}, K_{a2}, K_{a3}$) के मानों में सामान्यतः निरंतर ह्रास ($K_{a1} > K_{a2} > K_{a3}$) देखा जाता है, जिसका मुख्य कारण ऋणावेशित आयन से धनात्मक प्रोटॉन को अलग करने के लिए अधिक स्थिर वैद्युत आकर्षण बल के विरुद्ध अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होना है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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